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राइस मिलों में फंसा पीसीएफ का 250 करोड़ का चावल

Thu, 02 May 2019 12:32 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 May 2019 12:32 AM IST
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राइस मिलों में फंसा पीसीएफ का 250 करोड़ का चावल
राइस मिलों में फंसा पीसीएफ का 250 करोड़ का चावल
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सरकारी चावल की वसूली के लिए 14 राइस मिलों को जारी है आरसी
2003 से 2016-17 तक का चावल राइस मिलों के पास
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जिले में राइस मिलों के पास पीसीएफ के 250 करोड़ रुपये फंसे हैं। यह धन सरकारी चावल का है, जिसे राइस मिलों ने कूटने के बाद वापस नहीं किया। हालांकि, इसे देने में नाकाम 14 राइस मिलों खिलाफ आरसी जारी है मगर इसका कोई परिणाम अब तक नहीं निकल पाया है। न्यूनतम मूल्य समर्थन योजना में धान खरीद के बाद उसकी कुटाई के लिए राइस मिलों को दिया जाता है। ये वे राइस मिल होते हैं, जो विभाग अनुबंधित करता है। वर्ष 2003 में पहली बार केंद्रीय पूल में खरीद का अनाज दिए जाने का प्रावधान बना तो उसी वर्ष कई राइस मिलों ने हजारों क्विंटल चावल दबा लिया। इसके बाद साल दर साल वर्ष 2016-17 तक यह स्थिति चलती रही। सर्वाधिक चावल वर्ष 2011-12 व 2012-13 में फंसा। इन दोनों वर्षों में 1187 व 1377 मीट्रिक टन चावल पीसीएफ का फंस गया। उसके बाद तो छिटपुट ही राइस मिल चावल दबा पाए क्योंकि कुटाई के तत्काल बाद इन पर विभागीय अधिकारी वापसी का दबाव बनाते हैं।

वर्ष 2011-12 व 12-13 में यह स्थिति इसलिए पैदा हुई क्योंकि उस साल गेहूं खरीद जबरदस्त हुई और यहां भंडारण की व्यवस्था नहीं थी। एफसीआई ने चावल को राइस मिलों के गोदाम में रखने की सलाह मिलरों को दे दी। उसके बाद वर्ष भर तक उसका कोई हिसाब नहीं लिया। राइस मिलरों का तर्क है कि चूंकि उनके पास तकनीकी गोदाम नहीं थे। ऐसे में चावल खराब होने लगे। कई राइस मिलरों ने तो यह भी कहा कि सरकारी चावल सड़ जाने की वजह से फेंकना पड़ा। हालांकि, इन तर्कों को न तो सरकार और न एफसीआई मनाती है, मगर राइस मिलर इसके बाद कोर्ट तक गए लेकिन उन्हें चावल के एवज में रुपये अदा करने का आदेश हुआ। यानी कोर्ट ने भी उन्हें केवल थोड़ी राहत दी। उसके बावजूद राइस मिलों ने छिटपुट वापसी की मगर अधिकांश अब तक चावल नहीं वापस किए, जबकि विभाग लगातार उन पर दबाव बनाए हुए है। पीसीएफ के जिला प्रबंधक अमित कुमार चौधरी ने उक्त की पुष्टि करते हुए कहा कि जिन राइस मिलों ने चावल वापस नहीं किया है उनके खिलाफ आरसी जारी की गई है। उन पर लगातार दबाव भी बनाया जा रहा है। वैसे धीरे-धीरे छिटपुट मिलर वापसी कर भी रहे हैं। फिलहाल, 250 करोड़ का चावल अब भी फंसा है।
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