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मखौड़ा धाम से चौरासी कोसी परिक्रमा शुरू
basti
Updated Sun, 01 Apr 2018 11:30 PM IST
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मखोड़ा धाम में जुटे श्रद्धालु।
- फोटो : amar ujala
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परशुरामपुर/छावनी।
मखौड़ा धाम से 84 कोसी परिक्रमा रविवार की भोर से शुरू हो गई। अयोध्या के संत गयादास के नेतृत्व में जय श्रीराम के जयघोष के साथ साधुओं का जत्था रवाना हुआ। 84 कोसी परिक्रमा मखौड़ा धाम से शुरू होकर अंबेडकर नगर, फैजाबाद, बाराबंकी और गोंडा जिले के भगवान श्री राम से जुडे़ स्थलों से होते हुए 22 अप्रैल 2018 को वापस मखौड़ा आकर संपन्न होगी।
22 दिन की इस परिक्रमा में 21 जगह रात्रि विश्राम की व्यवस्था है। संत गयादास का कहना है कि परिक्रमा पूरी करने से मनुष्य को 84 लाख योनियों में जन्म से मुक्त मिल जाती है। पुरुषोत्तम श्रीराम के अयोध्या राज्य का विस्तार 84 कोस में था। मान्यता है कि इस राज्य की परिक्रमा से मनुष्य की सभी कामनाओं की पूर्ति के साथ ही उसे सद्गति मिलती है। मखौड़ा में ही राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया। शृंगी ऋषि के आचार्यत्व में हुए यज्ञ के अंत में अग्निदेव प्रगट होकर उन्हें खीर प्रदान किए, जिसे खाकर तीनों रानियों को राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न जैसे पुत्रों की प्राप्ति हुई। तभी से इस क्षेत्र की महत्ता बढ़ गई। श्रद्धालु जन इस दुष्कर यात्रा को हर वर्ष करके पुण्य लाभ लेते हैं।
प्रथम पड़ाव स्थल रामरेखा मंदिर
यात्रा का पहला पड़ाव स्थल रविवार को रामरेखा मंदिर रहा। मंदिर के पुजारी दयाशंकर दास ने बताया कि यहां रात्रि विश्राम करने के बाद दूसरे दिन सोमवार की सुबह भोर में यात्रा दूसरे पड़ाव स्थल हनुमानबाग चकोही के लिए बढ़ेगी। श्रद्धालुओं के खाने, पीने, ठहरने की सभी व्यवस्था पूरी कर ली गई है।
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चिकित्सा की सुविधा नहीं
यात्रा के अगुवा महंत गया दास ने बताया कि इस बार कोई भी चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था नहीं की गई है। यात्रा मार्ग पर निर्माणाधीन कार्य के चलते उखड़ीं गिट्टियों से रामरेखा तक श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, प्रथम पड़ाव स्थल रामरेखा पर सुरक्षा को लेकर छावनी पुलिस सुबह से ही मुस्तैद रही।
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मखौड़ा धाम से 84 कोसी परिक्रमा रविवार की भोर से शुरू हो गई। अयोध्या के संत गयादास के नेतृत्व में जय श्रीराम के जयघोष के साथ साधुओं का जत्था रवाना हुआ। 84 कोसी परिक्रमा मखौड़ा धाम से शुरू होकर अंबेडकर नगर, फैजाबाद, बाराबंकी और गोंडा जिले के भगवान श्री राम से जुडे़ स्थलों से होते हुए 22 अप्रैल 2018 को वापस मखौड़ा आकर संपन्न होगी।
22 दिन की इस परिक्रमा में 21 जगह रात्रि विश्राम की व्यवस्था है। संत गयादास का कहना है कि परिक्रमा पूरी करने से मनुष्य को 84 लाख योनियों में जन्म से मुक्त मिल जाती है। पुरुषोत्तम श्रीराम के अयोध्या राज्य का विस्तार 84 कोस में था। मान्यता है कि इस राज्य की परिक्रमा से मनुष्य की सभी कामनाओं की पूर्ति के साथ ही उसे सद्गति मिलती है। मखौड़ा में ही राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया। शृंगी ऋषि के आचार्यत्व में हुए यज्ञ के अंत में अग्निदेव प्रगट होकर उन्हें खीर प्रदान किए, जिसे खाकर तीनों रानियों को राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न जैसे पुत्रों की प्राप्ति हुई। तभी से इस क्षेत्र की महत्ता बढ़ गई। श्रद्धालु जन इस दुष्कर यात्रा को हर वर्ष करके पुण्य लाभ लेते हैं।
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प्रथम पड़ाव स्थल रामरेखा मंदिर
यात्रा का पहला पड़ाव स्थल रविवार को रामरेखा मंदिर रहा। मंदिर के पुजारी दयाशंकर दास ने बताया कि यहां रात्रि विश्राम करने के बाद दूसरे दिन सोमवार की सुबह भोर में यात्रा दूसरे पड़ाव स्थल हनुमानबाग चकोही के लिए बढ़ेगी। श्रद्धालुओं के खाने, पीने, ठहरने की सभी व्यवस्था पूरी कर ली गई है।
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चिकित्सा की सुविधा नहीं
यात्रा के अगुवा महंत गया दास ने बताया कि इस बार कोई भी चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था नहीं की गई है। यात्रा मार्ग पर निर्माणाधीन कार्य के चलते उखड़ीं गिट्टियों से रामरेखा तक श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, प्रथम पड़ाव स्थल रामरेखा पर सुरक्षा को लेकर छावनी पुलिस सुबह से ही मुस्तैद रही।