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नियम ताक पर रखकर एक ही व्यक्ति को काम देने का आरोप
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नियम ताक पर रखकर एक ही व्यक्ति को काम देने का आरोप
- एक ही व्यक्ति के कई फर्मों को दिया गया प्रिंटिंग का काम
- नियमानुसार फाइल को प्रस्तुत करने का तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी ने दिया था निर्देश
बस्ती। स्वास्थ्य विभाग में बाबूओं व अधिकारियों की मिली भगत से बिना जेम बिड/ बेंच विड (जेम पोर्टल पर बगैर सामानों की खरीद-फरोख्त) कराए प्रिंटिंग का काम एक ही व्यक्ति के अलग-अलग नामों के फर्म को रेवड़ी की तरह बांटने का आरोप लगा है। इस मामले में मिश्रौलिया निवासी राजेश मिश्र ने डीएम व शासन को पत्र लिखकर जांच की मांग उठाई। तत्कालीन लेखाधिकारी बैजनाथ से भी फाइल पर हस्ताक्षर करने को कहा गया था, मगर उन्होंने नियमानुसार फाइलों पर ही हस्ताक्षर करने की बात कह दी थी, जिस पर भुगतान की फाइल ही प्रस्तुत नहीं की गई और भुगतान लंबित हो गया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में वर्ष 2021 में करोड़ों रुपये के प्रिटिंग की कवायद शुरू हुई। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने इस मामले में अपने चहेते कई फर्म जिसका प्रोपराइटर एक ही व्यक्ति था उसे दे दिया। इस काम को पे-पोर्टल पर कोटेशन के आधार पर दिया गया, जबकि नियमानुसार इसको जेम पोर्टल पर टेंडर निकालकर करना था, मगर नियम को ताक पर रखकर संबंधित लिपिक व कुछेक अधिकारियों ने इसे पांच-पांच लाख रुपये के भीतर का काम दिखाकर संबंधित फर्मों को आवंटित कर दिया। इस कार्य में कुछ धन का भुगतान भी हो गया, मगर कार्य के पे पोर्टल पर ई-टेंडर न होने के कारण तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी ने हस्ताक्षर से मना कर दिया था। इसके बाद इसे एनआरएचएम के लंबित भुगतान में डाल कर जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है।
इसे लेकर मिश्रौलिया निवासी राजेश ने आवाज उठाई है। उन्होंने डीएम व शासन को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि करोड़ों के प्रिंटिंग कार्य को गलत ढंग से एक ही व्यक्ति को दिया गया और सरकारी धन के बंदरबांट कर ली गई है। आरोप लगाया है कि जब पचास हजार रुपये से अधिक के सामानों की आपूर्ति होती है तो ई-बिलिंग होनी चाहिए, मगर इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है। राजेश ने डीएम से मांग रखी है कि इस पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, जिससे सरकारी धन को बचाया जा सके। राजेश ने कहा है कि उनके परिवार के लोग स्वास्थ्य विभाग में ठेका का कार्य करते हैं। इस काम को लेने गए तो उन्हें पता चला कि इसे बिना जेम पोर्टल पर डाले ही किसी को आवंटित कर दिया गया है।
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बोले-सीएमओ
सीएमओ डॉ. आरपी मिश्र ने कहा कि किसी भी मामले में शिकायत की जा सकती है। प्रिटिंग प्रकरण में शिकायत संज्ञान में आ गई है। इस मामले की जांच करा ली जाएगी। यदि शिकायत सही पाई गई तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सभी अभिलेख देखे जाएंगे।
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क्या है जेम/बेंच बिड
जेम पोर्टल सामानों के खरीद फरोख्त का बाजार है। सरकारी विभाग में पांच लाख या उससे ऊपर जो भी खरीद होता है उसे जेम पोर्टल पर आर्डर दिए जाते हैं। जबकि इसी में कई सामान खरीदन को बेंच बिड कहते हैं।
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बोले-तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी
तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी बैजनाथ ने कहा कि प्रिटिंग के भुगतान की फाइल के लिए कहा गया था, मगर जब मैंने इसे नियमानुसार होने पर ही प्रस्तुत करने को कहा तो उसे प्रस्तुत ही नहीं किया गया।
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- एक ही व्यक्ति के कई फर्मों को दिया गया प्रिंटिंग का काम
- नियमानुसार फाइल को प्रस्तुत करने का तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी ने दिया था निर्देश
बस्ती। स्वास्थ्य विभाग में बाबूओं व अधिकारियों की मिली भगत से बिना जेम बिड/ बेंच विड (जेम पोर्टल पर बगैर सामानों की खरीद-फरोख्त) कराए प्रिंटिंग का काम एक ही व्यक्ति के अलग-अलग नामों के फर्म को रेवड़ी की तरह बांटने का आरोप लगा है। इस मामले में मिश्रौलिया निवासी राजेश मिश्र ने डीएम व शासन को पत्र लिखकर जांच की मांग उठाई। तत्कालीन लेखाधिकारी बैजनाथ से भी फाइल पर हस्ताक्षर करने को कहा गया था, मगर उन्होंने नियमानुसार फाइलों पर ही हस्ताक्षर करने की बात कह दी थी, जिस पर भुगतान की फाइल ही प्रस्तुत नहीं की गई और भुगतान लंबित हो गया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में वर्ष 2021 में करोड़ों रुपये के प्रिटिंग की कवायद शुरू हुई। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने इस मामले में अपने चहेते कई फर्म जिसका प्रोपराइटर एक ही व्यक्ति था उसे दे दिया। इस काम को पे-पोर्टल पर कोटेशन के आधार पर दिया गया, जबकि नियमानुसार इसको जेम पोर्टल पर टेंडर निकालकर करना था, मगर नियम को ताक पर रखकर संबंधित लिपिक व कुछेक अधिकारियों ने इसे पांच-पांच लाख रुपये के भीतर का काम दिखाकर संबंधित फर्मों को आवंटित कर दिया। इस कार्य में कुछ धन का भुगतान भी हो गया, मगर कार्य के पे पोर्टल पर ई-टेंडर न होने के कारण तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी ने हस्ताक्षर से मना कर दिया था। इसके बाद इसे एनआरएचएम के लंबित भुगतान में डाल कर जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है।
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इसे लेकर मिश्रौलिया निवासी राजेश ने आवाज उठाई है। उन्होंने डीएम व शासन को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि करोड़ों के प्रिंटिंग कार्य को गलत ढंग से एक ही व्यक्ति को दिया गया और सरकारी धन के बंदरबांट कर ली गई है। आरोप लगाया है कि जब पचास हजार रुपये से अधिक के सामानों की आपूर्ति होती है तो ई-बिलिंग होनी चाहिए, मगर इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है। राजेश ने डीएम से मांग रखी है कि इस पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, जिससे सरकारी धन को बचाया जा सके। राजेश ने कहा है कि उनके परिवार के लोग स्वास्थ्य विभाग में ठेका का कार्य करते हैं। इस काम को लेने गए तो उन्हें पता चला कि इसे बिना जेम पोर्टल पर डाले ही किसी को आवंटित कर दिया गया है।
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बोले-सीएमओ
सीएमओ डॉ. आरपी मिश्र ने कहा कि किसी भी मामले में शिकायत की जा सकती है। प्रिटिंग प्रकरण में शिकायत संज्ञान में आ गई है। इस मामले की जांच करा ली जाएगी। यदि शिकायत सही पाई गई तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सभी अभिलेख देखे जाएंगे।
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क्या है जेम/बेंच बिड
जेम पोर्टल सामानों के खरीद फरोख्त का बाजार है। सरकारी विभाग में पांच लाख या उससे ऊपर जो भी खरीद होता है उसे जेम पोर्टल पर आर्डर दिए जाते हैं। जबकि इसी में कई सामान खरीदन को बेंच बिड कहते हैं।
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बोले-तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी
तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी बैजनाथ ने कहा कि प्रिटिंग के भुगतान की फाइल के लिए कहा गया था, मगर जब मैंने इसे नियमानुसार होने पर ही प्रस्तुत करने को कहा तो उसे प्रस्तुत ही नहीं किया गया।