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अस्पताल में दवाएं, डॉक्टरों को ही भरोसा नहीं
basti
Updated Fri, 05 Jan 2018 11:52 PM IST
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जिला अस्पताल में बाहर से जांच कराकर और दवा लेकर आती महिला।
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। जिला अस्पताल के चिकित्सकों को यहां की दवाइयों पर ही ‘भरोसा’ नहीं है। तभी तो वे अस्पताल में 135 तरह की दवाइयां उपलब्ध होने के बाद भी पर्ची पर बाहर की दवाइयां लिख रहे हैं। जल्द स्वस्थ होने की आस में मरीजों के तिमारदार भी इससे परहेज नहीं कर रहे हैं। एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव इस पूरे मामले को गलत मानते हुए कार्रवाई की बात कह रहे हैं। शुक्रवार दोपहर जिला अस्पताल के बाहर के मेडिकल स्टोर्स पर दवाइयां खरीद रहे तीमारदारों से अस्पताल की दवाएं नहीं लेने के बाबत जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा, जल्द स्वस्थ होना है तो ... मेडिकल स्टोर से दवाइयां ले लें। बाघनगर (संतकबीरनगर) की एक तीमारदार कहती हैं कि गले की समस्या है। डॉक्टर एक हफ्ते की दवा लिखते हैं। उनमें कुछ एक दवाइयां अस्पताल के काउंटर से मिलती हैं, बाकी बाहर से खरीदती हूं। यह महज बानगी है। हर मरीज की जांच और दवाइयां निशुल्क हैं। निर्देशों के पालन में पूरा तंत्र लगा है पर डॉक्टर खुद ही बाहर और अंदर की दवा में अंतर समझाकर निश्चित मेडिकल स्टोर से ही दवा लेने को बाध्य करते हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन सभी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता का दावा कर रहा है। जिला अस्पताल के दवा स्टोर प्रभारी पीके पांडेय की माने तो अस्पताल में खांसी, सर्दी, वायरल फीवर की दवाओं के अलावा नामचीन कंपनियों के एंटी बायोटिक, एंटी फंगल के साथ आयरन, कैल्शियम, फोलिकएसिड, दर्द निवारक सहित कुल 135 श्रेणी की दवाएं हैं। यह दवाएं काउंटर पर उपलब्ध रहती हैं, जो डाक्टर की सलाह पर मरीजों को उपलब्ध करा दी जाती है। जिला अस्पताल के एसआईसी डा. एके श्रीवास्तव कहते हैं कि जरूरी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं। फिर भी डॉक्टर बाहर से दवाइयां लाने के लिए पर्ची लिख रहे हैं तो इसकी जांच भी करेंगे और कार्रवाई भी। मेडिकल वार्ड में चद्दर बदलने के लिए किसी भी स्टाफ ने रिश्वत ली है तो उस पर भी कार्रवाई निश्चित होगी। दवाएं समाप्त होने से पहले ही इंडेंट बनाकर कंपनी को भेज दी जाती हैं, जिससे जरूरी दवाओं की कमी नहीं होने पाती।
600 मरीजों की प्रतिदिन ओपीडी
जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 600 मरीजों की ओपीडी होती है। इस समय खांसी, जुकाम, बुखार और कोल्ड डायरिया के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। मरीजों की संख्या के सापेक्ष दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करा देने का अस्पताल प्रबंधन दावा कर रहा है।
चद्दर बदलने के लिए देनी पड़ी रकम
ईसी वार्ड में भर्ती मानसिक रूप से परेशान राधा के परिवार के लोग बताते हैं कि उससे बिस्तर के चद्दर बदलने तक के लिए सौ रुपया वसूला गया है। अब तक जांच व दवाओं के नाम पर पांच हजार रुपये खर्च हो चुका है।
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मरीजों व तीमारदारों की परेशानी
जिला अस्पताल के ओपीडी में इलाज कराने पहुंची बाघनगर के उचहरा गांव निवासी नाहिदा खातून कहती हैं कि उनका आपरेशन होना है। डॉक्टर ने दवा तो बाहर से लिखी ही जांच भी बाहर से ही करवाया है। अब तक 12 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती गोंडा जनपद के तुरकडीहा गांव निवासी आकांक्षा ने बताया कि उनके पेट में दर्द था। इलाज कराने आईं तो डॉक्टर ने भर्ती कर लिया। इसके बाद गैस, पेट दर्द सहित व कई दवाइयां बाहर से ही मंगाई गईं। लकवा की शिकार गोंडा जिला के कठौतिया गांव निवासी 80 वर्षीय कलावती के पुत्र दिलीप सिंह कहते हैं कि अधिकांश दवाएं बाहर से ही मंगाकर मरीज को दी जा रही हैं। क्योंकि डाक्टरों ने जल्दी स्वस्थ होने के लिए बाहर की दवाओं का प्रयोग करने की सलाह दी है।
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600 मरीजों की प्रतिदिन ओपीडी
जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 600 मरीजों की ओपीडी होती है। इस समय खांसी, जुकाम, बुखार और कोल्ड डायरिया के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। मरीजों की संख्या के सापेक्ष दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करा देने का अस्पताल प्रबंधन दावा कर रहा है।
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चद्दर बदलने के लिए देनी पड़ी रकम
ईसी वार्ड में भर्ती मानसिक रूप से परेशान राधा के परिवार के लोग बताते हैं कि उससे बिस्तर के चद्दर बदलने तक के लिए सौ रुपया वसूला गया है। अब तक जांच व दवाओं के नाम पर पांच हजार रुपये खर्च हो चुका है।
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जिला अस्पताल के ओपीडी में इलाज कराने पहुंची बाघनगर के उचहरा गांव निवासी नाहिदा खातून कहती हैं कि उनका आपरेशन होना है। डॉक्टर ने दवा तो बाहर से लिखी ही जांच भी बाहर से ही करवाया है। अब तक 12 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती गोंडा जनपद के तुरकडीहा गांव निवासी आकांक्षा ने बताया कि उनके पेट में दर्द था। इलाज कराने आईं तो डॉक्टर ने भर्ती कर लिया। इसके बाद गैस, पेट दर्द सहित व कई दवाइयां बाहर से ही मंगाई गईं। लकवा की शिकार गोंडा जिला के कठौतिया गांव निवासी 80 वर्षीय कलावती के पुत्र दिलीप सिंह कहते हैं कि अधिकांश दवाएं बाहर से ही मंगाकर मरीज को दी जा रही हैं। क्योंकि डाक्टरों ने जल्दी स्वस्थ होने के लिए बाहर की दवाओं का प्रयोग करने की सलाह दी है।