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गड़ढामुक्त के नाम पर पीडब्लूडी में मची धन की लूट
Updated Tue, 05 Sep 2017 11:32 PM IST
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गड्ढामुक्ति के नाम पर पीडब्लूडी में धन की लूट
बस्ती।
पीडब्लूडी प्रांतीय खंड में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के नाम पर धन की लूट मची हुई है। ऐसे सड़कों को भी गड्ढामुक्त दिखा दिया, जिसमें एक भी गड्ढा नहीं है। पेंटिंग और सरफेस तक नहीं खराब हुआ। चार माह पहले जिस सड़क के नवीनीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए गए फिर उसी सड़क पर गड्ढामुक्ति के नाम पर धन की बंदरबांट कर ली गई। इसका खुलासा विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई गड्ढामुक्त सड़कों की सूची का परीक्षण करने के बाद हुआ। ऊपर से विभाग के एक्सईएन से लेकर एई और जेई सही काम करने का दावा कर रहे हैं। सबसे अधिक गड़बड़ी कुदरहा ब्लॉक क्षेत्र की सड़कों में हुई है।
अब जरा विभाग के अफसरों और ठेकेदारों की कार्यशैली पर नजर डालिए। रामजानकी से परेव पर एक भी पैच नहीं कराया गया। रामजानकी मार्ग से दोफड़ा तक की सड़क पर एक भी गड्ढामुक्त नहीं था, यह सड़क प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनाई गई और सड़क अच्छी है फिर भी विभाग ने इस सड़क पर गड्ढामुक्ति के नाम पर धन खर्च कर दिया। हथियांव से रसूलपुर इस सड़क पर एक साल पहले नवीनीकरण के नाम लाखों रुपये खर्च किए गए और फिर उसी सड़क पर गड्ढामुक्त के नाम लाखों रुपये खर्च कर डाले जब कि इस सड़क पर एक भी गड्ढा नहीं हैं। इसी तरह परसांव से सेल्हरा से चौधरी पुरवा तक की सड़क भी एक साल पहले नवीनीकरण हुआ था। उसे भी विभाग ने गड्ढामुक्त दिखा दिया। कुदरहा से लालगंज से भक्तूपुर भी एक साल पहले नवीनीकरण का कार्य हुआ था। रामजानकी मार्ग से बगही तक इस सड़क पर एक भी गड्ढा नहीं है, फिर भी विभाग के जिम्मेदारों ने इस पर लाखों रुपये कागज में खर्च कर दिए। इस क्षेत्र की सबसे अच्छी और गड्ढाविहीन सड़क पाऊॅं से चरकैलिया है। इस सड़क को देखकर कोई कह ही नहीं सकता है, इस सड़क पर गड्ढे भी होंगे। फिर भी विभाग ने इस सड़क पर गड्ढामुक्ति के नाम पर धन खर्च कर दिया।
जांच टीम पर उठे सवाल
गड्ढामुक्त सड़कों की जांच करने लखनऊ से आई टीम पर कई सवाल उठ रहे हैं। जब एक्सईएन आलोक से गड्ढामुक्ति के नाम पर धन की बर्बादी करने पर पूछा तो उन्होंने कहा कि यह सब अखबारों की सोच है। जांच टीम उन्हें क्लीन चिट देकर गई है। विभाग के एक अधिकारी और कई ठेकेदारों ने बताया कि सब कुछ पहले से सेट था। जांच करना तो औपचारिकता पूरा करने जैसा था। बताया कि जांच टीम को वही दिखाया गया जो विभाग ने दिखाया। कहते हैं कि जांच अधिकारियों को खुश करने के लिए विभाग की ओर से उन्हें निजी खर्च पर सबसे महंगे होटल में ठहराया और जाते समय पुरस्कार भी दिया। जबकि नियमानुसार जांच टीम की व्यवस्था सरकारी गेस्ट हाउस में करने की है।
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बस्ती।
पीडब्लूडी प्रांतीय खंड में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के नाम पर धन की लूट मची हुई है। ऐसे सड़कों को भी गड्ढामुक्त दिखा दिया, जिसमें एक भी गड्ढा नहीं है। पेंटिंग और सरफेस तक नहीं खराब हुआ। चार माह पहले जिस सड़क के नवीनीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए गए फिर उसी सड़क पर गड्ढामुक्ति के नाम पर धन की बंदरबांट कर ली गई। इसका खुलासा विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई गड्ढामुक्त सड़कों की सूची का परीक्षण करने के बाद हुआ। ऊपर से विभाग के एक्सईएन से लेकर एई और जेई सही काम करने का दावा कर रहे हैं। सबसे अधिक गड़बड़ी कुदरहा ब्लॉक क्षेत्र की सड़कों में हुई है।
अब जरा विभाग के अफसरों और ठेकेदारों की कार्यशैली पर नजर डालिए। रामजानकी से परेव पर एक भी पैच नहीं कराया गया। रामजानकी मार्ग से दोफड़ा तक की सड़क पर एक भी गड्ढामुक्त नहीं था, यह सड़क प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनाई गई और सड़क अच्छी है फिर भी विभाग ने इस सड़क पर गड्ढामुक्ति के नाम पर धन खर्च कर दिया। हथियांव से रसूलपुर इस सड़क पर एक साल पहले नवीनीकरण के नाम लाखों रुपये खर्च किए गए और फिर उसी सड़क पर गड्ढामुक्त के नाम लाखों रुपये खर्च कर डाले जब कि इस सड़क पर एक भी गड्ढा नहीं हैं। इसी तरह परसांव से सेल्हरा से चौधरी पुरवा तक की सड़क भी एक साल पहले नवीनीकरण हुआ था। उसे भी विभाग ने गड्ढामुक्त दिखा दिया। कुदरहा से लालगंज से भक्तूपुर भी एक साल पहले नवीनीकरण का कार्य हुआ था। रामजानकी मार्ग से बगही तक इस सड़क पर एक भी गड्ढा नहीं है, फिर भी विभाग के जिम्मेदारों ने इस पर लाखों रुपये कागज में खर्च कर दिए। इस क्षेत्र की सबसे अच्छी और गड्ढाविहीन सड़क पाऊॅं से चरकैलिया है। इस सड़क को देखकर कोई कह ही नहीं सकता है, इस सड़क पर गड्ढे भी होंगे। फिर भी विभाग ने इस सड़क पर गड्ढामुक्ति के नाम पर धन खर्च कर दिया।
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जांच टीम पर उठे सवाल
गड्ढामुक्त सड़कों की जांच करने लखनऊ से आई टीम पर कई सवाल उठ रहे हैं। जब एक्सईएन आलोक से गड्ढामुक्ति के नाम पर धन की बर्बादी करने पर पूछा तो उन्होंने कहा कि यह सब अखबारों की सोच है। जांच टीम उन्हें क्लीन चिट देकर गई है। विभाग के एक अधिकारी और कई ठेकेदारों ने बताया कि सब कुछ पहले से सेट था। जांच करना तो औपचारिकता पूरा करने जैसा था। बताया कि जांच टीम को वही दिखाया गया जो विभाग ने दिखाया। कहते हैं कि जांच अधिकारियों को खुश करने के लिए विभाग की ओर से उन्हें निजी खर्च पर सबसे महंगे होटल में ठहराया और जाते समय पुरस्कार भी दिया। जबकि नियमानुसार जांच टीम की व्यवस्था सरकारी गेस्ट हाउस में करने की है।
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