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दरिंदा कहना भी शायद कम होगा

Sat, 04 Jan 2014 05:43 AM IST
Basti
Basti Updated Sat, 04 Jan 2014 05:43 AM IST
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बस्ती। नया साल आने में सिर्फ एक दिन बचा था। भविष्य के बेहतर होने की उम्मीद को लेकर एक युवती घर में सोई हुई थी। अचानक तीन युवकों ने उसके ऊपर तेजाब डाल दिया। किस्मत से लड़की का चेहरा बच गया पर शरीर तेजाब से नहीं बच पाया। शरीर पर तेजाब के काले निशान को देख कर युवती की आंखों में आंसू आ जाते हैं। घटना को बीते चार दिन हो चुके हैं मगर खौफ अब भी बाकी है। शायद अब पूरी जिंदगी उसे तेजाब का डर सताता रहेगा।
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30 दिसंबर 2013 की रात वाल्टरगंज इलाके में एक युवती पर तीन युवकों ने तेजाब फेंक दिया। युवती का चेहरा तो बच गया मगर शरीर जल गया। फिलहाल युवती का उपचार जिला अस्पताल में चल रहा है। पीड़ित युवती ने बताया कि घटना के समय वह अपने घर के बरामदे में सोई हुई थी। रात साढ़े ग्यारह बजे उसे किसी के आने की आहट हुई। वह सतर्क हो गई। तभी तीन युवक उसके पास पहुंचे। कंबल को खींच कर एक बोतल को खोलने लगे। किसी गलत हरकत की आशंका में उसने चीखते हुए अपना चेहरा कपड़ों में छुपा लिया। तभी उसे अपने ऊपर कुछ जलने वाली चीज गिरती महसूस हुई, वह और जोर से चीखने लगी। एकाएक उसका पूरा शरीर जलने लगा। ऐसा लगा जैसे शरीर की हड्डी तक जल जाएगी। उसे लगा कि अब जान जाने वाली है। तभी शोर सुनकर उसकी मां पहुंच गई। मां को देखते ही तीनों युवक भागने लगे। युवती ने बताया कि मां को आया देख मेरा डर कुछ कम हुआ। चेहरे को कपड़े से निकाला तो देखा तेजाब डालने वाले पट्टीदारी के युवक थे। युवक भागने लगे। इधर, मां ने आते ही उसे गोद में लिया, जिससे तेजाब ने उन्हें भी जला दिया। दोनों रोने लगीं, इसी बीच परिवार के अन्य सदस्य भी पहुंच गए। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई और उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आया गया। किस्मत थी कि चेहरा नहीं जला। युवती ने बताया कि उस रात को शायद जिंदगी भर न भूल पाऊं। शरीर पर तेजाब के चलते काले निशान पड़ गए हैं। जिनको देखकर बरबस ही रोना आ जाता है। युवती ने बताया कि सोते समय अक्सर डर लगता है कि शायद फिर से ऐसी घटना न हो जाए। उन युवकों को दरिंदा कहना भी शायद कम होगा।
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...उस रात बदकिस्मती का पहाड़ टूट पड़ा
युवती की मां ने बताया कि मेरे पति दूसरों के घर में मांगलिक अवसरों पर भोजन बनाने का काम करते हैं। यह मेरी सबसे बड़ी बेटी है। परिवार की माली हालत खराब होने के कारण इसे अधिक पढ़ा लिखा नहीं सकी। जिसका दंश आज भी सालता है। जिंदगी में बहुत तकलीफें देखी हैं, मगर उस रात की घटना से तो लगा मानों बदकिस्मती का पहाड़ टूट पड़ा। भला हो भगवान का, लड़की का चेहरा काफी हद तक बच गया। वरना इसकी शादी भी नहीं हो पाती।
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एनजीओ की पेशकश पर कर रहे हैं विचार
युवती की मां ने बताया कि दिल्ली के एक एनजीओ के कुछ लोग मिलने कल (बृहस्पतिवार) को मिलने आए थे। बेटी का अच्छा इलाज कराने की एनजीओ वालों ने इच्छा जताई है। पेशकश के बारे में वह और उनके परिवार के सदस्य गंभीरता से सोच रहे हैं। आगे जिला अस्पताल के डॉक्टर जो राय देंगे, उसके हिसाब से निर्णय लेंगे।


सजा के साथ सामाजिक तिरस्कार भी मिले
युवती और उसकी मां घटना के जिम्मेदार तीनों युवकों को कड़ी कानूनी सजा तो दिलाना ही चाहती हैं, इसके साथ ही वे चाहती हैं कि ऐसे वहशी कृत्य करने वालों का सामाजिक तिरस्कार भी हो। जिससे वे भविष्य में फिर से किसी बेटी, बहू के साथ ऐसी दरिंदगी करने की हिम्मत कोई और न कर सके।
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