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सावधान: खाने-पीने के मिलावटी सामान बना देंगे बीमार
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सावधान! खाने-पीने के मिलावटी सामान आपको बना देंगे बीमार
बस्ती। चुनाव खत्म होने के साथ ही होली की तैयारी होने लगी है। इस त्योहार में सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, मिलावटखोरी की शिकायतें मिलने लगती हैं और ऐसे में जरा भी चूक हुई तो स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। लिहाजा खाने-पीने से लेकर रंग, अबीर-गुलाल आदि वस्तुओं की खरीदारी करते वक्त सावधानी जरूरी है।
जानकारी के मुताबिक होली पर उपभोक्ता वस्तुओं की भारी मांग के मद्देनजर बाजार में मिलावटी सामानों की खेप आ चुकी है। गुणवत्ता विहीन खाद्य पदार्थों से गोदाम भर चुके हैं। गांव से लेकर शहर तक के फुटकर काउंटरों से इन्हें उपभोक्ताओं के घर तक पहुंचाया जाएगा। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके गौड़ ने बताया कि मिलावटी पदार्थों के सेवन से किडनी, लीवर, नसों से संबंधित बीमारियां हो जाती हैं। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर के मरीजों को कभी-कभी मुश्किल पड़ जाती है। पेट खराब, फूड प्वाइजनिंग, उल्टी जैसी बीमारियां हो जाती हैं। इससे बचाव करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है।
हल्दी में बुरादा, काली मिर्च में पपीते का बीज
- पिछले सालों में खाद्य पदार्थ के तमाम नमूनों की जांच में पाया गया है कि सेहत के दुश्मन कुछ भी मिला देने में संकोच नहीं करते। काली मिर्च में पपीते का बीज, पिसी हल्दी में ईट का चूरा और धनिया में लकड़ी का बुरादा पाया जा चुका है। यही नहीं, खाने वाले सभी तेल, दाल, मैदा, घी जैसे सबसे जरूरी सामानों में सबसे अधिक मिलावट पाई गई है। होली के इस त्योहार में इस्तेमाल होने वाले रंग, अबीर गुलाल में भी अंधाधुंध मिलावट होती है।
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दूध, खोया में सबसे अधिक मिलावट
-होली के अवसर पर दूध खोया एवं अन्य दुग्ध उत्पादों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। जिसकी पूर्ति मिलावटी व सिंथेटिक दूध से की जाती है। रंग व केमिकल के सहारे मिलावट पर पर्दा डाला जाता है। जांच में पाया गया है कि आम तौर पर दूध में डिटरजेंट, शैंपू, खड़िया, अरारोट आदि मिलाया जाता है। जो धीमे जहर का काम करता है।
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ऐसे करें मिलावट की जांच
- दूध- दूध में मिलावट की जांच के लिए किसी चिकनी लकड़ी या हथेली पर एक बूंद टपका कर देखिए। अगर दूध बहता हुआ नीचे की ओर जाए और सफेद धार सा निशान बन जाए तो समझें मिलावट है। डिटर्जेट की जांच के लिए किसी शीशी या टेस्ट ट्यूब में जोर से हिलाने से बना झाग देर तक रहे तो पक्का उसमें डिटर्जेट है।
- आयोडीन नमक- उबले आलू पर नमक छिड़ककर कुछ देर रख दें। इसके बाद दो-चार बूंद नींबू का रस डालें। यदि नमक में आयोडीन होगा तो आलू का रंग नीला हो जाएगा, ऐसा नहीं है तो समझिए नमक में मिलावट है।
-मिर्च और हल्दी- मिर्च में लालपन व हल्दी में पीला पन लाने के लिए कृत्रिम रंग का प्रयोग करते हैं। ऐसे रंगों की पहचान करने के लिए एक चम्मच चूर्ण को पानी में डालिए। अगर पानी उसी रंग का हो जाए तो समझें कि मिलावट है।
- दालचीनी- दालचीनी में मिलावट करने में केसिया, अमरूद जैसे पौधों की छाल मिलाई जाती है। सूखने के बाद इसका रंग रूप भी अच्छे किस्म की दालचीनी जैसा हो जाता है। नकली दालचीनी मोटी और लकड़ी के स्वाद जैसी होगी।
साबित हो चुकी है मिलावट
पिछले तीन सालों के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जिन नमूनों की जांच कराई गई, उनमें 60 फीसदी से अधिक में मिलावट पाई जा चुकी है। पनीर के 20 नमूनों में 12 में बटर आयल, आरारोट का आटा, सोयाबीन का आटा, यूरिया की मिलावट पाई गई। मिल्क केक के आठ नमूनों में फिटकिरी, सूखा दूध, डालडा की मिलावट पाई गई है। काजू की बर्फी में मूंगफली, सूखा दूध व डालडा की मिलावट पाई गई है। सरसों के तेल में मैटलिक लीपा, अरंडी का तेल, मोबिल आयल जैसे पेट और त्वचा को हानि पहुंचाने वाले तत्व भरे पडे़ हैं।
क्या कहता है कानून
खाद्य पदार्थ के अपव्यीकरण द्वारा जनता की स्वास्थ्य हानि को रोकने के लिए कानून बनाए गए हैं। सन 1954 में खाद्य अपव्यीकरण निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन आफ फूड एडल्टरेशन एक्ट) लागू हुआ। जिला स्तर पर तैनात खाद्य सुरक्षा अधिकारी संबंधित वस्तु का नमूना लेकर उसे प्रयोगशाला में भेजते हैं। वहां से नमूने की जांच रिपोर्ट भेजी जाती है। इसी आधार पर संबंधित थाने में इस अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाता है।
जिलाधिकारी बोलीं, चलेगा अभियान
- डीएम सौम्या अग्रवाल कहती हैं कि होली के मद्देनजर पूरे जिले में खाद्य व त्योहार में प्रयोग होने वाली सभी वस्तुओं की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा। नकली व मिलावटी सामान बेचते पकडे़ जाने वाले को जेल भेजा जाएगा। इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी व खाद्य सुरक्षा अधिकारी को निर्देश दिया गया है।
क्या करें, क्या न करें
- भरोसे मंद दुकान से सामान खरीदें।
- सस्ते की जगह ब्रांडेड सामान को तरजीह दें।
- हड़बड़ी में खरीदारी न करें।
- संभव हो तो मसाले खुद पिसवाएं।
- पनीर, दूध, खोया, मावा, खाने का तेल परखकर ही लें।
- संदेह हो तो जिलाधिकारी या खाद्य सुरक्षा अधिकारी को शिकायत करें।
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बस्ती। चुनाव खत्म होने के साथ ही होली की तैयारी होने लगी है। इस त्योहार में सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, मिलावटखोरी की शिकायतें मिलने लगती हैं और ऐसे में जरा भी चूक हुई तो स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। लिहाजा खाने-पीने से लेकर रंग, अबीर-गुलाल आदि वस्तुओं की खरीदारी करते वक्त सावधानी जरूरी है।
जानकारी के मुताबिक होली पर उपभोक्ता वस्तुओं की भारी मांग के मद्देनजर बाजार में मिलावटी सामानों की खेप आ चुकी है। गुणवत्ता विहीन खाद्य पदार्थों से गोदाम भर चुके हैं। गांव से लेकर शहर तक के फुटकर काउंटरों से इन्हें उपभोक्ताओं के घर तक पहुंचाया जाएगा। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके गौड़ ने बताया कि मिलावटी पदार्थों के सेवन से किडनी, लीवर, नसों से संबंधित बीमारियां हो जाती हैं। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर के मरीजों को कभी-कभी मुश्किल पड़ जाती है। पेट खराब, फूड प्वाइजनिंग, उल्टी जैसी बीमारियां हो जाती हैं। इससे बचाव करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है।
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हल्दी में बुरादा, काली मिर्च में पपीते का बीज
- पिछले सालों में खाद्य पदार्थ के तमाम नमूनों की जांच में पाया गया है कि सेहत के दुश्मन कुछ भी मिला देने में संकोच नहीं करते। काली मिर्च में पपीते का बीज, पिसी हल्दी में ईट का चूरा और धनिया में लकड़ी का बुरादा पाया जा चुका है। यही नहीं, खाने वाले सभी तेल, दाल, मैदा, घी जैसे सबसे जरूरी सामानों में सबसे अधिक मिलावट पाई गई है। होली के इस त्योहार में इस्तेमाल होने वाले रंग, अबीर गुलाल में भी अंधाधुंध मिलावट होती है।
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दूध, खोया में सबसे अधिक मिलावट
-होली के अवसर पर दूध खोया एवं अन्य दुग्ध उत्पादों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। जिसकी पूर्ति मिलावटी व सिंथेटिक दूध से की जाती है। रंग व केमिकल के सहारे मिलावट पर पर्दा डाला जाता है। जांच में पाया गया है कि आम तौर पर दूध में डिटरजेंट, शैंपू, खड़िया, अरारोट आदि मिलाया जाता है। जो धीमे जहर का काम करता है।
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ऐसे करें मिलावट की जांच
- दूध- दूध में मिलावट की जांच के लिए किसी चिकनी लकड़ी या हथेली पर एक बूंद टपका कर देखिए। अगर दूध बहता हुआ नीचे की ओर जाए और सफेद धार सा निशान बन जाए तो समझें मिलावट है। डिटर्जेट की जांच के लिए किसी शीशी या टेस्ट ट्यूब में जोर से हिलाने से बना झाग देर तक रहे तो पक्का उसमें डिटर्जेट है।
- आयोडीन नमक- उबले आलू पर नमक छिड़ककर कुछ देर रख दें। इसके बाद दो-चार बूंद नींबू का रस डालें। यदि नमक में आयोडीन होगा तो आलू का रंग नीला हो जाएगा, ऐसा नहीं है तो समझिए नमक में मिलावट है।
-मिर्च और हल्दी- मिर्च में लालपन व हल्दी में पीला पन लाने के लिए कृत्रिम रंग का प्रयोग करते हैं। ऐसे रंगों की पहचान करने के लिए एक चम्मच चूर्ण को पानी में डालिए। अगर पानी उसी रंग का हो जाए तो समझें कि मिलावट है।
- दालचीनी- दालचीनी में मिलावट करने में केसिया, अमरूद जैसे पौधों की छाल मिलाई जाती है। सूखने के बाद इसका रंग रूप भी अच्छे किस्म की दालचीनी जैसा हो जाता है। नकली दालचीनी मोटी और लकड़ी के स्वाद जैसी होगी।
साबित हो चुकी है मिलावट
पिछले तीन सालों के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जिन नमूनों की जांच कराई गई, उनमें 60 फीसदी से अधिक में मिलावट पाई जा चुकी है। पनीर के 20 नमूनों में 12 में बटर आयल, आरारोट का आटा, सोयाबीन का आटा, यूरिया की मिलावट पाई गई। मिल्क केक के आठ नमूनों में फिटकिरी, सूखा दूध, डालडा की मिलावट पाई गई है। काजू की बर्फी में मूंगफली, सूखा दूध व डालडा की मिलावट पाई गई है। सरसों के तेल में मैटलिक लीपा, अरंडी का तेल, मोबिल आयल जैसे पेट और त्वचा को हानि पहुंचाने वाले तत्व भरे पडे़ हैं।
क्या कहता है कानून
खाद्य पदार्थ के अपव्यीकरण द्वारा जनता की स्वास्थ्य हानि को रोकने के लिए कानून बनाए गए हैं। सन 1954 में खाद्य अपव्यीकरण निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन आफ फूड एडल्टरेशन एक्ट) लागू हुआ। जिला स्तर पर तैनात खाद्य सुरक्षा अधिकारी संबंधित वस्तु का नमूना लेकर उसे प्रयोगशाला में भेजते हैं। वहां से नमूने की जांच रिपोर्ट भेजी जाती है। इसी आधार पर संबंधित थाने में इस अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाता है।
जिलाधिकारी बोलीं, चलेगा अभियान
- डीएम सौम्या अग्रवाल कहती हैं कि होली के मद्देनजर पूरे जिले में खाद्य व त्योहार में प्रयोग होने वाली सभी वस्तुओं की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा। नकली व मिलावटी सामान बेचते पकडे़ जाने वाले को जेल भेजा जाएगा। इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी व खाद्य सुरक्षा अधिकारी को निर्देश दिया गया है।
क्या करें, क्या न करें
- भरोसे मंद दुकान से सामान खरीदें।
- सस्ते की जगह ब्रांडेड सामान को तरजीह दें।
- हड़बड़ी में खरीदारी न करें।
- संभव हो तो मसाले खुद पिसवाएं।
- पनीर, दूध, खोया, मावा, खाने का तेल परखकर ही लें।
- संदेह हो तो जिलाधिकारी या खाद्य सुरक्षा अधिकारी को शिकायत करें।