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अपराजिता: थोपे गए निर्णय को कहे न, खुद को करें मजबूत
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Fri, 23 Nov 2018 09:51 PM IST
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सूर्यबक्श पाल पीजी कालेज में कार्यक्रम को संबोधित करती काउंसालर सीमा सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। आधी आबादी देश की तरक्की में भरपूर योगदान नहीं दे पा रही है, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार वह अकेली नहीं है। ऐसा होने का कारण समाज में बेटियों को उनका वाजिब हक व सम्मान का न मिल पाना है। महिला और पुरुष के लिए समाज का नजरिया अलग-अलग है, जो घर-परिवार में भी दिखता है। पुरुष की थाली पकवान से भरी होती है तो महिला की खाली। ये बातें सूर्य बक्श पाल पीजी कॉलेज बनकटी में शुक्रवार को जिला महिला चिकित्सालय किशोरी परामर्श केंद्र की काउंसलर सीमा सिंह ने कहीं। वह अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में नारी सशक्तीकरण और स्वास्थ्य की पाठशाला में शिरकत कर रही थीं।
सिंह ने कहा कि घर में अधिक परिश्रम महिलाएं करती हैं, लेकिन बढ़िया भोजन पुरुषों को मिलता है। महिलाओं को पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता, जिससे उनका स्वास्थ्य खराब रहता है। उन्होंने कहा कि अगर महिला स्वस्थ नहीं रहेगी तो परिवार की अगली पीढ़ी भी अस्वस्थ होगी। उन्होंने कॉलेज की छात्राओं को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्ररित किया। कहा कि नारी की दशा और दिशा तय करने की जिम्मेदारी आप सभी पर है, लेकिन इसका निर्वहन तभी कर पाएंगी जब खुद को स्वस्थ रखेंगी। उन्होंने कहा कि शादी के बाद सास और परिवार के लोग बच्चे के बारे में फैसला लेते हैं, जबकि इसका अधिकार उस महिला का होना चाहिए। सिंह ने कहा कि उपेक्षा होने पर महिलाएं अपने हक की बात करने में न हिचकिचाएं और थोपे गए निर्णय को न कहें।
काउंसलर ने कहा कि बेटियों को यह लड़ाई लड़नी होगी, क्योंकि उन्हें भी अपना कॅरियर बनाने का हक है। बेटों को तो यह मौका दिया जाता है, लेकिन माता-पिता बेटी की शादी कर ‘मुक्ति’ पा लेना चाहते हैं। जिस दिन परिवार और समाज में महिलाओं को बराबर का हक मिल जाएगा, वे विकास की दौड़ में अव्वल होंगी। इस दौरान 41 छात्राओं ने भेदभाव नहीं करने और लोगों को जागरूक करने की शपथ ली।
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बढ़ रही बेटियों की जिम्मेदारी : प्राचार्य
प्राचार्य अजीत प्रताप सिंह ने कहा कि परिवार से लेकर समाज तक महिलाओं की जिम्मेदारी और हिस्सेदारी निरंतर बढ़ रही है, जो देश के लिए सुखद है। हर छात्रा को जिम्मेदार बनकर महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार के विरुद्घ अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। कार्यक्रम में काउंसलर विष्णु प्रसाद यादव, मार्तंड वरुण, डॉ. राकेश कुमार यादव, डॉ. रामजन्म सिंह, डॉ. नितेश श्रीवास्तव, डॉ. रीता सिंह, डॉ. आशा गुप्ता, अद्या अग्रहरि, अशोक चौधरी, संतोष कन्नौजिया, अजय पांडेय, शमशाद, विजय पाल सिंह, जगलाल, चंद्रिका प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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सिंह ने कहा कि घर में अधिक परिश्रम महिलाएं करती हैं, लेकिन बढ़िया भोजन पुरुषों को मिलता है। महिलाओं को पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता, जिससे उनका स्वास्थ्य खराब रहता है। उन्होंने कहा कि अगर महिला स्वस्थ नहीं रहेगी तो परिवार की अगली पीढ़ी भी अस्वस्थ होगी। उन्होंने कॉलेज की छात्राओं को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्ररित किया। कहा कि नारी की दशा और दिशा तय करने की जिम्मेदारी आप सभी पर है, लेकिन इसका निर्वहन तभी कर पाएंगी जब खुद को स्वस्थ रखेंगी। उन्होंने कहा कि शादी के बाद सास और परिवार के लोग बच्चे के बारे में फैसला लेते हैं, जबकि इसका अधिकार उस महिला का होना चाहिए। सिंह ने कहा कि उपेक्षा होने पर महिलाएं अपने हक की बात करने में न हिचकिचाएं और थोपे गए निर्णय को न कहें।
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काउंसलर ने कहा कि बेटियों को यह लड़ाई लड़नी होगी, क्योंकि उन्हें भी अपना कॅरियर बनाने का हक है। बेटों को तो यह मौका दिया जाता है, लेकिन माता-पिता बेटी की शादी कर ‘मुक्ति’ पा लेना चाहते हैं। जिस दिन परिवार और समाज में महिलाओं को बराबर का हक मिल जाएगा, वे विकास की दौड़ में अव्वल होंगी। इस दौरान 41 छात्राओं ने भेदभाव नहीं करने और लोगों को जागरूक करने की शपथ ली।
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बढ़ रही बेटियों की जिम्मेदारी : प्राचार्य
प्राचार्य अजीत प्रताप सिंह ने कहा कि परिवार से लेकर समाज तक महिलाओं की जिम्मेदारी और हिस्सेदारी निरंतर बढ़ रही है, जो देश के लिए सुखद है। हर छात्रा को जिम्मेदार बनकर महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार के विरुद्घ अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। कार्यक्रम में काउंसलर विष्णु प्रसाद यादव, मार्तंड वरुण, डॉ. राकेश कुमार यादव, डॉ. रामजन्म सिंह, डॉ. नितेश श्रीवास्तव, डॉ. रीता सिंह, डॉ. आशा गुप्ता, अद्या अग्रहरि, अशोक चौधरी, संतोष कन्नौजिया, अजय पांडेय, शमशाद, विजय पाल सिंह, जगलाल, चंद्रिका प्रसाद आदि मौजूद रहे।