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लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष के पिता के नाम बंजर जमीन
Updated Fri, 11 Aug 2017 10:40 PM IST
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पिता के नाम जमीन कराने में फंसे लेखपाल संघ के अध्यक्ष
बस्ती।
पत्नी और माता के नाम बीपीएल राशन कार्ड का इस्तेमाल करने के मामले में फंस चुके लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष रामसुमेर इस बार पिता के नाम नियम विरुद्ध आवास और सहन के नाम सरकारी जमीन होने के मामले में फंस गए हैं। राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी के परिवार के किसी भी सदस्य के नाम सरकारी जमीन नहीं हो सकती है। यहां तक कि अगर भूमि प्रबंधन समिति के किसी सदस्य के पास आवास के लिए जमीन नहीं है तो उसे भी आवास के लिए डीएम से अनुमति लेने का प्रावधान है। इसका खुलासा डीएम से की गई शिकायत में हुआ। इसके जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
राजस्व अभिलेखों के मुताबिक तहसील सदर के बहादुरपुर ब्लॉक के मीतनजोत निवासी नगई पुत्र गोपी लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष रामसुमेर के पिता है, उनके नाम पांच विस्वा आवास एवं सहन के लिए बंजर की भूमि ( संख्या 89ग) वर्ष 2014 से दर्ज है, नियमानुसार आवास निर्माण के लिए 20 एअर से अधिक जमीन किसी के नाम आवंटित ही नहीं हो सकती, मगर इस मामले में सारे नियम कानून तोड़कर लेखपाल के पिता के नाम 63 एअर यानि पांच बिस्वा जमीन कर दी, जिसकी कीमत 25 लाख से अधिक है। इस मामले में जिस तरह उपजिलाधिकारी न्यायालय का सहारा लिया गया, उसके चलते एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो और संबंधित लेखपाल की भूमिका संदेह के घेरे में हैं। इससे जुड़े एक जिम्मेदार ने बताया कि न्यायालय सहित अन्य तहसील कर्मियों को गुमराह करके जमीन को अपने नाम दर्ज कराया गया। इस संबंध में बात करने के लिए फोन किया गया तो जिलाध्यक्ष ने न तो फोन उठाया न ही वहट्सऐप के संदेश का जवाब दिया।
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बस्ती।
पत्नी और माता के नाम बीपीएल राशन कार्ड का इस्तेमाल करने के मामले में फंस चुके लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष रामसुमेर इस बार पिता के नाम नियम विरुद्ध आवास और सहन के नाम सरकारी जमीन होने के मामले में फंस गए हैं। राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी के परिवार के किसी भी सदस्य के नाम सरकारी जमीन नहीं हो सकती है। यहां तक कि अगर भूमि प्रबंधन समिति के किसी सदस्य के पास आवास के लिए जमीन नहीं है तो उसे भी आवास के लिए डीएम से अनुमति लेने का प्रावधान है। इसका खुलासा डीएम से की गई शिकायत में हुआ। इसके जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
राजस्व अभिलेखों के मुताबिक तहसील सदर के बहादुरपुर ब्लॉक के मीतनजोत निवासी नगई पुत्र गोपी लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष रामसुमेर के पिता है, उनके नाम पांच विस्वा आवास एवं सहन के लिए बंजर की भूमि ( संख्या 89ग) वर्ष 2014 से दर्ज है, नियमानुसार आवास निर्माण के लिए 20 एअर से अधिक जमीन किसी के नाम आवंटित ही नहीं हो सकती, मगर इस मामले में सारे नियम कानून तोड़कर लेखपाल के पिता के नाम 63 एअर यानि पांच बिस्वा जमीन कर दी, जिसकी कीमत 25 लाख से अधिक है। इस मामले में जिस तरह उपजिलाधिकारी न्यायालय का सहारा लिया गया, उसके चलते एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो और संबंधित लेखपाल की भूमिका संदेह के घेरे में हैं। इससे जुड़े एक जिम्मेदार ने बताया कि न्यायालय सहित अन्य तहसील कर्मियों को गुमराह करके जमीन को अपने नाम दर्ज कराया गया। इस संबंध में बात करने के लिए फोन किया गया तो जिलाध्यक्ष ने न तो फोन उठाया न ही वहट्सऐप के संदेश का जवाब दिया।
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