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कैली को मिला मेडिकल कालेज का दर्जा
Updated Fri, 06 Jul 2018 11:00 PM IST
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कैली को मिला मेडिकल कॉलेज का दर्जा
प्रमुख सचिव ने भेजा स्वीकृति पत्र, अब जिला अस्पताल के बजाय कैली होगा उच्चीकृत
नीरज श्रीवास्तव
बस्ती। ओपेक चिकित्सालय कैली को आखिरकार राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज का दर्जा दे दिया। 25 जून को कैली के सीएमएस डॉ. सोमेश चंद्र श्रीवास्तव के प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद केंद्र से वार्ता के बाद पांच जुलाई को प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दूबे ने स्वीकृति पत्र डीएम और महानिदेशक कैली को भेज दिया है।
केंद्र सहायतित योजना फेज वन के अंतर्गत जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा दिए जाने की व्यवस्था बनाई गई थी। इसके बाद उच्चाधिकारियों सहित तकनीकी टीम ने यहां कई दौरे किए, मगर जिला अस्पताल में जगह न होने के कारण इसे लेकर सवाल उठने लगे थे। हालांकि, मेडिकल कॉलेज की घोषणा के बाद से ही यह कयास लगाए जाने लगे थे कि ओपेक चिकित्सालय कैली को ही मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलेगा, मगर तकनीकी कारणों से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था। नतीजतन, जिला अस्पताल को उच्चीकृत करने की कवायद शुरू होने लगी। जून में दौरे पर बस्ती आए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह से सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कैली को मेडिकल कॉलेज का दर्जा देने की बात तर्कपूर्ण ढंग से रखी, जिस पर मंत्री ने प्रयास करने का आश्वासन दिया। इसी बीच कैली के सीएमएस पद पर डॉ. सोमेश की तैनाती हुई और उन्होंने प्रयास के क्रम में प्रस्ताव बनाया और शासन में बैठक के दौरान प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति ले ली। मामला केंद्र के पास पहुंचा तो तकनीकी दिक्कतों को दूर करते हुए केंद्र सरकार ने प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी। निदेशक कैली को भेजे पत्र में प्रमुख सचिव ने कहा है कि प्रथम चरण में राजकीय मेडिकल कॉलेज में शामिल बस्ती को अब जिला अस्पताल के बजाय रेफरल अस्पताल ओपेक चिकित्सालय कैली में पांच सौ शैय्या अतिरिक्त भूमि की उपलब्धता के क्रम में इस अस्पताल को उच्चीकृत किया जाए। ओपेक चिकित्सालय कैली के सीएमएस डॉ. सोमेश चंद्र ने कहा कि शासन का पत्र प्राप्त हो गया है। कैली को राजकीय मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिला है। इस अस्पताल में अब संसाधनों आदि का भरपूर उपयोग किया जा सकेगा।
फोटो
कुष्ठ रोगियों को खोजेंगी एएनएम, आशा
किया गया प्रशिक्षित, 16 से चलेगा उन्मूलन अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
भानपुर। एनएलईपी (नेशनल लैप्रोसी इरैडीकेशन प्रोग्राम) राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के लिए एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया। कुष्ट रोगियों को खोजने के लिए 16 से 29 जुलाई तक अभियान चलाया जाएगा।
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शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम और आशा को बीमारी के लक्षण तथा अन्य जानकारियां दी गईं। प्रशिक्षण में सीएचसी अधीक्षक डॉ. विवेक विस्वास ने कहा कि कुष्ठ रोग माइक्रोबैक्टीरियम लैप्री के कारण होने वाला क्रोनिक संक्रामक रोग है। यह किसी को भी हो सकता है। बताया कि इसमें त्वचा पर एक या एक से अधिक लाल रंग या फीके रंग का दाग या धब्बा हो सकता है जिसमें सुन्नपन, सूखापन, पसीना न आना, खुजली, जलन, चुभन आदि नहीं होना मुख्य है। ऐसे लक्षण हैं तो कुष्ठ रोग हो सकता है। अधीक्षक ने बताया कि 16 जुलाई से 29 जुलाई तक एएनएम और आशा को घर-घर जाकर ऐसे रोगी की पहचान कर सूचीबद्ध करना है। कहा कि ऐसे रोगियों को बिना किसी शर्म और संकोच के अस्पताल में आकर अपनी जांच करानी चाहिए। अस्पताल में पूरी तरह से निशुल्क दवाएं हैं। जिसका सेवन कर बीमारी को दूर भगाने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम को बीसीपीएम स्वामी नाथ, (एनएमए)रवीन्द्र गौतम, ईश्वर चन्द्र पाण्डेय, शिवशंकर ने भी संबोधित किया। इस मौके पर अमित कुमार, सतीश गुप्ता, राजेश कुमार सहित सभी एएनएम और आशा मौजूद रहीं।
जेनरिक दवाओं को लिखने से परहेज
डॉक्टरों की उपेक्षा दवाओं के बिक्री पर पड़ रही भारी
अस्पताल गेट के ऊपरी तल पर है जन औषधि केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। केंद्र की मोदी सरकार की मंशा हर गरीब को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएं। इसके लिए जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। जिला अस्पताल गेट संख्या दो पर भी यह केंद्र संचालित होता है, मगर केंद्र पर छिटपुट पर्चे पहुंचते हैं। वह भी बाहर के डॉक्टरों के। यह अलग बात है कि सरकार का यह निर्देश है कि जेनरिक दवाएं मरीजों को लिखी जाएं, लेकिन यह निर्देश रद्दी की टोकरी में है।
दवाओं की बढ़ती कीमतों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए गुणवत्तायुक्त दवाओं की व्यवस्था बनाई है। इसके लिए विभिन्न बीमारियों के जेनरिक दवाओं की उपलब्धता बाजार में कराई है। यही नहीं सरकारी अस्पतालों में इसके लिए जन औषधि केंद्र खोलने की घोषणा की। शहर में जिला अस्पताल के गेट नंबर दो पर इसका संचालन भी शुरू करा दिया, मगर जिला अस्पताल के डॉक्टर एक भी जेनरिक दवा मरीज को नहीं लिखते, जबकि अधिकांश मरीजों को डॉक्टर मरीजों को बाहर की ही दवाएं लिखते हैं। बाहर की दवाओं और जांच लिखने को लेकर कई डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत भी हो चुकी है, मगर अधिकारियों की मिलीभगत से मामले को दबा दिया गया है।
एसआईसी कैप्टन डॉ. ओपी सिंह ने कहा कि जन औषधि केंद्र अस्पताल के निकट है। यह संज्ञान में नहीं है। वैसे जन औषधि केंद्र खोलने को लेकर किसी से बातचीत चल रही थी, मगर वे जहां जगह मांग रहे हैं वहां जगह देना उपयोगी नहीं है। क्योंकि वह खाली जमीन है और भवन निर्माण की अनुमति देना उन्हें संभव नहीं है। फिर भी यदि यहां जन औषधि केंद्र खुला है तो डॉक्टरों को यह निर्देश दिया जाएगा कि वे मरीजों को जेनरिक दवाएं लिखें।
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प्रमुख सचिव ने भेजा स्वीकृति पत्र, अब जिला अस्पताल के बजाय कैली होगा उच्चीकृत
नीरज श्रीवास्तव
बस्ती। ओपेक चिकित्सालय कैली को आखिरकार राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज का दर्जा दे दिया। 25 जून को कैली के सीएमएस डॉ. सोमेश चंद्र श्रीवास्तव के प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद केंद्र से वार्ता के बाद पांच जुलाई को प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दूबे ने स्वीकृति पत्र डीएम और महानिदेशक कैली को भेज दिया है।
केंद्र सहायतित योजना फेज वन के अंतर्गत जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा दिए जाने की व्यवस्था बनाई गई थी। इसके बाद उच्चाधिकारियों सहित तकनीकी टीम ने यहां कई दौरे किए, मगर जिला अस्पताल में जगह न होने के कारण इसे लेकर सवाल उठने लगे थे। हालांकि, मेडिकल कॉलेज की घोषणा के बाद से ही यह कयास लगाए जाने लगे थे कि ओपेक चिकित्सालय कैली को ही मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलेगा, मगर तकनीकी कारणों से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था। नतीजतन, जिला अस्पताल को उच्चीकृत करने की कवायद शुरू होने लगी। जून में दौरे पर बस्ती आए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह से सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कैली को मेडिकल कॉलेज का दर्जा देने की बात तर्कपूर्ण ढंग से रखी, जिस पर मंत्री ने प्रयास करने का आश्वासन दिया। इसी बीच कैली के सीएमएस पद पर डॉ. सोमेश की तैनाती हुई और उन्होंने प्रयास के क्रम में प्रस्ताव बनाया और शासन में बैठक के दौरान प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति ले ली। मामला केंद्र के पास पहुंचा तो तकनीकी दिक्कतों को दूर करते हुए केंद्र सरकार ने प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी। निदेशक कैली को भेजे पत्र में प्रमुख सचिव ने कहा है कि प्रथम चरण में राजकीय मेडिकल कॉलेज में शामिल बस्ती को अब जिला अस्पताल के बजाय रेफरल अस्पताल ओपेक चिकित्सालय कैली में पांच सौ शैय्या अतिरिक्त भूमि की उपलब्धता के क्रम में इस अस्पताल को उच्चीकृत किया जाए। ओपेक चिकित्सालय कैली के सीएमएस डॉ. सोमेश चंद्र ने कहा कि शासन का पत्र प्राप्त हो गया है। कैली को राजकीय मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिला है। इस अस्पताल में अब संसाधनों आदि का भरपूर उपयोग किया जा सकेगा।
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कुष्ठ रोगियों को खोजेंगी एएनएम, आशा
किया गया प्रशिक्षित, 16 से चलेगा उन्मूलन अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
भानपुर। एनएलईपी (नेशनल लैप्रोसी इरैडीकेशन प्रोग्राम) राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के लिए एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया। कुष्ट रोगियों को खोजने के लिए 16 से 29 जुलाई तक अभियान चलाया जाएगा।
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शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम और आशा को बीमारी के लक्षण तथा अन्य जानकारियां दी गईं। प्रशिक्षण में सीएचसी अधीक्षक डॉ. विवेक विस्वास ने कहा कि कुष्ठ रोग माइक्रोबैक्टीरियम लैप्री के कारण होने वाला क्रोनिक संक्रामक रोग है। यह किसी को भी हो सकता है। बताया कि इसमें त्वचा पर एक या एक से अधिक लाल रंग या फीके रंग का दाग या धब्बा हो सकता है जिसमें सुन्नपन, सूखापन, पसीना न आना, खुजली, जलन, चुभन आदि नहीं होना मुख्य है। ऐसे लक्षण हैं तो कुष्ठ रोग हो सकता है। अधीक्षक ने बताया कि 16 जुलाई से 29 जुलाई तक एएनएम और आशा को घर-घर जाकर ऐसे रोगी की पहचान कर सूचीबद्ध करना है। कहा कि ऐसे रोगियों को बिना किसी शर्म और संकोच के अस्पताल में आकर अपनी जांच करानी चाहिए। अस्पताल में पूरी तरह से निशुल्क दवाएं हैं। जिसका सेवन कर बीमारी को दूर भगाने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम को बीसीपीएम स्वामी नाथ, (एनएमए)रवीन्द्र गौतम, ईश्वर चन्द्र पाण्डेय, शिवशंकर ने भी संबोधित किया। इस मौके पर अमित कुमार, सतीश गुप्ता, राजेश कुमार सहित सभी एएनएम और आशा मौजूद रहीं।
जेनरिक दवाओं को लिखने से परहेज
डॉक्टरों की उपेक्षा दवाओं के बिक्री पर पड़ रही भारी
अस्पताल गेट के ऊपरी तल पर है जन औषधि केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। केंद्र की मोदी सरकार की मंशा हर गरीब को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएं। इसके लिए जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। जिला अस्पताल गेट संख्या दो पर भी यह केंद्र संचालित होता है, मगर केंद्र पर छिटपुट पर्चे पहुंचते हैं। वह भी बाहर के डॉक्टरों के। यह अलग बात है कि सरकार का यह निर्देश है कि जेनरिक दवाएं मरीजों को लिखी जाएं, लेकिन यह निर्देश रद्दी की टोकरी में है।
दवाओं की बढ़ती कीमतों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए गुणवत्तायुक्त दवाओं की व्यवस्था बनाई है। इसके लिए विभिन्न बीमारियों के जेनरिक दवाओं की उपलब्धता बाजार में कराई है। यही नहीं सरकारी अस्पतालों में इसके लिए जन औषधि केंद्र खोलने की घोषणा की। शहर में जिला अस्पताल के गेट नंबर दो पर इसका संचालन भी शुरू करा दिया, मगर जिला अस्पताल के डॉक्टर एक भी जेनरिक दवा मरीज को नहीं लिखते, जबकि अधिकांश मरीजों को डॉक्टर मरीजों को बाहर की ही दवाएं लिखते हैं। बाहर की दवाओं और जांच लिखने को लेकर कई डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत भी हो चुकी है, मगर अधिकारियों की मिलीभगत से मामले को दबा दिया गया है।
एसआईसी कैप्टन डॉ. ओपी सिंह ने कहा कि जन औषधि केंद्र अस्पताल के निकट है। यह संज्ञान में नहीं है। वैसे जन औषधि केंद्र खोलने को लेकर किसी से बातचीत चल रही थी, मगर वे जहां जगह मांग रहे हैं वहां जगह देना उपयोगी नहीं है। क्योंकि वह खाली जमीन है और भवन निर्माण की अनुमति देना उन्हें संभव नहीं है। फिर भी यदि यहां जन औषधि केंद्र खुला है तो डॉक्टरों को यह निर्देश दिया जाएगा कि वे मरीजों को जेनरिक दवाएं लिखें।