{"_id":"6578ad6272d0fb78f3015c04","slug":"air-becomes-poisonous-as-cold-increases-aqi-crosses-162-basti-news-c-207-1-sgkp1004-8264-2023-12-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: ठंड बढ़ते ही जहरीली हुई हवा... एक्यूआई 162 पार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: ठंड बढ़ते ही जहरीली हुई हवा... एक्यूआई 162 पार
Wed, 13 Dec 2023 12:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 13 Dec 2023 12:28 AM IST
विज्ञापन
बस्ती। मौसम में बदलाव के कारण हवा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। वातावरण में नमी बढ़ने के कारण पोल्यूटेंट (प्रदूषण बढ़ाने वाले कारक) भारी हो जा रहे हैं। यह वायु मंडल में ऊपर नहीं जा पा रहे हैं। इससे हवा जहरीली हो रही है। जानकार बताते हैं कि धूल के कण और सहालग में हो रही आतिशबाजी व गाड़ियों का रेला लगने से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। यह सांस के रोगियों के लिए खतरनाक है।
सहालग के चलते सड़कों पर इन दिनों गाड़ियों का रेला लगा है। इससे धूल तो उड़ ही रही है, चौराहों पर जब एक साथ गाड़ियां रुक रहीं हैं तो धुएं से भी प्रदूषण बढ़ रहा है। शादियों में पटाखाें से भी जहरीला धुआं उठ रहा है। दूसरी ओर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित प्रमुख सड़कों पर गाड़ियों की आवाजही से धूल उड़ रही है।
राजमार्ग पर संसारीपुर, बिजरा, खैरीओझा, गड़हा गौतम फ्लाईओवर के पास मार्ग पर जमी धूल की मोटी परत हवा की गुणवत्ता खराब करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। डॉक्टरों की मानें तो खराब गुणवत्ता की हवा अस्थमा, हृदय और सांस के रोगियों के साथ बुजुर्ग के लिए खतरनाक है। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को सुबह नौ बजे एक्यूआई 162 और शाम को 115 दर्ज किया गया। मंगलवार को वातावरण में नमी 90 प्रतिशत नमी रही। नमी की वजह से गाड़ियों के धुएं से निकले हानिकारक गैस वायुमंडल में ऊपर नहीं जा पा रही है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -
पानी में लंबे समय तक घुलनशील रहते हैं बारूद के कण
- शिवहर्ष किसान पीजी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिवेंद्र मोहन पांडेय ने बताया कि सहालग में आतिशबाजी का जबरदस्त प्रदर्शन होता है, जिसमें रोशनी एवं आवाज का अतिरेक पर्यावरण में परिवर्तन उत्पन्न करता है। प्राचीन काल में प्रभाव कम था, क्योंकि बारूद का उपयोग केवल युद्ध के समय होता था। बारूद के द्वारा पर्यावरण में सूक्ष्म कणों की मात्रा ज्यादा हो जाती है और हानिकारक प्रदूषक जैसे की नाइट्रेट्स, सल्फर ऑक्साइड्स, क्लोराइड्स, अमोनिया के जल में घुलनशील आयन उत्पन्न होते है, साथ ही साथ विभिन्न धातु जैसे की मैग्नीशियम, क्रोमियम, कैल्शियम, बेरियम जो की कैंसर जैसे रोगों के कारण होते है ये भी हानिकारक मात्रा में बढ़ जाती है, जल में घुलनशील होने के कारण इनका दीर्घ काल तक प्रभाव बना रहता है। अतिरिक्त मात्रा में कार्बन ब्लैक के उत्सर्जन से अस्थमा जैसे रोग के कारक बनते है।
-- -- -- -- -- -- -- -- --
बचाव के लिए यह करें उपाय
- भीड़ वाली जगह पर जाने से बचें।
- अगर जाना जरूरी है तो शाम की बजाए दिन में जाएं।
- भीड़ वाली जगह पर जाने से पहले मास्क जरूर पहनें।
- अस्थमा, सीओपीडी जैसी बीमारी से पीड़ित हैं तो दवा का सेवन बंद न करें।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
दिसंबर भर एक्यूआई रहेगा खराब
- आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र बताते हैं कि वातावरण में नमी बढ़ गई है। जिससे दिसंबर भर हवा की गुणवत्ता खराब रहने की संभावना है। वातावरण में नमी कम होने के बाद ही एक्यूआई में सुधार होगा।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
विज्ञापन
सहालग के चलते सड़कों पर इन दिनों गाड़ियों का रेला लगा है। इससे धूल तो उड़ ही रही है, चौराहों पर जब एक साथ गाड़ियां रुक रहीं हैं तो धुएं से भी प्रदूषण बढ़ रहा है। शादियों में पटाखाें से भी जहरीला धुआं उठ रहा है। दूसरी ओर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित प्रमुख सड़कों पर गाड़ियों की आवाजही से धूल उड़ रही है।
विज्ञापन
राजमार्ग पर संसारीपुर, बिजरा, खैरीओझा, गड़हा गौतम फ्लाईओवर के पास मार्ग पर जमी धूल की मोटी परत हवा की गुणवत्ता खराब करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। डॉक्टरों की मानें तो खराब गुणवत्ता की हवा अस्थमा, हृदय और सांस के रोगियों के साथ बुजुर्ग के लिए खतरनाक है। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को सुबह नौ बजे एक्यूआई 162 और शाम को 115 दर्ज किया गया। मंगलवार को वातावरण में नमी 90 प्रतिशत नमी रही। नमी की वजह से गाड़ियों के धुएं से निकले हानिकारक गैस वायुमंडल में ऊपर नहीं जा पा रही है।
विज्ञापन
पानी में लंबे समय तक घुलनशील रहते हैं बारूद के कण
- शिवहर्ष किसान पीजी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिवेंद्र मोहन पांडेय ने बताया कि सहालग में आतिशबाजी का जबरदस्त प्रदर्शन होता है, जिसमें रोशनी एवं आवाज का अतिरेक पर्यावरण में परिवर्तन उत्पन्न करता है। प्राचीन काल में प्रभाव कम था, क्योंकि बारूद का उपयोग केवल युद्ध के समय होता था। बारूद के द्वारा पर्यावरण में सूक्ष्म कणों की मात्रा ज्यादा हो जाती है और हानिकारक प्रदूषक जैसे की नाइट्रेट्स, सल्फर ऑक्साइड्स, क्लोराइड्स, अमोनिया के जल में घुलनशील आयन उत्पन्न होते है, साथ ही साथ विभिन्न धातु जैसे की मैग्नीशियम, क्रोमियम, कैल्शियम, बेरियम जो की कैंसर जैसे रोगों के कारण होते है ये भी हानिकारक मात्रा में बढ़ जाती है, जल में घुलनशील होने के कारण इनका दीर्घ काल तक प्रभाव बना रहता है। अतिरिक्त मात्रा में कार्बन ब्लैक के उत्सर्जन से अस्थमा जैसे रोग के कारक बनते है।
बचाव के लिए यह करें उपाय
- भीड़ वाली जगह पर जाने से बचें।
- अगर जाना जरूरी है तो शाम की बजाए दिन में जाएं।
- भीड़ वाली जगह पर जाने से पहले मास्क जरूर पहनें।
- अस्थमा, सीओपीडी जैसी बीमारी से पीड़ित हैं तो दवा का सेवन बंद न करें।
दिसंबर भर एक्यूआई रहेगा खराब
- आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र बताते हैं कि वातावरण में नमी बढ़ गई है। जिससे दिसंबर भर हवा की गुणवत्ता खराब रहने की संभावना है। वातावरण में नमी कम होने के बाद ही एक्यूआई में सुधार होगा।