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समूह में महिलाएं बना रही हैं बच्चों की ड्रेस
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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं बच्चों का ड्रेस सिलती।
- फोटो : BASTI
समूह में महिलाएं बना रहीं बच्चों की ड्रेस
परिषदीय विद्यालय में वितरित की जानी हैं ड्रेस
गौर (बस्ती)। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इन दिनों परिषदीय विद्यालय के बच्चों का ड्रेस बना रही हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन गौर ब्लॉक प्रबंधक राजकुमार व अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर से निर्देश मिला है। ब्लॉक क्षेत्र में 150 प्राथमिक व 53 जूनियर विद्यालय चल रहे हैं। इनमें कुल 16144 बच्चे पढ़ रहे हैं।
इन विद्यालयों में वितरण किए जाने वाले ड्रेसों को इस बार स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तैयार कर रही हैं। श्रीराम स्वयं सहायता समूह बढ़नी, जय हनुमान स्वयं सहायता समूह बढ़नी, बुद्ध आजीविका स्वयं सहायता समूह पौनी जब्ती, जय मां काली स्वयं सहायता समूह पौनी जब्ती, जयभीम आजीविका स्वयं सहायता समूह धनघटा व जय मां दुर्गा आजीविका स्वयं सहायता समूह बढ़नी को ड्रेस बनाने का जिम्मा दिया गया है। इन समूहों में लगभग 35 महिलाएं काम कर रही हैं। ये करीब 32288 ड्रेस तैयार करेंगी। प्रबंधक राजकुमार इस योजना से सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आत्मनिर्भर भारत को बल मिल रहा है। एनआरएमएल डीसी रामदुलारे ने बताया कि इन समूहों का निरीक्षण किया गया। काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। बीईओ कपिल देव द्विवेदी बताया कि समूहों को गुणवतापूर्ण ड्रेस तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
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परिषदीय विद्यालय में वितरित की जानी हैं ड्रेस
गौर (बस्ती)। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इन दिनों परिषदीय विद्यालय के बच्चों का ड्रेस बना रही हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन गौर ब्लॉक प्रबंधक राजकुमार व अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर से निर्देश मिला है। ब्लॉक क्षेत्र में 150 प्राथमिक व 53 जूनियर विद्यालय चल रहे हैं। इनमें कुल 16144 बच्चे पढ़ रहे हैं।
इन विद्यालयों में वितरण किए जाने वाले ड्रेसों को इस बार स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तैयार कर रही हैं। श्रीराम स्वयं सहायता समूह बढ़नी, जय हनुमान स्वयं सहायता समूह बढ़नी, बुद्ध आजीविका स्वयं सहायता समूह पौनी जब्ती, जय मां काली स्वयं सहायता समूह पौनी जब्ती, जयभीम आजीविका स्वयं सहायता समूह धनघटा व जय मां दुर्गा आजीविका स्वयं सहायता समूह बढ़नी को ड्रेस बनाने का जिम्मा दिया गया है। इन समूहों में लगभग 35 महिलाएं काम कर रही हैं। ये करीब 32288 ड्रेस तैयार करेंगी। प्रबंधक राजकुमार इस योजना से सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आत्मनिर्भर भारत को बल मिल रहा है। एनआरएमएल डीसी रामदुलारे ने बताया कि इन समूहों का निरीक्षण किया गया। काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। बीईओ कपिल देव द्विवेदी बताया कि समूहों को गुणवतापूर्ण ड्रेस तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
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