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सीडीओ के सत्यापन में औचित्यहीन मिला प्रस्ताव
Basti
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र की ओर से विभिन्न कार्यों के लिए प्रस्तुत की गई कार्य योजना में एक करोड़ से अधिक की धनराशि वाले कार्यों पर सीडीओ ने आपत्ति जताई है। आनन-फानन विभाग ने कार्य न कराने का निर्णय लिया है। डीएम ने इस बारे में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के सचिव को पत्र लिखा है।
संयुक्त निदेशक औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र की ओर से सीडीओ को मनरेगा के तहत एक करोड़ 58 लाख का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। प्रस्ताव में कराए जाने वाले कार्यों का सत्यापन सीडीओ ने कराया तो एक करोड़ से अधिक के काम का कोई औचित्य ही नहीं मिला। मनरेगा से 2011-12 में बंजरिया फार्म में जर्म प्लाज्म संरक्षण और उद्यानीकरण के विभिन्न कार्यों के लिए 11.58 लाख रुपये का प्रस्ताव सीडीओ को प्रस्तुत किया गया था। प्रस्ताव में स्थल विकास मद में जंगली खरपतवार निकालने के लिए श्रमांश पर 1.50 लाख, प्रस्तावित स्थल की गुड़ाई कराने के लिए 13.65 लाख, ढेला तोड़ने और समतलीकरण के लिए 44.38 लाख, सुरक्षा के उपायों पर 41.50 लाख प्रस्तावित किया गया था। 19 अगस्त को उक्त प्रस्ताव का सीडीओ ने जिला उद्यान अधिकारी के साथ स्थलीय सत्यापन किया। सत्यापन में पाया गया कि प्रस्तावित स्थल पर ढैंचा बीज बोया है, जंगली खरपतवार उगा ही नहीं है। इतना ही नहीं प्रस्तावित स्थल समतल है, बलुई मिट्टी होने के कारण उसमें गुड़ाई करने पर ढेला बनेगा ही नहीं। मगर प्रस्ताव में इन सब मदों पर खर्च किए जाने के लिए धनराशि की मांग की गई है। ऐसे में इसका कोई औचित्य नहीं बनता।
डीएम एस मथुशालिनी ने सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण को पत्र लिखकर बताया है कि मनरेगा एक श्रम परक योजना है, जिसमें उक्त कार्य कराया जाना नियमसंगत नहीं है। इसकी जानकारी जब संयुक्त निदेशक औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र बस्ती को दी गई तो उन्होंने उसमें आंशिक संशोधन कर दोबारा प्रस्ताव उपलब्ध कराया। इस प्रस्ताव में भी खामियां मिलीं। इसमें भी आवश्यकता से अधिक धनराशि के खर्च करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इस पर जब एक बार फिर जब आपत्ति की गई तो संयुक्त निदेशक ने कार्य न कराने का निर्णय लिया। डीएम ने इस निर्णय को कार्यहित में न मानते हुए सचिव को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
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सीडीओ रामअरज मौर्य ने बताया कि प्रस्ताव में अनावश्यक धन खर्च करने की योजना बनाई गई थी। सत्यापन के दौरान सच सामने आने पर उन्होंने कार्य कराने से मना कर दिया। बाद में इसकी रिपोर्ट उन्हाेंने डीएम को भेज दी।
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संयुक्त निदेशक औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र की ओर से सीडीओ को मनरेगा के तहत एक करोड़ 58 लाख का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। प्रस्ताव में कराए जाने वाले कार्यों का सत्यापन सीडीओ ने कराया तो एक करोड़ से अधिक के काम का कोई औचित्य ही नहीं मिला। मनरेगा से 2011-12 में बंजरिया फार्म में जर्म प्लाज्म संरक्षण और उद्यानीकरण के विभिन्न कार्यों के लिए 11.58 लाख रुपये का प्रस्ताव सीडीओ को प्रस्तुत किया गया था। प्रस्ताव में स्थल विकास मद में जंगली खरपतवार निकालने के लिए श्रमांश पर 1.50 लाख, प्रस्तावित स्थल की गुड़ाई कराने के लिए 13.65 लाख, ढेला तोड़ने और समतलीकरण के लिए 44.38 लाख, सुरक्षा के उपायों पर 41.50 लाख प्रस्तावित किया गया था। 19 अगस्त को उक्त प्रस्ताव का सीडीओ ने जिला उद्यान अधिकारी के साथ स्थलीय सत्यापन किया। सत्यापन में पाया गया कि प्रस्तावित स्थल पर ढैंचा बीज बोया है, जंगली खरपतवार उगा ही नहीं है। इतना ही नहीं प्रस्तावित स्थल समतल है, बलुई मिट्टी होने के कारण उसमें गुड़ाई करने पर ढेला बनेगा ही नहीं। मगर प्रस्ताव में इन सब मदों पर खर्च किए जाने के लिए धनराशि की मांग की गई है। ऐसे में इसका कोई औचित्य नहीं बनता।
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डीएम एस मथुशालिनी ने सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण को पत्र लिखकर बताया है कि मनरेगा एक श्रम परक योजना है, जिसमें उक्त कार्य कराया जाना नियमसंगत नहीं है। इसकी जानकारी जब संयुक्त निदेशक औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र बस्ती को दी गई तो उन्होंने उसमें आंशिक संशोधन कर दोबारा प्रस्ताव उपलब्ध कराया। इस प्रस्ताव में भी खामियां मिलीं। इसमें भी आवश्यकता से अधिक धनराशि के खर्च करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इस पर जब एक बार फिर जब आपत्ति की गई तो संयुक्त निदेशक ने कार्य न कराने का निर्णय लिया। डीएम ने इस निर्णय को कार्यहित में न मानते हुए सचिव को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
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सीडीओ रामअरज मौर्य ने बताया कि प्रस्ताव में अनावश्यक धन खर्च करने की योजना बनाई गई थी। सत्यापन के दौरान सच सामने आने पर उन्होंने कार्य कराने से मना कर दिया। बाद में इसकी रिपोर्ट उन्हाेंने डीएम को भेज दी।