{"_id":"65-94779","slug":"Basti-94779-65","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूषित जल और गंदगी से गांव में फैला डायरिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दूषित जल और गंदगी से गांव में फैला डायरिया
Basti
Updated Mon, 08 Sep 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती/मानिक चंद। सल्टौआ ब्लॉक के कोठिली गांव में डायरिया से पीड़ित एक बच्ची की मौत के बाद रविवार को स्वास्थ्य विभाग की टी गांव में पहुंच गई। टीम ने दिवंगत लड़की की मां और बहन को सल्टौआ स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया। टीम के प्रभारी का कहना है कि दो को सीएचसी पर भर्ती कराया गया है। गांव में डायरिया गंदगी और दूषित जल के कारण फैला है।
बता दें कि गांव के फू लचंद की पुत्री रागिनी और परिवार के दो अन्य सदस्य डायरिया रोग की चपेट में आए। शनिवार को रोग के चलते रागिनी ने दम तोड़ दिया। वहीं फूलचंद, उनकी पत्नी पार्वती, लड़की रेखा अब भी रोग की चपेट में हैं। रविवार को संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष के प्रभारी डॉ. राकेश मणि ने टीम के साथ गांव में स्थिति का जायजा लिया। बताया कि अगस्त महीने में जेई-एईएस रोग के निदेशक डॉ. एमके अग्रवाल के आने के समय भी बताया गया था कि कोठिली गांव में मात्र एक इंडिया मार्का हैंडपंप है जो पिछले पांच साल से खराब पड़ा है। इस पर उन्होंने जलनिगम के अधिकारियों से बात कर तत्काल इसे ठीक कराने को निर्देशित किया था। बावजूद इसके अभी भी हैंडपंप ठीक नहीं हुआ। बताया कि गांव के निरीक्षण में यह बात सामने आई कि गांव में गंदगी का अंबार लगा है। दो सफाई कर्मी कभी कभार आते हैं, जिसके कारण हर ओर गंदगी पसरी मिली। बीस फुट नीचे गड़े हैंडपंप से परिवार के लोग पानी पीते हैं, जिसके पास में ही नाली है। इससे रोग को बढ़ावा मिल रहा है।
बताया कि फूलचंद्र की पत्नी पार्वती और बेटी रेखा को सल्टौआ सीएचसी पर भर्ती कराया गया है। जहां दोनों का इलाज चल रहा है। बताया कि गांव में ग्राम स्वच्छता समिति के खाते से रुपये निकालकर एएनएम को अन्य निरोधात्मक उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही नालियों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराकर क्लोरीन की गोलियां भी वितरित की गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि गांव के फू लचंद की पुत्री रागिनी और परिवार के दो अन्य सदस्य डायरिया रोग की चपेट में आए। शनिवार को रोग के चलते रागिनी ने दम तोड़ दिया। वहीं फूलचंद, उनकी पत्नी पार्वती, लड़की रेखा अब भी रोग की चपेट में हैं। रविवार को संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष के प्रभारी डॉ. राकेश मणि ने टीम के साथ गांव में स्थिति का जायजा लिया। बताया कि अगस्त महीने में जेई-एईएस रोग के निदेशक डॉ. एमके अग्रवाल के आने के समय भी बताया गया था कि कोठिली गांव में मात्र एक इंडिया मार्का हैंडपंप है जो पिछले पांच साल से खराब पड़ा है। इस पर उन्होंने जलनिगम के अधिकारियों से बात कर तत्काल इसे ठीक कराने को निर्देशित किया था। बावजूद इसके अभी भी हैंडपंप ठीक नहीं हुआ। बताया कि गांव के निरीक्षण में यह बात सामने आई कि गांव में गंदगी का अंबार लगा है। दो सफाई कर्मी कभी कभार आते हैं, जिसके कारण हर ओर गंदगी पसरी मिली। बीस फुट नीचे गड़े हैंडपंप से परिवार के लोग पानी पीते हैं, जिसके पास में ही नाली है। इससे रोग को बढ़ावा मिल रहा है।
विज्ञापन
बताया कि फूलचंद्र की पत्नी पार्वती और बेटी रेखा को सल्टौआ सीएचसी पर भर्ती कराया गया है। जहां दोनों का इलाज चल रहा है। बताया कि गांव में ग्राम स्वच्छता समिति के खाते से रुपये निकालकर एएनएम को अन्य निरोधात्मक उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही नालियों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराकर क्लोरीन की गोलियां भी वितरित की गईं।
विज्ञापन