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41 दिनों से पहेली बनी है आंचल की हत्या
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41 दिनों से पहेली बनी है आंचल की हत्या
परशुरामपुर (बस्ती)। क्षेत्र के रोहदा गांव की छह वर्षीय आंचल की हत्या की वजह 41 दिनों से पहेली बनी हुई है।
14 दिसंबर को लापता होने के सातवें दिन 20 दिसंबर को गन्ने के खेत में शव मिला था। पुलिस तभी से घटना के कई संभावित पहलुओं पर तफ्तीश कर चुकी है। यहां तक कि तंत्र-मंत्र, अंधविश्वास तक को भी वजह की आशंका जता चुकी है। मगर अब तक ऐसा कोई सिरा हाथ नहीं आया, जिससे गुत्थी सुलझ सके। आंचल का शव 20 दिसंबर को घर से आधा किलोमीटर दूर गन्ने के खेत में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की बात सामने आई थी।
हाथ की कोहनी में नस वाली जगह पर चार-पांच सुई चुभाने के निशान मिले थे। पोस्टमार्टम के समय शव की हालत देखकर बताया गया कि 24 घंटे के भीतर हत्या की गई थी। यानी 19 दिसंबर की रात में उसे मौत के घाट उतारा गया। उसी दिन आंचल का मुंडन होना तय था। मुंडन के दिन हत्या होने को पुलिस ने किसी अंधविश्वास या टोना-टोटका से जोड़कर गुत्थी सुलझाने की भरसक कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुई।
मृतका के पिता रोहदा निवासी रामयज्ञ नाई बिरादरी के हैं। खुद रोजगार के सिलसिले में मुंबई में रहते हैं, लेकिन पत्नी और परिवार के अन्य लोग पारंपरिक यजमानी का काम करते हैं। एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि इसके परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। ऐसे में किसने बच्ची की जान ली, यह बड़ा रहस्य है। पुलिस विविध पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
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14 दिसंबर को दोपहर बाद रोहदा गांव के रामयश की पुत्री आंचल गांव की एक ऐसी दुकान से अचानक लापता हो गई थी, जहां देर रात तक लोग मौजूद रहते हैं। घर में उसके मुंडन की तैयारी चल रही थी। परिवार के लोग कार्ड बांट रहे थे। काफी देर रात बालिका का पता नहीं चला तो पिता ने पुलिस को सूचना दी। इसी बीच रविवार (20 दिसंबर) को गन्ने की कटाई करने गए ग्रामीणों ने बालिका का शव देखा। परिवार के लोग पहुंचे और उसकी पहचान आंचल के रूप में की।
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परशुरामपुर (बस्ती)। क्षेत्र के रोहदा गांव की छह वर्षीय आंचल की हत्या की वजह 41 दिनों से पहेली बनी हुई है।
14 दिसंबर को लापता होने के सातवें दिन 20 दिसंबर को गन्ने के खेत में शव मिला था। पुलिस तभी से घटना के कई संभावित पहलुओं पर तफ्तीश कर चुकी है। यहां तक कि तंत्र-मंत्र, अंधविश्वास तक को भी वजह की आशंका जता चुकी है। मगर अब तक ऐसा कोई सिरा हाथ नहीं आया, जिससे गुत्थी सुलझ सके। आंचल का शव 20 दिसंबर को घर से आधा किलोमीटर दूर गन्ने के खेत में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की बात सामने आई थी।
हाथ की कोहनी में नस वाली जगह पर चार-पांच सुई चुभाने के निशान मिले थे। पोस्टमार्टम के समय शव की हालत देखकर बताया गया कि 24 घंटे के भीतर हत्या की गई थी। यानी 19 दिसंबर की रात में उसे मौत के घाट उतारा गया। उसी दिन आंचल का मुंडन होना तय था। मुंडन के दिन हत्या होने को पुलिस ने किसी अंधविश्वास या टोना-टोटका से जोड़कर गुत्थी सुलझाने की भरसक कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुई।
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मृतका के पिता रोहदा निवासी रामयज्ञ नाई बिरादरी के हैं। खुद रोजगार के सिलसिले में मुंबई में रहते हैं, लेकिन पत्नी और परिवार के अन्य लोग पारंपरिक यजमानी का काम करते हैं। एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि इसके परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। ऐसे में किसने बच्ची की जान ली, यह बड़ा रहस्य है। पुलिस विविध पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
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14 दिसंबर को दोपहर बाद रोहदा गांव के रामयश की पुत्री आंचल गांव की एक ऐसी दुकान से अचानक लापता हो गई थी, जहां देर रात तक लोग मौजूद रहते हैं। घर में उसके मुंडन की तैयारी चल रही थी। परिवार के लोग कार्ड बांट रहे थे। काफी देर रात बालिका का पता नहीं चला तो पिता ने पुलिस को सूचना दी। इसी बीच रविवार (20 दिसंबर) को गन्ने की कटाई करने गए ग्रामीणों ने बालिका का शव देखा। परिवार के लोग पहुंचे और उसकी पहचान आंचल के रूप में की।