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Basti News: खानपान से अबीर-गुलाल तक मिलावट का रंग
Mon, 03 Mar 2025 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 03 Mar 2025 12:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। त्योहार और सहालग के बीच मिलावटखोर खाने-पीने के सामान से लेकर रंगों तक में मिलावट का जहर बोने में जुटे हैं। पिछले तीन वर्षों में खोवा, पनीर, मसाले यहां तक रंग के नमूनों तक की जांच में मिलावट की पुष्टि हो चुकी है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी इतनी असरदार इसलिए नहीं है कि उनके पास ऐसी टीम और संसाधन नहीं हैं, जिनसे वे मिलावटखोरों पर लगाम लगा सके। बाजार की नब्ज परखने वालों की राय में यही वह मौका है जब मिलावट खोर बड़े ही सलीके से मिलावटी माल खपाने में कामयाब होते हैं।
लोग त्योहार के उत्साह अच्छे-बुरे की पहचान करना भूल जाते हैं, तभी इन्हें अपनी तिजोरी भरने का मौका मिल जाता है। बाजार में इन दिनों गहमागहमी बढ़ चुकी है। रसोई के जरूरी सामान ही नहीं, बल्कि सहालग और त्योहारों से संबंधित खरीद के लिए लोग दुकान पर पहुंचने लगे हैं।
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बाजार में अच्छी साख वाले व्यापारियों का कहना है कि पिछले सालों की तरह इस बार भी होली पर उपभोक्ता वस्तुओं की भारी मांग को देखते हुए बाजार में मिलावटी सामानों की खेप आ चुकी है। गुणवत्ता विहीन खाद्य पदार्थों से गोदाम भर चुके हैं।
कई दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में करोड़ों का वारा-न्यारा करने की पूरी तैयारी हो चुकी है। पिछले सालों में खाद्य पदार्थ के तमाम नमूनों की जांच में पाया गया है कि सेहत के दुश्मन कुछ भी मिला देने में संकोच नहीं करते। काली मिर्च में पपीते का बीज, पिसी हल्दी में ईट का चूरा और धनिया में लकड़ी का बुरादा पाया जा चुका है।
यही नहीं, खाने वाले सभी तेल, दाल, मैदा, घी जैसे सबसे जरूरी सामान में सबसे अधिक मिलावट पाई जा चुकी है। होली के इस त्योहार में इस्तेमाल होने वाले रंग, अबीर-गुलाल में भी अंधाधुंध मिलावट होती है।
पिछले तीन साल के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जिन नमूनों की जांच कराई गई, उनमें 60 फीसदी से अधिक में मिलावट पाई जा चुकी है। पनीर के 20 नमूनों में 12 में बटर आयल, आरारोट का आटा, सोयाबीन का आटा, यूरिया की मिलावट पाई गई। मिल्क केक के आठ नमूनों में फिटकिरी, सूखा दूध, डालडा की मिलावट पाई गई है।
काजू की बर्फी में मूंगफली, सूखा दूध व डालडा की मिलावट पाई गई है। सरसों के तेल में मैटलिक लीपा, अरंडी का तेल, मोबिल आयल जैसे पेट और त्वचा को हानि पहुंचाने वाले तत्व भरे पडे़ हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ. रामजी सोनी ने बताया कि मिलावटी पदार्थों के सेवन से किडनी, लिवर, नसों से संबंधित बीमारियां हो जाती हैं। शुगर, ब्लड प्रेशर के मरीजों को कभी-कभी मुश्किल पड़ जाती है। पेट खराब, फूड प्वाइजनिंग, उल्टी जैसी बीमारियां हो जाती हैं। इससे बचाव करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है।
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बस्ती। त्योहार और सहालग के बीच मिलावटखोर खाने-पीने के सामान से लेकर रंगों तक में मिलावट का जहर बोने में जुटे हैं। पिछले तीन वर्षों में खोवा, पनीर, मसाले यहां तक रंग के नमूनों तक की जांच में मिलावट की पुष्टि हो चुकी है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी इतनी असरदार इसलिए नहीं है कि उनके पास ऐसी टीम और संसाधन नहीं हैं, जिनसे वे मिलावटखोरों पर लगाम लगा सके। बाजार की नब्ज परखने वालों की राय में यही वह मौका है जब मिलावट खोर बड़े ही सलीके से मिलावटी माल खपाने में कामयाब होते हैं।
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लोग त्योहार के उत्साह अच्छे-बुरे की पहचान करना भूल जाते हैं, तभी इन्हें अपनी तिजोरी भरने का मौका मिल जाता है। बाजार में इन दिनों गहमागहमी बढ़ चुकी है। रसोई के जरूरी सामान ही नहीं, बल्कि सहालग और त्योहारों से संबंधित खरीद के लिए लोग दुकान पर पहुंचने लगे हैं।
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बाजार में अच्छी साख वाले व्यापारियों का कहना है कि पिछले सालों की तरह इस बार भी होली पर उपभोक्ता वस्तुओं की भारी मांग को देखते हुए बाजार में मिलावटी सामानों की खेप आ चुकी है। गुणवत्ता विहीन खाद्य पदार्थों से गोदाम भर चुके हैं।
कई दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में करोड़ों का वारा-न्यारा करने की पूरी तैयारी हो चुकी है। पिछले सालों में खाद्य पदार्थ के तमाम नमूनों की जांच में पाया गया है कि सेहत के दुश्मन कुछ भी मिला देने में संकोच नहीं करते। काली मिर्च में पपीते का बीज, पिसी हल्दी में ईट का चूरा और धनिया में लकड़ी का बुरादा पाया जा चुका है।
यही नहीं, खाने वाले सभी तेल, दाल, मैदा, घी जैसे सबसे जरूरी सामान में सबसे अधिक मिलावट पाई जा चुकी है। होली के इस त्योहार में इस्तेमाल होने वाले रंग, अबीर-गुलाल में भी अंधाधुंध मिलावट होती है।
पिछले तीन साल के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जिन नमूनों की जांच कराई गई, उनमें 60 फीसदी से अधिक में मिलावट पाई जा चुकी है। पनीर के 20 नमूनों में 12 में बटर आयल, आरारोट का आटा, सोयाबीन का आटा, यूरिया की मिलावट पाई गई। मिल्क केक के आठ नमूनों में फिटकिरी, सूखा दूध, डालडा की मिलावट पाई गई है।
काजू की बर्फी में मूंगफली, सूखा दूध व डालडा की मिलावट पाई गई है। सरसों के तेल में मैटलिक लीपा, अरंडी का तेल, मोबिल आयल जैसे पेट और त्वचा को हानि पहुंचाने वाले तत्व भरे पडे़ हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ. रामजी सोनी ने बताया कि मिलावटी पदार्थों के सेवन से किडनी, लिवर, नसों से संबंधित बीमारियां हो जाती हैं। शुगर, ब्लड प्रेशर के मरीजों को कभी-कभी मुश्किल पड़ जाती है। पेट खराब, फूड प्वाइजनिंग, उल्टी जैसी बीमारियां हो जाती हैं। इससे बचाव करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है।