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किसानों की कुर्बानी के चलते वापस हुआ कृषि कानून

Fri, 19 Nov 2021 11:45 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 19 Nov 2021 11:45 PM IST
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'Agriculture law came back due to the sacrifice of farmers'
‘किसानों की कुर्बानी के चलते वापस हुआ कृषि कानून’
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किसान नेता बोले- 700 लोगों का बलिदान लेकर सरकार मानी
एमएसपी पर बनाया जाए कानून, तभी किसानों की सुरक्षा
बस्ती। केंद्र की मोदी सरकार ने गुरुनानक जयंती पर तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया। सरकार ने किसानों को समझा पाने में खुद को फेल बताया। कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद ‘अमर उजाला’ ने भाकियू के नेताओं से बातचीत की। किसान नेताओं ने कहा कि किसानों की कुर्बानी के चलते यह कानून वापस हुआ है। संगठन किसानों के हित को सर्वोपरि मानती है। सरकार मानी, मगर 700 किसानों को इसके लिए खुद का बलिदान देना पड़ा।
भाकियू के प्रदेश सचिव दीवान चंद्र पटेल ने कहा कि सरकार ने अपने हठ के चलते किसानों के शोषण वाले कृषि कानून को वापस लेने का निर्णय लेने में एक वर्ष लगा दिया। ऐसे में तमाम किसानों को आंदोलन में शहीद होना पड़ा। किसानों पर लाठियां चलीं। आखिरकार किसानों की जीत हुई और सरकार झुकी। संगठन के जिलाध्यक्ष जयराम चौधरी ने कहा कि किसानों के लिए यह खुशी का पल है, जब उसकी मांग को सरकार ने मान लिया। यदि कृषि कानून लागू हो जाता तो निश्चित तौर पर कृषि पर पूंजीपतियों का अधिकार होता और किसान बंधुआ मजदूर बनकर रह जाते। यदि सरकार किसानों का भला ही चाहती है तो उनके पक्ष में कोई ऐसा कानून बना दिया जाए, जिससे किसान अपने उपज की कीमत तय करने का अधिकार पा ले।
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मंडल महासचिव शोभाराम ठाकुर ने कहा कि किसान कानून के विरोध में 26 नवंबर 2020 को आंदोलन शुरू हुआ। करीब एक सप्ताह बाद आंदोलन की बरसी है। इससे पहले सरकार चेत गई। यदि किसान कानून वापस न होता तो आंदोलन और लंबा खिंच जाता।
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जिला महासचिव डॉ. आरपी चौधरी ने कहा कि सरकार का फैसला उचित है। यह निर्णय सरकार को पहले ही करना चाहिए था, मगर देर सही दुरुस्त निर्णय हुआ है। डॉ. चौधरी ने कहा कि किसानों के हित में जो फैसला लेना चाहिए वह सरकार नहीं ले रही है, बल्कि कृषि कानून लाकर सरकार किसानों को बंधुआ मजदूर बना देना चाहती थी। यह सरकार की नहीं, बल्कि किसानों के बलिदान का परिणाम है कि सरकार को किसानों की मांगों के सामने झुकना पड़ा।
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