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वाटर पोस्ट गायब, कागज में संचालित
basti
Updated Tue, 03 Apr 2018 11:34 PM IST
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रौता चौराहे पर लगे वाटर पोस्ट में सिफ टोटी का निशान बचा।
- फोटो : amar ujala
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चौक-चौराहों पर गर्मी में लोगों की प्यास बुझाने के लिए लगाए गए वाटर कूलर अब कागज में ही हैं। क्योंकि धरातल पर इनका अस्तित्व समाप्त हो चुका है। ऐसे में नगर पालिका का आम लोगों को स्वच्छ और ठंडा पानी पिलाने का प्रयास शून्य हो गया है।
नगर पालिका परिषद की तत्कालीन अध्यक्ष स्नेहलता पाल ने गर्मी में शहर और बाहर से आने वालों को ठंडा और शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की योजना वर्ष 2001 में बनाई और इसी वर्ष से क्रियान्वित कर दिया गया। शहर के 12 स्थान इसके लिए चिह्नित किए गए। इन स्थानों पर नगर पालिका ने विधायक निधि से वाटर कूलर स्थापित करा दिए। सार्वजनिक स्थल पर लगे इन वाटर कूलरों का पानी इधर-उधर न पसरे, इसकी भी व्यवस्था नगर पालिका ने बनाई और नल के नीचे छोटी चहारदीवारी खड़ी कर दी। शुरुआती दौर में इन वाटर कूलरों से लोग पानी पीते रहे, मगर एक वर्ष के भीतर अधिकांश वाटर कूलरों में तकनीकी खराबी आ गई, जिसे जिम्मेदारों ने दुरुस्त नहीं कराया। एक के बाद एक वाटर कूलर खराब होते गए और पांच साल के कार्यकाल में करीब सभी वाटर कूलर खराब होकर बंद हो गए मगर इसकी मरम्मत की जहमत न तो पालिका प्रशासन न ही जलकल विभाग ने उठाई।
यहां लगाए गए थे वाटरकूलर
शहर के नेहरू तिराहा, कलेक्ट्रेट, शास्त्री चौक, कांग्रेस कार्यालय, एसबीआई प्रधान शाखा के सामने, जीजीआईसी, बेगम खैर, महिला कॉलेज, किसान पीजी कॉलेज, रौता चौराहा, रामेश्वरपुरी व पांडेय बाजार में वाटर कूलर स्थापित कि ए गए थे।
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प्रति वाटर कूलर एक लाख खर्च
विधायक निधि से स्थापित इन वाटर कूलरों पर करीब एक लाख रुपये प्रति वाटर कूलर उस समय खर्च किया गया था। इसमें लोहे के दरवाजे वाला कमरा तथा मशीन के अलावा स्टेब्लाइजर लगा था, जो न जाने कहां गायब हो गया है।
प्रभारी ईओ बोले
ईओ का प्रभार देख रहे कर निर्धारण अधिकारी केके चौबे ने कहा कि वाटर कूलर की फाइल कहां है। यह पता नहीं है। चूंकि यह 16 साल पहले स्थापित कराया गया था, ऐसे में किन स्थितियों में इसे तत्कालीन अध्यक्ष ने लगवाया था, यह संज्ञान में नहीं है। वाटर कूलर कहां गए? यह तो पता करना पड़ेगा। फिलहाल, शहर में कहीं भी पालिका का वाटर कूलर नहीं है।
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चौक-चौराहों पर गर्मी में लोगों की प्यास बुझाने के लिए लगाए गए वाटर कूलर अब कागज में ही हैं। क्योंकि धरातल पर इनका अस्तित्व समाप्त हो चुका है। ऐसे में नगर पालिका का आम लोगों को स्वच्छ और ठंडा पानी पिलाने का प्रयास शून्य हो गया है।
नगर पालिका परिषद की तत्कालीन अध्यक्ष स्नेहलता पाल ने गर्मी में शहर और बाहर से आने वालों को ठंडा और शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की योजना वर्ष 2001 में बनाई और इसी वर्ष से क्रियान्वित कर दिया गया। शहर के 12 स्थान इसके लिए चिह्नित किए गए। इन स्थानों पर नगर पालिका ने विधायक निधि से वाटर कूलर स्थापित करा दिए। सार्वजनिक स्थल पर लगे इन वाटर कूलरों का पानी इधर-उधर न पसरे, इसकी भी व्यवस्था नगर पालिका ने बनाई और नल के नीचे छोटी चहारदीवारी खड़ी कर दी। शुरुआती दौर में इन वाटर कूलरों से लोग पानी पीते रहे, मगर एक वर्ष के भीतर अधिकांश वाटर कूलरों में तकनीकी खराबी आ गई, जिसे जिम्मेदारों ने दुरुस्त नहीं कराया। एक के बाद एक वाटर कूलर खराब होते गए और पांच साल के कार्यकाल में करीब सभी वाटर कूलर खराब होकर बंद हो गए मगर इसकी मरम्मत की जहमत न तो पालिका प्रशासन न ही जलकल विभाग ने उठाई।
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यहां लगाए गए थे वाटरकूलर
शहर के नेहरू तिराहा, कलेक्ट्रेट, शास्त्री चौक, कांग्रेस कार्यालय, एसबीआई प्रधान शाखा के सामने, जीजीआईसी, बेगम खैर, महिला कॉलेज, किसान पीजी कॉलेज, रौता चौराहा, रामेश्वरपुरी व पांडेय बाजार में वाटर कूलर स्थापित कि ए गए थे।
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प्रति वाटर कूलर एक लाख खर्च
विधायक निधि से स्थापित इन वाटर कूलरों पर करीब एक लाख रुपये प्रति वाटर कूलर उस समय खर्च किया गया था। इसमें लोहे के दरवाजे वाला कमरा तथा मशीन के अलावा स्टेब्लाइजर लगा था, जो न जाने कहां गायब हो गया है।
प्रभारी ईओ बोले
ईओ का प्रभार देख रहे कर निर्धारण अधिकारी केके चौबे ने कहा कि वाटर कूलर की फाइल कहां है। यह पता नहीं है। चूंकि यह 16 साल पहले स्थापित कराया गया था, ऐसे में किन स्थितियों में इसे तत्कालीन अध्यक्ष ने लगवाया था, यह संज्ञान में नहीं है। वाटर कूलर कहां गए? यह तो पता करना पड़ेगा। फिलहाल, शहर में कहीं भी पालिका का वाटर कूलर नहीं है।