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गाजे-बाजे साथ दी मां लक्ष्मी को विदाई
Basti
Updated Wed, 06 Nov 2013 05:39 AM IST
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बस्ती। धनतेरस से शुरू हुई लक्ष्मी पूजा का समापन मंगलवार को प्रतिमा विसर्जन के साथ हुआ। मंगलवार देर रात तक भक्तों ने गाजे-बाजे के साथ जुलूस निकालकर मां लक्ष्मी को विदाई दी। कुआनो के अमहट घाट और मुक्तिघाट समेत ग्रामीण क्षेत्रों में घाटों पर देर रात विसर्जन किया गया। विसर्जन के दौरान सुरक्षा में तैनात जवान मुस्तैद दिखे। बस्ती शहर के दक्षिण दरवाजा से लेकर अमहट घाट तक मेले जैसा दृश्य रहा। ग्रामीणों इलाकों में भी मां लक्ष्मी को विधि-विधान से विदाई दी।
शहर सहित ग्रामीण इलाकों में स्थापित किए गए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश सहित मां सरस्वती की पूजा विधि विधान से की गई। धनतेरस से शुरू हुई लक्ष्मी पूजा सोमवार की शाम पूर्ण आहुति के साथ संपन्न हो गई। मंगलवार सुबह से प्रतिमा पंडालों हवन शुरू हुआ। महिलाओं ने विधि पूर्वक गोदभराई की। शाम को ट्रैक्टर ट्राली और अन्य वाहनों पर रख कर प्रतिमाओं को फूलमालाओं से सजाया गया। इसके बाद प्रतिमाओं को शहर के विभिन्न हिस्सों से होते हुए अमहट घाट की ओर ले जाया गया। डीजे की धुन पर थिरकते युवाओं ने जमकर गुलाल और अबीर उड़ाए। भक्ति गीतों से देर रात तक पूरा माहौल सराबोर रहा। हर कोई देवी गीतों पर थिरकता नजर आया। विसर्जन के दौरान पुलिस चौकस रही। पुरानी बस्ती से लेकर अमहट घाट तक पुलिस के जवान मुस्तैद रहे। शहर से सटे गनेशपुर कस्बे और उससे सटे गांवों की लक्ष्मी प्रतिमाओं का विसर्जन मुक्ति घाट पर किया गया। जिले के देईसाड़, बानपुर, सिरसिया, ककरहा आदि स्थानों की मूर्तियों का विसर्जन कुआनो नदी के पिड़िया घाट पर हुआ। जबकि बनकटी चित्राखोर, बरुआर, मथौली और रौतापार की प्रतिमाओं का विसर्जन लालगंज के मनोरमा नदी में किया गया। कप्तानगंज और महराजगंज की मूर्तियों का विर्सजन पंडूल घाट में किया गया। ग्रामीण स्तर पर भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रहे।
अमहट घाट पर रहा पुख्ता इंतजाम
शहर की प्रतिमाओं के विसर्जन स्थल अमहट घाट पर प्रशासन की ओर से चाक चौबंद व्यवस्था की गई थी। नगर पालिका की ओर से साफ सफाई, चूनाकारी के साथ बिजली की बेहतरीन व्यवस्था की गई थी। पुलिस प्रशासन की ओर से मोटर बोट के साथ ही बड़ी संख्या में घाट पर पुलिस के जवान लगाए गए थे। इसके अलावा धोबीघाट के पास अधिकारियों और कर्मचारियों का एक कैंप भी बनाया गया था। मंगलवार की दोपहर अधिकारियों को घाट का जायजा लेकर कर्मचारियों को दिशा निर्देश दिए। घाटके किनारे पर बालू भरी बोरियां भी रखी र्गइं, जिससे प्रतिमा को नाव तक ले जाने में पैर न फिसले।
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शहर सहित ग्रामीण इलाकों में स्थापित किए गए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश सहित मां सरस्वती की पूजा विधि विधान से की गई। धनतेरस से शुरू हुई लक्ष्मी पूजा सोमवार की शाम पूर्ण आहुति के साथ संपन्न हो गई। मंगलवार सुबह से प्रतिमा पंडालों हवन शुरू हुआ। महिलाओं ने विधि पूर्वक गोदभराई की। शाम को ट्रैक्टर ट्राली और अन्य वाहनों पर रख कर प्रतिमाओं को फूलमालाओं से सजाया गया। इसके बाद प्रतिमाओं को शहर के विभिन्न हिस्सों से होते हुए अमहट घाट की ओर ले जाया गया। डीजे की धुन पर थिरकते युवाओं ने जमकर गुलाल और अबीर उड़ाए। भक्ति गीतों से देर रात तक पूरा माहौल सराबोर रहा। हर कोई देवी गीतों पर थिरकता नजर आया। विसर्जन के दौरान पुलिस चौकस रही। पुरानी बस्ती से लेकर अमहट घाट तक पुलिस के जवान मुस्तैद रहे। शहर से सटे गनेशपुर कस्बे और उससे सटे गांवों की लक्ष्मी प्रतिमाओं का विसर्जन मुक्ति घाट पर किया गया। जिले के देईसाड़, बानपुर, सिरसिया, ककरहा आदि स्थानों की मूर्तियों का विसर्जन कुआनो नदी के पिड़िया घाट पर हुआ। जबकि बनकटी चित्राखोर, बरुआर, मथौली और रौतापार की प्रतिमाओं का विसर्जन लालगंज के मनोरमा नदी में किया गया। कप्तानगंज और महराजगंज की मूर्तियों का विर्सजन पंडूल घाट में किया गया। ग्रामीण स्तर पर भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रहे।
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अमहट घाट पर रहा पुख्ता इंतजाम
शहर की प्रतिमाओं के विसर्जन स्थल अमहट घाट पर प्रशासन की ओर से चाक चौबंद व्यवस्था की गई थी। नगर पालिका की ओर से साफ सफाई, चूनाकारी के साथ बिजली की बेहतरीन व्यवस्था की गई थी। पुलिस प्रशासन की ओर से मोटर बोट के साथ ही बड़ी संख्या में घाट पर पुलिस के जवान लगाए गए थे। इसके अलावा धोबीघाट के पास अधिकारियों और कर्मचारियों का एक कैंप भी बनाया गया था। मंगलवार की दोपहर अधिकारियों को घाट का जायजा लेकर कर्मचारियों को दिशा निर्देश दिए। घाटके किनारे पर बालू भरी बोरियां भी रखी र्गइं, जिससे प्रतिमा को नाव तक ले जाने में पैर न फिसले।
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