{"_id":"649dd74a0fc15531880b88e4","slug":"after-15-years-the-hope-of-justice-basti-news-c-207-1-bst1001-597-2023-06-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: 15 साल बाद जगी न्याय की आस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: 15 साल बाद जगी न्याय की आस
Fri, 30 Jun 2023 12:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 30 Jun 2023 12:41 AM IST
विज्ञापन
15 साल बाद जगी न्याय की आस
बस्ती। मुंडेरवा थाने में फर्जी अभिलेखों के जरिये जमीन हथियाने के मामले में 15 साल बाद केस दर्ज हुआ है। धौरहरा गोचना गांव का है। वर्ष 2008 में चकबंदी के दौरान शातिर किस्म के लोगों ने चकबंदी विभाग के अधिकारियों से साठगांठ कर ली और एक ही कुनबे के दो निसंतान लोगों की जमीन फर्जी बयान के आधार पर एक ही थोक के मुखिया के नाम हस्तांतरित करा ली गई थी। परिवार के अन्य सदस्यों को न्याय पाने में लंबा वक्त लगा। अब जाकर विभाग और शातिरों की जुगलबंदी से की गई जालसाजी पकड़ में आई।
हुआ यूं कि धौरहरा गोचना के शिवबचन के पूर्वज कतारू के चार पुत्र गोपाल, जयपाल, शिवपाल और बृजपाल थे। इनमें जयपाल निसंतान थे। उनकी मृत्यु के बाद उनकी बेवा छोटका के नाम जमीन दर्ज हुई। बाद में उनकी भी मौत हो गई। जबकि शिवपाल की वंशावली उनके बाद दो पीढि़यों तक चली। उनके एक पुत्र भागवत और उनके एक पुत्र बेकारू हुए। बेकारू भी निसंतान थे। नियमानुसार, मृतका छोटका और बेकारू की जमीन कुनबे के शेष दो भाइयों गोपाल व बृजपाल के नाम हस्तांरित होनी थी।
वर्ष 2008 में चकबंदी के दौरान इसी कुनबे के एक परिवार ने दोनों मृतकों की जमीन हथियाने की साजिश रची। चकबंदी विभाग की मिलीभगत से कुनबे के दो हिस्से की 16 बीघा जमीन को अपने हक में करने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार किया। मृतक बेकारू और छोटका के फर्जी बयान पत्र के आधार पर तत्कालीन चकबंदी अधिकारी मुंडेरवा ने दोनों के हिस्से की जमीन गोपाल के दो बेटों चौथी और अशर्फी में से एक संतान चौथी के नाम हस्तांतरित कर दी। इसकी जानकारी होने पर गोपाल के अन्य वंशज में शामिल शिवबचन आदि ने आपत्ति दाखिल की। चकबंदी विभाग की न्यायिक प्रक्रिया में मामला उलझता गया।
विज्ञापन
एसओसी स्तर से कराई गई जांच पड़ताल के बाद वर्ष 2015 में मृतकों की जमीन फर्जी दस्तावेज के आधार पर हस्तांतरित किए जाने की पुष्टि हुई। तत्कालीन एसओसी ने जालसाजी में संलिप्त लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश भी दिया, लेकिन केस दर्ज नहीं हाे सका। वादी पक्ष शिवबचन आदि दौड़-भाग करते रहे। इधर, 27 मई को शिवबचन आदि ने एसपी से मुलाकात कर एसओसी के आदेश के अनुसार, जमीन पर कब्जा दिलाने और विपक्षियों पर केस दर्ज कराने की गुहार लगाई। एसपी के निर्देश पर स्थानीय पुलिस पांच जून को मामले की जांच करने पहुंची। पुलिस के लौटने के बाद दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। शिवबचन का पक्ष एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी से मिला। तत्कालीन एसओसी चकबंदी के आदेश के अनुसार, एसपी के निर्देश पर मुंडेरवा पुलिस ने तत्कालीन सीओ चकबंदी विनोद सिंह सहित 21 लोगों पर धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।
-- --
यह है कुनबे का सेजरा
कतारू की चार संतानें
पहले भाई गोपाल- दो संतान- चौथी और अशर्फी
चौथी- चार संतानें (राम आसरे, सितई, रामशब्द, छोटेलाल)
अशर्फी- एक संतान- बच्चूलाल
बच्चूलाल की चार संतानें- (रामलखन, शिवबचन, शिवलखन, शिवचरन)
दूसरे भाई- जयपाल- निसंतान, पत्नी छोटका
तीसरे भाई- शिवपाल- एक संतान- भागवत
भागवत से एक संतान बेकारू (निसंतान)
चौथे भाई- बृजलाल
बृजलाल की एक संतान झकड़ी
झकड़ी की एक संतान रामचंदर
रामचंदर की दो संतानें जयराम और बीपत
विज्ञापन
बस्ती। मुंडेरवा थाने में फर्जी अभिलेखों के जरिये जमीन हथियाने के मामले में 15 साल बाद केस दर्ज हुआ है। धौरहरा गोचना गांव का है। वर्ष 2008 में चकबंदी के दौरान शातिर किस्म के लोगों ने चकबंदी विभाग के अधिकारियों से साठगांठ कर ली और एक ही कुनबे के दो निसंतान लोगों की जमीन फर्जी बयान के आधार पर एक ही थोक के मुखिया के नाम हस्तांतरित करा ली गई थी। परिवार के अन्य सदस्यों को न्याय पाने में लंबा वक्त लगा। अब जाकर विभाग और शातिरों की जुगलबंदी से की गई जालसाजी पकड़ में आई।
हुआ यूं कि धौरहरा गोचना के शिवबचन के पूर्वज कतारू के चार पुत्र गोपाल, जयपाल, शिवपाल और बृजपाल थे। इनमें जयपाल निसंतान थे। उनकी मृत्यु के बाद उनकी बेवा छोटका के नाम जमीन दर्ज हुई। बाद में उनकी भी मौत हो गई। जबकि शिवपाल की वंशावली उनके बाद दो पीढि़यों तक चली। उनके एक पुत्र भागवत और उनके एक पुत्र बेकारू हुए। बेकारू भी निसंतान थे। नियमानुसार, मृतका छोटका और बेकारू की जमीन कुनबे के शेष दो भाइयों गोपाल व बृजपाल के नाम हस्तांरित होनी थी।
विज्ञापन
वर्ष 2008 में चकबंदी के दौरान इसी कुनबे के एक परिवार ने दोनों मृतकों की जमीन हथियाने की साजिश रची। चकबंदी विभाग की मिलीभगत से कुनबे के दो हिस्से की 16 बीघा जमीन को अपने हक में करने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार किया। मृतक बेकारू और छोटका के फर्जी बयान पत्र के आधार पर तत्कालीन चकबंदी अधिकारी मुंडेरवा ने दोनों के हिस्से की जमीन गोपाल के दो बेटों चौथी और अशर्फी में से एक संतान चौथी के नाम हस्तांतरित कर दी। इसकी जानकारी होने पर गोपाल के अन्य वंशज में शामिल शिवबचन आदि ने आपत्ति दाखिल की। चकबंदी विभाग की न्यायिक प्रक्रिया में मामला उलझता गया।
विज्ञापन
एसओसी स्तर से कराई गई जांच पड़ताल के बाद वर्ष 2015 में मृतकों की जमीन फर्जी दस्तावेज के आधार पर हस्तांतरित किए जाने की पुष्टि हुई। तत्कालीन एसओसी ने जालसाजी में संलिप्त लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश भी दिया, लेकिन केस दर्ज नहीं हाे सका। वादी पक्ष शिवबचन आदि दौड़-भाग करते रहे। इधर, 27 मई को शिवबचन आदि ने एसपी से मुलाकात कर एसओसी के आदेश के अनुसार, जमीन पर कब्जा दिलाने और विपक्षियों पर केस दर्ज कराने की गुहार लगाई। एसपी के निर्देश पर स्थानीय पुलिस पांच जून को मामले की जांच करने पहुंची। पुलिस के लौटने के बाद दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। शिवबचन का पक्ष एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी से मिला। तत्कालीन एसओसी चकबंदी के आदेश के अनुसार, एसपी के निर्देश पर मुंडेरवा पुलिस ने तत्कालीन सीओ चकबंदी विनोद सिंह सहित 21 लोगों पर धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।
यह है कुनबे का सेजरा
कतारू की चार संतानें
पहले भाई गोपाल- दो संतान- चौथी और अशर्फी
चौथी- चार संतानें (राम आसरे, सितई, रामशब्द, छोटेलाल)
अशर्फी- एक संतान- बच्चूलाल
बच्चूलाल की चार संतानें- (रामलखन, शिवबचन, शिवलखन, शिवचरन)
दूसरे भाई- जयपाल- निसंतान, पत्नी छोटका
तीसरे भाई- शिवपाल- एक संतान- भागवत
भागवत से एक संतान बेकारू (निसंतान)
चौथे भाई- बृजलाल
बृजलाल की एक संतान झकड़ी
झकड़ी की एक संतान रामचंदर
रामचंदर की दो संतानें जयराम और बीपत