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प्लास्टिक की पन्नी लगाकर क्प्यूंटर को बचाया
Updated Mon, 10 Jul 2017 11:19 PM IST
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सरकारी कार्यालयों में टपक रहा पानी, परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। दो दिन से हो रही बारिश से सबसे अधिक प्रभावित सरकारी कार्यालय के अभिलेख और कर्मचारी हुए हैं। भू-लेख कार्यालय में तो छत के टपकने से तीन कंप्यूटर सहित अन्य अभिलेखों को बचाने के लिए बाजार से प्लास्टिक की पन्नी तक खरीदनी पड़ी। यही हाल बीएसए कार्यालय का भी रहा। दोनों कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप्प रहा। विकास भवन का छत भी टपक रहा है, जिसके कारण बरामदे में पानी भर गया है।
लगभग दो साल पहले पुराने कलेक्ट्रेट से सैनिक कल्याण बोर्ड के परिसर में स्थित पुराने भवन में शिफ्ट हुए भू-लेख कार्यालय का नजारा कुछ अलग ही रहा। दो दिन के अवकाश के बाद जब कर्मचारी कार्यालय गए तो देखा कि पूरा छत टपक रहा है। कंप्यूटर और अन्य अभिलेख पानी में भीग गए। सबसे पहले बचे तीन कंप्यूटरों और अभिलेखों को बचाने के लिए बाजार से प्लास्टिक की पन्नी मंगाई गई, उसके बाद सभी कंप्यूटरों को ढका गया, उसके बाद कार्यालय के पानी को निकालने के लिए बाजार से वाइपर मंगाना पड़ा। कर्मचारी राघवेंद्र पांडेय, कृष्ण गोपाल श्रीवास्तव, जमील अहमद, दुर्गा प्रसाद, लल्लन, उषा और बुद्घिसागर का पूरा समय पानी निकालने और कंप्यूटर सहित अभिलेखों को बचाने में बीत गया। डीएम अरविंद कुमार सिंह ने कार्यालय के छत पर तिरपाल लगाने का आदेश दिया।
यही हाल बीएसए कार्यालय का रहा। यह भवन लगभग 100 साल पुराना है, बारिश में इस भवन के लगभग सभी कमरों के छत टपकते हैं, बरामदे में पानी भर जाता है। सोमवार को कर्मचारियों का अधिकतर समय अभिलेख बचाने में बीत गया, चूंकि सोमवार को नए बीएसए को ज्वाइन करना था, इसलिए चहलकदमी रही। विकास भवन का छत कई सालों से टपक रहा है, जिसके कारण ऊपरी तल के बरामदे में पानी भर जाता है। इस कारण कामकाज लगभग ठप ही रहता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। दो दिन से हो रही बारिश से सबसे अधिक प्रभावित सरकारी कार्यालय के अभिलेख और कर्मचारी हुए हैं। भू-लेख कार्यालय में तो छत के टपकने से तीन कंप्यूटर सहित अन्य अभिलेखों को बचाने के लिए बाजार से प्लास्टिक की पन्नी तक खरीदनी पड़ी। यही हाल बीएसए कार्यालय का भी रहा। दोनों कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप्प रहा। विकास भवन का छत भी टपक रहा है, जिसके कारण बरामदे में पानी भर गया है।
लगभग दो साल पहले पुराने कलेक्ट्रेट से सैनिक कल्याण बोर्ड के परिसर में स्थित पुराने भवन में शिफ्ट हुए भू-लेख कार्यालय का नजारा कुछ अलग ही रहा। दो दिन के अवकाश के बाद जब कर्मचारी कार्यालय गए तो देखा कि पूरा छत टपक रहा है। कंप्यूटर और अन्य अभिलेख पानी में भीग गए। सबसे पहले बचे तीन कंप्यूटरों और अभिलेखों को बचाने के लिए बाजार से प्लास्टिक की पन्नी मंगाई गई, उसके बाद सभी कंप्यूटरों को ढका गया, उसके बाद कार्यालय के पानी को निकालने के लिए बाजार से वाइपर मंगाना पड़ा। कर्मचारी राघवेंद्र पांडेय, कृष्ण गोपाल श्रीवास्तव, जमील अहमद, दुर्गा प्रसाद, लल्लन, उषा और बुद्घिसागर का पूरा समय पानी निकालने और कंप्यूटर सहित अभिलेखों को बचाने में बीत गया। डीएम अरविंद कुमार सिंह ने कार्यालय के छत पर तिरपाल लगाने का आदेश दिया।
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यही हाल बीएसए कार्यालय का रहा। यह भवन लगभग 100 साल पुराना है, बारिश में इस भवन के लगभग सभी कमरों के छत टपकते हैं, बरामदे में पानी भर जाता है। सोमवार को कर्मचारियों का अधिकतर समय अभिलेख बचाने में बीत गया, चूंकि सोमवार को नए बीएसए को ज्वाइन करना था, इसलिए चहलकदमी रही। विकास भवन का छत कई सालों से टपक रहा है, जिसके कारण ऊपरी तल के बरामदे में पानी भर जाता है। इस कारण कामकाज लगभग ठप ही रहता है।
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