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Basti News: आस्ट्रेलिया से पुरखों के गांव पहुंचे मुनेश्वर मिश्र
Wed, 04 Oct 2023 12:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 04 Oct 2023 12:15 AM IST
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ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में रह रहे मुनेश्वर सहदेव मिश्र परिजनों से मिलने कप्तानगंज विकासखंड के नक
स्वजन से मिलकर भावविह्वल हुए एनआरआई दंपती
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आस्ट्रेलिया के कैनबरा में रह रहे मुनेश्वर सहदेव मिश्र अपनी पत्नी के साथ मंगलवार को पहली बार अपने पुरखों के गांव जिले के कप्तानगंज ब्लॉक के नकटी देई पहुंचे। परिवारीजनों के अलावा गांव के लोगों ने एनआरआई दंपती का खूब आवाभगत किया। स्वजनों और गांव के लोगों से मिलकर वह भावविह्वल रहे।
बताया कि उनके बाबा रामबरन मिश्रा 1897 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में अंग्रेजों द्वारा फिजी भेज दिए गए थे। वहां उनके बेटे सहदेव मिश्र फिजी सरकार में सेवारत रहे। जबकि बाबा की तीसरी पीढ़ी सहदेव मिश्र के संतान मुनेश्वर मिश्र फिजी सरकार में राजदूत के पद पर तैनात रहे। बाद उन्हें ऑस्ट्रेलिया सरकार 1975 में इलेक्शन कमिशन में अधिकारी के पद बुला लिया। यहां से13 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्ति होने के बाद वह पत्नी सुनीता और बेटी शिवानी के साथ ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा शहर में ही रह रहे हैं। बेटी शिवानी ऑस्ट्रेलिया के ही एक अन्य शहर नर्बन में एक निजी कंपनी की अकाउंटेंट हैं। मुनेश्वर मिश्र बताते हैं कि बाबा और पिताजी से गांव की चर्चा वह अक्सर सुना करते थे। लंबे समय से पुरखों के गांव देखने की मंशा थी। कहा कि यहां आकर दुनिया के सबसे कीमती चीज प्राप्त होने जैसी अनुभूति हो रही है। एनआरआई दंपती ने अपने पुरखों के गांव के अलावा अयोध्या में बन रहे भव्य श्रीराम मंदिर के दर्शन की भी इच्छा जताई है। सुभावती मिश्रा, गजाधर प्रसाद मिश्र, ललित प्रसाद मिश्र, जगत प्रसाद मिश्र, दीनानाथ मिश्र, दया नाथ मिश्र आदि स्वजन अपने कुनबे के वंशज को पाकर खुश नजर आए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आस्ट्रेलिया के कैनबरा में रह रहे मुनेश्वर सहदेव मिश्र अपनी पत्नी के साथ मंगलवार को पहली बार अपने पुरखों के गांव जिले के कप्तानगंज ब्लॉक के नकटी देई पहुंचे। परिवारीजनों के अलावा गांव के लोगों ने एनआरआई दंपती का खूब आवाभगत किया। स्वजनों और गांव के लोगों से मिलकर वह भावविह्वल रहे।
बताया कि उनके बाबा रामबरन मिश्रा 1897 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में अंग्रेजों द्वारा फिजी भेज दिए गए थे। वहां उनके बेटे सहदेव मिश्र फिजी सरकार में सेवारत रहे। जबकि बाबा की तीसरी पीढ़ी सहदेव मिश्र के संतान मुनेश्वर मिश्र फिजी सरकार में राजदूत के पद पर तैनात रहे। बाद उन्हें ऑस्ट्रेलिया सरकार 1975 में इलेक्शन कमिशन में अधिकारी के पद बुला लिया। यहां से13 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्ति होने के बाद वह पत्नी सुनीता और बेटी शिवानी के साथ ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा शहर में ही रह रहे हैं। बेटी शिवानी ऑस्ट्रेलिया के ही एक अन्य शहर नर्बन में एक निजी कंपनी की अकाउंटेंट हैं। मुनेश्वर मिश्र बताते हैं कि बाबा और पिताजी से गांव की चर्चा वह अक्सर सुना करते थे। लंबे समय से पुरखों के गांव देखने की मंशा थी। कहा कि यहां आकर दुनिया के सबसे कीमती चीज प्राप्त होने जैसी अनुभूति हो रही है। एनआरआई दंपती ने अपने पुरखों के गांव के अलावा अयोध्या में बन रहे भव्य श्रीराम मंदिर के दर्शन की भी इच्छा जताई है। सुभावती मिश्रा, गजाधर प्रसाद मिश्र, ललित प्रसाद मिश्र, जगत प्रसाद मिश्र, दीनानाथ मिश्र, दया नाथ मिश्र आदि स्वजन अपने कुनबे के वंशज को पाकर खुश नजर आए।
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