{"_id":"65df84caa266aa09f70b7144","slug":"area-reduced-to-halframayana-city-basti-news-c-207-1-bst1001-112138-2024-02-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: रकबा हो गया आधा... रामायण सिटी के लिए जमीन नहीं खोज पाया बीडीए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: रकबा हो गया आधा... रामायण सिटी के लिए जमीन नहीं खोज पाया बीडीए
Thu, 29 Feb 2024 12:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 29 Feb 2024 12:39 AM IST
विज्ञापन
दो साल पहले शासन ने बनाई थी योजना, शुरुआत में 25 एकड़ जमीन का तय हुआ था मानक
बीडीए परिक्षेत्र में जमीन न मिलने से घटकर 12.5 एकड़ हुआ मानक, फिर भी नतीजा सिफर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) परिक्षेत्र में रामायण सिटी बसाने की योजना फाइलों में कैद होकर रह गई है। शासन स्तर से प्रयास का दूसरा चरण भी फ्लाप होता नजर आ रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को उतारने के लिए बीडीए को जमीन नहीं उपलब्ध हो पाई है। जबकि शासन ने रामायण सिटी का रकबा घटाकर आधा कर दिया है। छह महीने बाद भी बीडीए अभी जमीन की तलाश नहीं कर पाया है।
वर्ष 2022 में शासन ने सभी जिलों में रामायण सिटी बसाने की योजना चलाई थी। बस्ती में यह जिम्मेदारी बीडीए को सौंपी गई। इसके तहत 25 एकड़ के भू-भाग में शासकीय मानक के अनुसार आवासीय काॅलोनी और कामर्शियल भवन विकसित किए जाने थे। इस परिसर में बिजली, पानी, सड़क आदि सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया होनी थी। इससे उम्मीद जगी थी कि महानगरों की भांति इस जिले में भी विकास का एक नया आयाम स्थापित होगा।
रामायण सिटी बसाने से आसपास के क्षेत्रों की भी रौनक बढ़ जाती है। शुरुआत में इस दिशा में स्थानीय स्तर पर प्रयास हुए। मगर, इतने बड़े भू-भाग में सरकारी जमीन नहीं उपलब्ध हो पाई। बाद में योजना बनी कि काश्तकारों से जमीन खरीदकर इस योजना को अमली जामा पहनाया जाएगा। मगर, यह सब कागजी प्रक्रिया तक सिमट कर रह गई। कोई ठोस प्रयास न होने से निजी क्षेत्र की भी जमीनें बीडीए को उपलब्ध नहीं हो पाईंं।
विज्ञापन
शासन में जमीन उपलब्ध न होने की रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई। इसके बाद शासन स्तर से दोबारा निर्णय लिया गया कि शहरी क्षेत्र में रामायण सिटी के लिए 25 एकड़ की जगह 12.5 एकड़ ही जमीन उपलब्ध कराई जाए। जमीन का मानक घटकर आधा होने के छह माह बीतने के बाद कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।
बीडीए ने जमीन तलाशने की कोई रूपरेखा नहीं तैयार की है। बोर्ड की बैठक से लेकर आमजन तक से इसके लिए कोई चर्चा नहीं की जा रही है। बीडीए की ओर से विशेष समिति का गठन भी नहीं किया गया है, जिसके माध्यम से जमीन की तलाश की जा सकें। जबकि आमजन की सहभागिता के बगैर इस योजना को जमीन पर उतार पाना कठिन है। काश्तकारों की सहमति से ही नए शहर बसाने का सपना पूरा होगा।
..
रेट भी निर्धारित नहीं
जमीन के लिए मूल्य निर्धारित करना सबसे आकर्षण का केंद्र होता है। मगर, बीडीए ने रामायण सिटी के लिए किसी क्षेत्र का न तो चयन किया है और न ही जमीन का कोई मूल्य निर्धारित किया है। बीडीए का कहना है कि पहले जमीन उपलब्ध होगी तभी सर्किल रेट के अनुसार उसका मूल्यांकन किया जा सकता है। इसके लिए बड़े काश्तकार नहीं मिल पा रहे हैं। शुरुआत में मेडिकल कॉलेज रामपुर क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने के लिए कुछ काश्तकारों की तरफ से पेशकश हुई थी, लेकिन रकबा कम होने से बात नहीं बन पाई।
...
इस श्रेणी में चाहिए जमीन
बीडीए के 151 वर्ग किमी परिक्षेत्र यानी लगभग 10 किमी परिधि में रामायण सिटी के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। किसी भी मुख्य सड़क से इस जमीन का जुड़ाव होना जरूरी है, ताकि आवागमन आसानी से हो सके। इसके अलावा जमीन की सतह नीचे नहीं होनी चाहिए। यानी नदियों एवं ताल-पोखरों के किनारे की डूब क्षेत्र वाली जमीन चिह्नित नहीं की जाएगी। आयत एवं वर्गाकार प्रकृति की जमीन ही उपयुक्त होगी।
...
ऐसे बनेगा रामायण सिटी
बीडीए परिक्षेत्र में रामायण सिटी प्रभु श्रीराम के चरित्र से जुड़े माता सीता एवं उनके भाइयों, हनुमान जी एवं अन्य पात्रों के नाम काॅलोनी एवं चौक-चौराहे एवं स्थल विकसित किए जाएंगे। इसमें आवासीय काॅलोनी के साथ मंटीप्लेक्स कामर्शियल बिल्डिंग, मनोरंजन पार्क, नौका विहार, बिजली उपकेंद्र, पेट्रोल पंप, भव्य गेट समेत सभी संसाधन मुहैया होंगे। ताकि परिसर में रहने वाले लोगों को हर प्रकार की सुविधा मिल सकें।
...
...
कोट
रामायण सिटी के लिए जमीन के क्षेत्रफल का मानक घटकर 12.50 एकड़ हो गया है। कुछ काश्तकारों से पहल की गई थी, लेकिन बात नहीं बन पाई। नए सिरे से जमीन की तलाश की जा रही है। उम्मीद है कि इस बार जमीन उपलब्ध हो जाएगी।
-कमलेश चंद्र, सचिव बीडीए/ एडीएम
विज्ञापन
बीडीए परिक्षेत्र में जमीन न मिलने से घटकर 12.5 एकड़ हुआ मानक, फिर भी नतीजा सिफर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) परिक्षेत्र में रामायण सिटी बसाने की योजना फाइलों में कैद होकर रह गई है। शासन स्तर से प्रयास का दूसरा चरण भी फ्लाप होता नजर आ रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को उतारने के लिए बीडीए को जमीन नहीं उपलब्ध हो पाई है। जबकि शासन ने रामायण सिटी का रकबा घटाकर आधा कर दिया है। छह महीने बाद भी बीडीए अभी जमीन की तलाश नहीं कर पाया है।
वर्ष 2022 में शासन ने सभी जिलों में रामायण सिटी बसाने की योजना चलाई थी। बस्ती में यह जिम्मेदारी बीडीए को सौंपी गई। इसके तहत 25 एकड़ के भू-भाग में शासकीय मानक के अनुसार आवासीय काॅलोनी और कामर्शियल भवन विकसित किए जाने थे। इस परिसर में बिजली, पानी, सड़क आदि सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया होनी थी। इससे उम्मीद जगी थी कि महानगरों की भांति इस जिले में भी विकास का एक नया आयाम स्थापित होगा।
विज्ञापन
रामायण सिटी बसाने से आसपास के क्षेत्रों की भी रौनक बढ़ जाती है। शुरुआत में इस दिशा में स्थानीय स्तर पर प्रयास हुए। मगर, इतने बड़े भू-भाग में सरकारी जमीन नहीं उपलब्ध हो पाई। बाद में योजना बनी कि काश्तकारों से जमीन खरीदकर इस योजना को अमली जामा पहनाया जाएगा। मगर, यह सब कागजी प्रक्रिया तक सिमट कर रह गई। कोई ठोस प्रयास न होने से निजी क्षेत्र की भी जमीनें बीडीए को उपलब्ध नहीं हो पाईंं।
विज्ञापन
शासन में जमीन उपलब्ध न होने की रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई। इसके बाद शासन स्तर से दोबारा निर्णय लिया गया कि शहरी क्षेत्र में रामायण सिटी के लिए 25 एकड़ की जगह 12.5 एकड़ ही जमीन उपलब्ध कराई जाए। जमीन का मानक घटकर आधा होने के छह माह बीतने के बाद कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।
बीडीए ने जमीन तलाशने की कोई रूपरेखा नहीं तैयार की है। बोर्ड की बैठक से लेकर आमजन तक से इसके लिए कोई चर्चा नहीं की जा रही है। बीडीए की ओर से विशेष समिति का गठन भी नहीं किया गया है, जिसके माध्यम से जमीन की तलाश की जा सकें। जबकि आमजन की सहभागिता के बगैर इस योजना को जमीन पर उतार पाना कठिन है। काश्तकारों की सहमति से ही नए शहर बसाने का सपना पूरा होगा।
..
रेट भी निर्धारित नहीं
जमीन के लिए मूल्य निर्धारित करना सबसे आकर्षण का केंद्र होता है। मगर, बीडीए ने रामायण सिटी के लिए किसी क्षेत्र का न तो चयन किया है और न ही जमीन का कोई मूल्य निर्धारित किया है। बीडीए का कहना है कि पहले जमीन उपलब्ध होगी तभी सर्किल रेट के अनुसार उसका मूल्यांकन किया जा सकता है। इसके लिए बड़े काश्तकार नहीं मिल पा रहे हैं। शुरुआत में मेडिकल कॉलेज रामपुर क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने के लिए कुछ काश्तकारों की तरफ से पेशकश हुई थी, लेकिन रकबा कम होने से बात नहीं बन पाई।
...
इस श्रेणी में चाहिए जमीन
बीडीए के 151 वर्ग किमी परिक्षेत्र यानी लगभग 10 किमी परिधि में रामायण सिटी के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। किसी भी मुख्य सड़क से इस जमीन का जुड़ाव होना जरूरी है, ताकि आवागमन आसानी से हो सके। इसके अलावा जमीन की सतह नीचे नहीं होनी चाहिए। यानी नदियों एवं ताल-पोखरों के किनारे की डूब क्षेत्र वाली जमीन चिह्नित नहीं की जाएगी। आयत एवं वर्गाकार प्रकृति की जमीन ही उपयुक्त होगी।
...
ऐसे बनेगा रामायण सिटी
बीडीए परिक्षेत्र में रामायण सिटी प्रभु श्रीराम के चरित्र से जुड़े माता सीता एवं उनके भाइयों, हनुमान जी एवं अन्य पात्रों के नाम काॅलोनी एवं चौक-चौराहे एवं स्थल विकसित किए जाएंगे। इसमें आवासीय काॅलोनी के साथ मंटीप्लेक्स कामर्शियल बिल्डिंग, मनोरंजन पार्क, नौका विहार, बिजली उपकेंद्र, पेट्रोल पंप, भव्य गेट समेत सभी संसाधन मुहैया होंगे। ताकि परिसर में रहने वाले लोगों को हर प्रकार की सुविधा मिल सकें।
...
...
कोट
रामायण सिटी के लिए जमीन के क्षेत्रफल का मानक घटकर 12.50 एकड़ हो गया है। कुछ काश्तकारों से पहल की गई थी, लेकिन बात नहीं बन पाई। नए सिरे से जमीन की तलाश की जा रही है। उम्मीद है कि इस बार जमीन उपलब्ध हो जाएगी।
-कमलेश चंद्र, सचिव बीडीए/ एडीएम