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कुम्हारों के अब आएंगे %अच्छे दिन%
Updated Sun, 22 Jul 2018 11:45 PM IST
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कुम्हारों के अब आएंगे ‘अच्छे दिन’
माटी कला बोर्ड गठित होने से जगी उम्मीद
माटी और शिल्प कला उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बाद सरकार का अहम फैसला
राम ललित यादव
गौर/बस्ती। प्लास्टिक से बने सामान के बढ़ते चलन से कुम्हारों का व्यवसाय अतीत की गाथा बन रहा था। पुश्तैनी धंधा छिनने से कई बेरोजगार हो रहे थे। पॉलिथीन प्रतिबंध के बाद प्रदेश सरकार ने अहम फैसले के तहत माटी कला बोर्ड गठित कर अच्छे दिन के संकेत दिए हैं।
पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के एक सप्ताह में ही माटी और शिल्प कला उद्योग बोर्ड गठित होने से कुम्हारों के पुश्तैनी धंधे पर उम्मीद जगा दी है। अब उन्हें घर बैठे रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। जिले में करीब 15000 कुम्हार हैं। इनमें अधिकांश ऐसे हैं, जिनका परिवार सिर्फ चाक के धंधे पर की पूरी तरह निर्भर करता है। पूर्ववर्ती सरकारों के ध्यान नहीं देने से इनका व्यवसाय दिनोंदिन चौपट होता गया। सरकार के इस फैसले से प्रजापति समाज में खुशी है। गत बृहस्पतिवार को खादी विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने जानकारी दी कि माटी और शिल्प कला उद्योग को बढ़ावा देने के लिए माटी कला बोर्ड का गठन किया गया है। इसमें खादी और ग्रामोद्योग मंत्री अध्यक्ष होंगे। यह जानकारी होते ही कुम्हारों के चेहरे खिल उठे।
कुम्हार समाज में छलकी खुशी
गौर क्षेत्र के बभनगांवा कला गांव के कुम्हार कलेसर बताते हैं कि हम लोग अपने मिट्टी के धंधे को लेकर काफी निराश हो चुके थे। मगर प्रदेश सरकार ने माटी कला बोर्ड गठित करके पुश्तैनी धंधे पर एक बार फिर उम्मीद जगा दी है।
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राम उजागिर प्रजापति कहते हैं कि चाय की दुकानों एवं शादी विवाह में पहले मिट्टी के बने कुल्हड़ आदि का प्रयोग किया जाता था। किंतु अब परिवार को पालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
बभनगांवा कला गांव के रामनेवास प्रजापति बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में कुम्हारों की समस्या को देखते हुए तालाब व भूमि पट्टे पर देने की घोषणा हुई थी। योजनाएं कागज में सिमट कर रह गई।
सुमित्रा देवी, सहजराम, जगराम, राम सुरेश का कहना है कि इस योजना के लागू हो जाने से हम लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी। साथ ही परिवार के लोगों को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
कुम्हारों को मिलेंगे निशुल्क पट्टे
एसडीएम हर्रैया शिव प्रताप शुक्ल ने बताया कि माटी कला बोर्ड गठित होने से कुम्हारों को फायदा होगा। इसके साथ ही मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मिट्टी के खनन के लिए ग्राम पंचायतों में कुम्हारी कला के कारीगरों को निशुल्क पट्टा आवंटित किए जाएंगे। शासनादेश निर्गत होते ही कुम्हारों को उनके गांव में ही योजनाओं से संबंधित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकारी विभागों में हो कुल्हड़ों का उपयोग : बीडीओ
खंड विकास अधिकारी गौर रुकमणी वर्मा कहती हैं कि सरकारी विभागों में प्लास्टिक के कप की जगह मिट्टी के कुल्हड़ों का उपयोग हो तो बेहतर होगा। इसके साथ ही कुम्हारों का रोजगार दो गुना बढ़ेगा और स्वास्थ्य के लिए मिट्टी का बर्तन काफी हद तक ठीक है।
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कुम्हारों के अब आएंगे ‘अच्छे दिन’
माटी कला बोर्ड गठित होने से जगी उम्मीद
माटी और शिल्प कला उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बाद सरकार का अहम फैसला
राम ललित यादव
गौर/बस्ती। प्लास्टिक से बने सामान के बढ़ते चलन से कुम्हारों का व्यवसाय अतीत की गाथा बन रहा था। पुश्तैनी धंधा छिनने से कई बेरोजगार हो रहे थे। पॉलिथीन प्रतिबंध के बाद प्रदेश सरकार ने अहम फैसले के तहत माटी कला बोर्ड गठित कर अच्छे दिन के संकेत दिए हैं।
पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के एक सप्ताह में ही माटी और शिल्प कला उद्योग बोर्ड गठित होने से कुम्हारों के पुश्तैनी धंधे पर उम्मीद जगा दी है। अब उन्हें घर बैठे रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। जिले में करीब 15000 कुम्हार हैं। इनमें अधिकांश ऐसे हैं, जिनका परिवार सिर्फ चाक के धंधे पर की पूरी तरह निर्भर करता है। पूर्ववर्ती सरकारों के ध्यान नहीं देने से इनका व्यवसाय दिनोंदिन चौपट होता गया। सरकार के इस फैसले से प्रजापति समाज में खुशी है। गत बृहस्पतिवार को खादी विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने जानकारी दी कि माटी और शिल्प कला उद्योग को बढ़ावा देने के लिए माटी कला बोर्ड का गठन किया गया है। इसमें खादी और ग्रामोद्योग मंत्री अध्यक्ष होंगे। यह जानकारी होते ही कुम्हारों के चेहरे खिल उठे।
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कुम्हार समाज में छलकी खुशी
गौर क्षेत्र के बभनगांवा कला गांव के कुम्हार कलेसर बताते हैं कि हम लोग अपने मिट्टी के धंधे को लेकर काफी निराश हो चुके थे। मगर प्रदेश सरकार ने माटी कला बोर्ड गठित करके पुश्तैनी धंधे पर एक बार फिर उम्मीद जगा दी है।
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राम उजागिर प्रजापति कहते हैं कि चाय की दुकानों एवं शादी विवाह में पहले मिट्टी के बने कुल्हड़ आदि का प्रयोग किया जाता था। किंतु अब परिवार को पालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
बभनगांवा कला गांव के रामनेवास प्रजापति बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में कुम्हारों की समस्या को देखते हुए तालाब व भूमि पट्टे पर देने की घोषणा हुई थी। योजनाएं कागज में सिमट कर रह गई।
सुमित्रा देवी, सहजराम, जगराम, राम सुरेश का कहना है कि इस योजना के लागू हो जाने से हम लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी। साथ ही परिवार के लोगों को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
कुम्हारों को मिलेंगे निशुल्क पट्टे
एसडीएम हर्रैया शिव प्रताप शुक्ल ने बताया कि माटी कला बोर्ड गठित होने से कुम्हारों को फायदा होगा। इसके साथ ही मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मिट्टी के खनन के लिए ग्राम पंचायतों में कुम्हारी कला के कारीगरों को निशुल्क पट्टा आवंटित किए जाएंगे। शासनादेश निर्गत होते ही कुम्हारों को उनके गांव में ही योजनाओं से संबंधित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकारी विभागों में हो कुल्हड़ों का उपयोग : बीडीओ
खंड विकास अधिकारी गौर रुकमणी वर्मा कहती हैं कि सरकारी विभागों में प्लास्टिक के कप की जगह मिट्टी के कुल्हड़ों का उपयोग हो तो बेहतर होगा। इसके साथ ही कुम्हारों का रोजगार दो गुना बढ़ेगा और स्वास्थ्य के लिए मिट्टी का बर्तन काफी हद तक ठीक है।