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हालैंड से दादी का गांव खोजने पहुंचे नरदेव चरन
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Sun, 23 Sep 2018 11:34 PM IST
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हॉलैंड से दादी का गांव खोजने सोनहा थाने पहुंचे नरदेव चरन। (सफेद शर्ट में बीच में)
- फोटो : अमर उजाला
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भानपुर। अपनी दादी का गांव खोजने 110 वर्ष बाद एक पौत्र नीदरलैंड से रविवार को रिश्तेदार और दोस्तों के साथ बस्ती जिले के सोनहा थाने पर पहुंचे। उन्होंने प्रभारी निरीक्षक सोनहा शिवाकांत मिश्रा से मुलाकात कर मझौवा गांव जाने की इच्छा जाहिर की, लेकिन थाना क्षेत्र में मझौवा नाम से पांच गांव होने की जानकारी पर स्पष्ट पता नहीं बता सके। नतीजतन उन्हें बिना अपने गांव पहुंचे ही लौटना पड़ा।
देश की माटी से इतना प्यार देखकर प्रभारी निरीक्षक समेत स्थानीय लोगों ने अतिथियों का स्वागत-सत्कार किया। दादी का गांव खोजने नीदरलैंड से पहुंचे नरदेव चरन ने पुलिस को बताया कि वर्ष 1908 में सोनहा क्षेत्र के मझौवा गांव निवासी दादी इलाइची देवी पुत्री ओरी 19 वर्ष की अवस्था में तेल रिफाइनरी में काम करने के लिए एक व्यक्ति के साथ सूरीनाम और फिर ब्राजील गई थीं। कार्य अवधि सिर्फ पांच वर्ष थी। समय सीमा समाप्त होने पर वहीं बस्ती जिले के बनकटा के सुभई गांव निवासी हरदयाल से 17 फरवरी, 1913 को शादी कर ली और नीदरलैंड चली आईं। 65 वर्षीय नरदेव चरन ने बताया कि उन दोनों की बेटी मंगरी देवी, ऐश्वर्या व बेटा रामदयाल तथा शिवनरायन हुए, जिनका स्वर्गवास हो चुका है। शिवनरायन के बेटे देवचरन ने सरकारी सेवा से निवृत्त होने पर शिवनरायन की ओर से बताए गए दादी के मूल निवास के पते की पड़ताल शुरू की। नीदरलैंड से वे दिल्ली पहुंचे। वहां से लखनऊ होते हुए रविवार को सोनहा थाने पहुंचे। मझौवा नाम के पांच गांव होने और पता स्पष्ट नहीं होने की वजह से वे बिना गांव पहुंचे ही लौट गए।
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देश की माटी से इतना प्यार देखकर प्रभारी निरीक्षक समेत स्थानीय लोगों ने अतिथियों का स्वागत-सत्कार किया। दादी का गांव खोजने नीदरलैंड से पहुंचे नरदेव चरन ने पुलिस को बताया कि वर्ष 1908 में सोनहा क्षेत्र के मझौवा गांव निवासी दादी इलाइची देवी पुत्री ओरी 19 वर्ष की अवस्था में तेल रिफाइनरी में काम करने के लिए एक व्यक्ति के साथ सूरीनाम और फिर ब्राजील गई थीं। कार्य अवधि सिर्फ पांच वर्ष थी। समय सीमा समाप्त होने पर वहीं बस्ती जिले के बनकटा के सुभई गांव निवासी हरदयाल से 17 फरवरी, 1913 को शादी कर ली और नीदरलैंड चली आईं। 65 वर्षीय नरदेव चरन ने बताया कि उन दोनों की बेटी मंगरी देवी, ऐश्वर्या व बेटा रामदयाल तथा शिवनरायन हुए, जिनका स्वर्गवास हो चुका है। शिवनरायन के बेटे देवचरन ने सरकारी सेवा से निवृत्त होने पर शिवनरायन की ओर से बताए गए दादी के मूल निवास के पते की पड़ताल शुरू की। नीदरलैंड से वे दिल्ली पहुंचे। वहां से लखनऊ होते हुए रविवार को सोनहा थाने पहुंचे। मझौवा नाम के पांच गांव होने और पता स्पष्ट नहीं होने की वजह से वे बिना गांव पहुंचे ही लौट गए।
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