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Basti News: प्रचार एजेंसियां कर रही होर्डिंग से अकूत कमाई...नगर पालिका को आधी भी नहीं
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बस्ती। प्रचार एजेंसियां होर्डिंग से अकूत कमाई कर रही हैं और नगर पालिका को जगह का अकाल है। शहर में जितने होर्डिंग लगे हैं, उसके हिसाब से नगर पालिका को आधी आय भी नहीं हो रही है। नगर पालिका के पास गिनती के 175 प्रचार स्थल है। इनमें 40 यूनिपोल और 135 लोहे के फ्रेम शामिल हैं। मगर होर्डिंग एक हजार से अधिक लग रहे हैं। प्रमुख चौराहों पर फुटपाथ और नालों के किनारे बांस अथवा लोहे के एंगल का स्टैंड बना दिया गया है। इस पर बड़े प्रतिष्ठान, स्कूल, कॉलेज और राजनीतिक दलों के होर्डिंग लगा दिए गए हैं। इसका पूरा किराया प्रचार एजेंसियों के पास जा रहा है।
जानकार बताते हैं कि होर्डिंग कारोबार में बहुत झोल है। शहर में केवल आठ प्रचार एजेंसियां पंजीकृत हैं। जबकि गैर पंजीकृत एजेंसियों की संख्या 15 से 20 है। सभी एजेंसियों में अनधिकृत रूप से होर्डिंग टांगने की होड़ रहती है। नगर क्षेत्र में जिला अस्पताल के गेट संख्या तीन से लेकर मुख्य चौराहे तक दो सौ मीटर की दूरी में पांच सौ से अधिक होर्डिंग लगाई गई है। जिला अस्पताल की बाहरी चहारदीवारी से सटे नाले के पास बांस अथवा लोहे के फ्रेम लाइन से लगा दिए गए हैं।
दूसरी तरफ दुकानों के सामने स्थायी रूप से लोहे के एंगल स्थापित किए गए हैं। सड़क के दोनों तरफ प्रतिष्ठित कंपनियों के बड़े-बड़े फ्लैक्स और होर्डिंग लगाए गए हैं। मुख्य चौराहे पर तो बिजली के लोहे के खंभों के सहारे होर्डिंग लगाकर इस स्थल की खूबसूरती छीन ली गई है। इसी तरह अस्पताल चौराहे से लेकर दक्षिण दरवाजे तक सड़क के दोनों तरफ पटरी की खाली जगह पर होर्डिंग की भरमार है।
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इससे प्रचार एजेंसियों की मोटी कमाई हो रही है। कारण कि नगर पालिका के दस्तावेज में इन होर्डिंग की गिनती नहीं है। नगर पालिका की तरफ से शहर के प्रमुख चौराहे पर होर्डिंग के लिए एक से दो स्थल ही चिह्नित है। जबकि डिवाइडर के बीचोंबीच कुछ जगहों पर यूनिपोल लगाए गए हैं। इन्हीं के जरिये नगर पालिका साल भर में तीस लाख राजस्व के लिए जोर-आजमाइश करती है।
प्रचार एजेंसियां 20 गुणे दस फीट माप के एक होर्डिंग से 1500 से दो हजार रुपये वसूल रही हैं। 12 गुणे 10 फीट साइज के होर्डिंग से 1200 रुपये वसूले जा रहे हैं। इसकी अवधि भी तय नहीं रहती है। त्योहारी सीजन में तो एक होर्डिंग को सप्ताह भर से अधिक नहीं रहने दिया जाता है। उसी जगह पर दूसरे कंपनी या राजनीतिक दल का होर्डिंग टांग दिया जाता है। दशहरा, दिवाली जैसे त्योहारों में प्रचार एजेंसियों की बहार है।
राजनीतिक दलों के बधाई संदेश से लेकर विभिन्न उत्पाद कंपनियों के बंपर ऑफर वाले लुभावने डिजाइन के फ्लैक्स लगाने के खूब ऑर्डर मिल रहे हैं। अधिक कमाई की होड़ में प्रचार एजेंसियां जहां जी कर रहा है, वहीं होर्डिंग लगा दे रही हैं। रोडवेज, कंपनीबाग, फव्वारा तिराहा, रेलवे स्टेशन गेट के आसपास महापुरुषों की मूर्ति के अगल-बगल और ऊपर होर्डिंग लगा दिए गए हैं। यहां तक कि शहर के कुछ स्थानों पर लगे संकेतक बोर्ड भी नहीं बख्शे गए हैं। बड़ेवन के पास संकेतक बोर्ड को भी होर्डिंग से ढक दिया गया है। बिजली के खंभे भी ढाई गुणे चार फीट की साइज वाले होर्डिंग से पाट दिए गए हैं। जानकार बताते हैं कि एक अनुमान के मुताबिक, सभी प्रचार एजेंसियां मिलकर होर्डिंग से साल भर में 10 से 15 करोड़ रुपये की कमाई कर रही हैं। वहीं नगर पालिका को इसकी आधी आय भी नहीं हो पा रही है।
रैली और त्योहार में होती है अच्छी कमाई
प्रचार एजेंसी के कर्मचारी रामू बताते हैं कि होर्डिंग लगाने की कोई निर्धारित अवधि या रकम नहीं होती है। केवल नगर पालिका के स्थायी स्टैंड या यूनिपोल पर ही अवधि तय होती है। यदि राजनीतिक दलों की रैली या त्योहारी सीजन हैं तो ऑर्डर बहुत मिलते हैं। प्रचार एजेंसियों ने शहरी इलाकों में अपना-अपना क्षेत्र चिह्नित कर लिया है। ऑर्डर बढ़ने पर आपसी समन्वय बनाकर सड़क के डिवाइडर, बिजली के खंभों, पटरी पर अस्थायी स्टैंड लगाकर होर्डिंग लगाया जाता है। रैली या त्योहार खत्म होने के बाद उन स्थलों पर दूसरे का होर्डिंग लगा दिया जाता है। इससे कम समय में अच्छी कमाई होती है।
होर्डिंग लगाने को लेकर कई बार हो चुकी है मारपीट
शहर के कुछ प्रमुख स्थलों पर होर्डिंग लगाने को लेकर कई बार प्रचार एजेंसियों के कर्मचारियों में मारपीट भी हो चुकी है। जानकारों का कहना है कि जिस प्रचार एजेंसी की तरफ से अवैध रूप से कहीं बांस या लोहे के एंगल का स्टैंड तैयार किया गया है, वह जगह उनकी हो जाती है। यदि इस पर दूसरी एजेंसी की ओर से होर्डिंग लगवाया जाता है तो तकरार बढ़ जाती है। शहर के तुरकहिया मोड़, रंजीत चौराहा, भगत सिंह तिराहे पर पिछले दिनों होर्डिंग लगाने को लेकर कर्मचारियों में मारपीट का मामला सामने आ चुका है।
यह हैं नगर पालिका की कमाई
एक यूनिपोल से नगर पालिका को 50 से 60 हजार रुपये तक किराया प्राप्त हो रहा है। शहर में 40 यूनिपोल स्थापित हैं। इससे 20 से 25 लाख रुपये की आमदनी हो पा रही है। वहीं चौराहों पर स्थापित प्रत्येक स्टैंड से 12960 रुपये सालाना मिलना चाहिए। लेकिन छिटपुट जगहों से यह रकम मिल पा रही है। शेष जगहों पर अवैध रूप से ही होर्डिंग लगाए जा रहे हैं।
ये हैं नियम
शहर में मुख्य सड़कों के किनारे या डिवाइडर पर होर्डिंग लगाने की अनुमति नहीं है। किसी भी चौराहे के 100 मीटर की परिधि में भी होर्डिंग नहीं लग सकती है। होर्डिंग लगाने से पहले संबंधित एजेंसी को यातायात पुलिस से एनओसी लेने की जरूरत होती है। नगर पालिका सीमा क्षेत्र में चिह्नित स्थल पर ही होर्डिंग लगाया जा सकता है।
कोट ::: अवैध होर्डिंग-बैनर के खिलाफ अभियान चलाने की योजना तैयार की जा रही है। कुछ अनधिकृत एजेंसियां भी चिह्नित की गई हैं। उन्हें नोटिस जारी किया जा रहा है। शहर में किसी भी स्थान पर अवैध होर्डिंग नहीं लगाने दिया जाएगा। नगर पालिका बहुत जल्द कार्रवाई शुरू करेगी। -अंगद गुप्ता, ईओ, नगर पालिका परिषद।
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जानकार बताते हैं कि होर्डिंग कारोबार में बहुत झोल है। शहर में केवल आठ प्रचार एजेंसियां पंजीकृत हैं। जबकि गैर पंजीकृत एजेंसियों की संख्या 15 से 20 है। सभी एजेंसियों में अनधिकृत रूप से होर्डिंग टांगने की होड़ रहती है। नगर क्षेत्र में जिला अस्पताल के गेट संख्या तीन से लेकर मुख्य चौराहे तक दो सौ मीटर की दूरी में पांच सौ से अधिक होर्डिंग लगाई गई है। जिला अस्पताल की बाहरी चहारदीवारी से सटे नाले के पास बांस अथवा लोहे के फ्रेम लाइन से लगा दिए गए हैं।
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दूसरी तरफ दुकानों के सामने स्थायी रूप से लोहे के एंगल स्थापित किए गए हैं। सड़क के दोनों तरफ प्रतिष्ठित कंपनियों के बड़े-बड़े फ्लैक्स और होर्डिंग लगाए गए हैं। मुख्य चौराहे पर तो बिजली के लोहे के खंभों के सहारे होर्डिंग लगाकर इस स्थल की खूबसूरती छीन ली गई है। इसी तरह अस्पताल चौराहे से लेकर दक्षिण दरवाजे तक सड़क के दोनों तरफ पटरी की खाली जगह पर होर्डिंग की भरमार है।
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इससे प्रचार एजेंसियों की मोटी कमाई हो रही है। कारण कि नगर पालिका के दस्तावेज में इन होर्डिंग की गिनती नहीं है। नगर पालिका की तरफ से शहर के प्रमुख चौराहे पर होर्डिंग के लिए एक से दो स्थल ही चिह्नित है। जबकि डिवाइडर के बीचोंबीच कुछ जगहों पर यूनिपोल लगाए गए हैं। इन्हीं के जरिये नगर पालिका साल भर में तीस लाख राजस्व के लिए जोर-आजमाइश करती है।
प्रचार एजेंसियां 20 गुणे दस फीट माप के एक होर्डिंग से 1500 से दो हजार रुपये वसूल रही हैं। 12 गुणे 10 फीट साइज के होर्डिंग से 1200 रुपये वसूले जा रहे हैं। इसकी अवधि भी तय नहीं रहती है। त्योहारी सीजन में तो एक होर्डिंग को सप्ताह भर से अधिक नहीं रहने दिया जाता है। उसी जगह पर दूसरे कंपनी या राजनीतिक दल का होर्डिंग टांग दिया जाता है। दशहरा, दिवाली जैसे त्योहारों में प्रचार एजेंसियों की बहार है।
राजनीतिक दलों के बधाई संदेश से लेकर विभिन्न उत्पाद कंपनियों के बंपर ऑफर वाले लुभावने डिजाइन के फ्लैक्स लगाने के खूब ऑर्डर मिल रहे हैं। अधिक कमाई की होड़ में प्रचार एजेंसियां जहां जी कर रहा है, वहीं होर्डिंग लगा दे रही हैं। रोडवेज, कंपनीबाग, फव्वारा तिराहा, रेलवे स्टेशन गेट के आसपास महापुरुषों की मूर्ति के अगल-बगल और ऊपर होर्डिंग लगा दिए गए हैं। यहां तक कि शहर के कुछ स्थानों पर लगे संकेतक बोर्ड भी नहीं बख्शे गए हैं। बड़ेवन के पास संकेतक बोर्ड को भी होर्डिंग से ढक दिया गया है। बिजली के खंभे भी ढाई गुणे चार फीट की साइज वाले होर्डिंग से पाट दिए गए हैं। जानकार बताते हैं कि एक अनुमान के मुताबिक, सभी प्रचार एजेंसियां मिलकर होर्डिंग से साल भर में 10 से 15 करोड़ रुपये की कमाई कर रही हैं। वहीं नगर पालिका को इसकी आधी आय भी नहीं हो पा रही है।
रैली और त्योहार में होती है अच्छी कमाई
प्रचार एजेंसी के कर्मचारी रामू बताते हैं कि होर्डिंग लगाने की कोई निर्धारित अवधि या रकम नहीं होती है। केवल नगर पालिका के स्थायी स्टैंड या यूनिपोल पर ही अवधि तय होती है। यदि राजनीतिक दलों की रैली या त्योहारी सीजन हैं तो ऑर्डर बहुत मिलते हैं। प्रचार एजेंसियों ने शहरी इलाकों में अपना-अपना क्षेत्र चिह्नित कर लिया है। ऑर्डर बढ़ने पर आपसी समन्वय बनाकर सड़क के डिवाइडर, बिजली के खंभों, पटरी पर अस्थायी स्टैंड लगाकर होर्डिंग लगाया जाता है। रैली या त्योहार खत्म होने के बाद उन स्थलों पर दूसरे का होर्डिंग लगा दिया जाता है। इससे कम समय में अच्छी कमाई होती है।
होर्डिंग लगाने को लेकर कई बार हो चुकी है मारपीट
शहर के कुछ प्रमुख स्थलों पर होर्डिंग लगाने को लेकर कई बार प्रचार एजेंसियों के कर्मचारियों में मारपीट भी हो चुकी है। जानकारों का कहना है कि जिस प्रचार एजेंसी की तरफ से अवैध रूप से कहीं बांस या लोहे के एंगल का स्टैंड तैयार किया गया है, वह जगह उनकी हो जाती है। यदि इस पर दूसरी एजेंसी की ओर से होर्डिंग लगवाया जाता है तो तकरार बढ़ जाती है। शहर के तुरकहिया मोड़, रंजीत चौराहा, भगत सिंह तिराहे पर पिछले दिनों होर्डिंग लगाने को लेकर कर्मचारियों में मारपीट का मामला सामने आ चुका है।
यह हैं नगर पालिका की कमाई
एक यूनिपोल से नगर पालिका को 50 से 60 हजार रुपये तक किराया प्राप्त हो रहा है। शहर में 40 यूनिपोल स्थापित हैं। इससे 20 से 25 लाख रुपये की आमदनी हो पा रही है। वहीं चौराहों पर स्थापित प्रत्येक स्टैंड से 12960 रुपये सालाना मिलना चाहिए। लेकिन छिटपुट जगहों से यह रकम मिल पा रही है। शेष जगहों पर अवैध रूप से ही होर्डिंग लगाए जा रहे हैं।
ये हैं नियम
शहर में मुख्य सड़कों के किनारे या डिवाइडर पर होर्डिंग लगाने की अनुमति नहीं है। किसी भी चौराहे के 100 मीटर की परिधि में भी होर्डिंग नहीं लग सकती है। होर्डिंग लगाने से पहले संबंधित एजेंसी को यातायात पुलिस से एनओसी लेने की जरूरत होती है। नगर पालिका सीमा क्षेत्र में चिह्नित स्थल पर ही होर्डिंग लगाया जा सकता है।
कोट ::: अवैध होर्डिंग-बैनर के खिलाफ अभियान चलाने की योजना तैयार की जा रही है। कुछ अनधिकृत एजेंसियां भी चिह्नित की गई हैं। उन्हें नोटिस जारी किया जा रहा है। शहर में किसी भी स्थान पर अवैध होर्डिंग नहीं लगाने दिया जाएगा। नगर पालिका बहुत जल्द कार्रवाई शुरू करेगी। -अंगद गुप्ता, ईओ, नगर पालिका परिषद।