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अनसुनी की गुहार, चांदपुर के अस्तित्व पर संकट

Fri, 24 Aug 2018 12:14 AM IST
Updated Fri, 24 Aug 2018 12:14 AM IST
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अनसुनी की गुहार, चांदपुर के अस्तित्व पर संकट
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अनसुनी की गुहार, चांदपुर के अस्तित्व पर संकट
कटने के कगार पर कटरिया-चांदपुर का तटबंध
चांदपुर की 400 आबादी के सामने बढ़ीं दुश्वारियां

अरुण पाठक
बस्ती। वीडी बांध के कटरिया-चांदपुर के तटवर्ती गांवों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। नदी खतरे के निशान 92.730 मीटर से 43 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बृहस्पतिवार को करीब 50 मीटर कटान पर नियंत्रण पाने में बाढ़ खंड और प्रशासन को पसीना छूट गया। जबकि दो किलोमीटर तक तटबंध अतिसंवेदनशील बना है। जिसकी बोल्डर से मरम्मत की मांग के लिए गांव वालों ने धरना-प्रदर्शन तक किया था। लेकिन उनकी गुहार अनसुनी कर दी गई।
विक्रमजोत-धुसवा बांध का कटरिया-चांदपुर तटबंध अतिसंवेदनशील है। सरयू नदी की धारा तटबंध से टकरा रही है। यहां पिछले वर्ष भी कटान लगी थी। चांदपुर गांव की 400 की आबादी लगातार बाढ़ खंड और जिला प्रशासन से बोल्डर लगाकर बांध को सुरक्षित करने की मांग करता रहा है। जून में भी धरना-प्रदर्शन किया। लेेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। पिछला भुगतान नहीं होने से बाढ़ खंड के ठेकेदार भी काम ठप कर दिए थे। डीएम डॉ. राजशेखर के हस्तक्षेप पर इस वर्ष मरम्मत का कार्य शुरू हुआ लेकिन बोल्डर नहीं ईंट रोड़े और मिट्टी भरी बोरियों से। जिसका परिणाम है कि बृहस्पतिवार सुबह बंधे की चौड़ाई का करीब 70 फीसदी हिस्सा 50 मीटर की लंबाई में नदी में समा गया। हो-हल्ला होने पर बाढ़ खंड ने बोल्डर डालकर किसी तरह कटान को नियंत्रित किया लेकिन खतरा अभी बरकरार है। क्योंकि कटरिया-चांदपुर तटबंध दो किलोमीटर तक जर्जर है।
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प्रभावितोें को सुरक्षित जगह भेजा जा रहा है
चांदपुर गांव नदी तटबंध के बाहर बांध से सटा है। इससे करीब 100 मीटर पर रामजानकी मार्ग है। गांव की आबादी 400 है। इनका अस्तित्व तटबंध पर निर्भर है। डीएम डॉ. राजशेखर ने बताया कि जो गांव बांध के अंदर आते हैं उन्हीं को दूसरी जगह बसाया जा सकता है। फिलहाल, चांदपुर गांव के लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जा रहा है। भोजन, दवाएं, पानी, बिजली समेत सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है।
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मांगा था पांच करोड़, मिले सिर्फ 70 लाख
दो किलोमीटर कटरिया-चांदपुर तटबंध अतिसंवेदनशील है। तटबंध का बेस सुरक्षित करने के लिए ईंट रोड़े बोरियों में भरकर और बोरियों को कैरट में डाला गया है। जबकि गांव के लोग बोल्डर से तटबंध को सुरक्षित करने के लिए धरना-प्रदर्शन करते रहे हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि यह बजट का मामला है। मरम्मत के लिए पांच करोड़ रुपये की मांग की गई थी लेकिन सिर्फ 70 लाख ही मिले। इस संबंध में पूछे जाना पर डीएम डॉ. राजशेखर ने बताया कि जिला प्रशासन के दिशा निर्देशन में बाढ़ खंड ने बोल्डर मंगाकर पिछले एक महीने से अलग-अलग स्थान पर बांध बचाने की कोशिश की है। बोल्डर के लिए बड़ी रकम चाहिए। मैंने इसे सरकार के संज्ञान में लाते हुए अनुरोध भी किया है। उम्मीद है कि अगले दो तीन दिनों में 40 से 50 लाख रुपये मिल जाएंगे।

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सरकार नहीं, सरयू मैया पर है भरोसा
चांदपुर बांध को कटते देखकर अटकी गांववालों की सांस
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। ...ये बाबू मजबूरी है। अपना घर-द्वार कैसे कोई छोड़ देगा। हर साल बाढ़ आती है। पिछले साल बांध कटते-कटते बचा। हम सभी गांव वाले नेताओं और अधिकारियों से कहते रहे कि बोल्डर से बांध बनवा दो लेकिन कौन सुनता है। आज तो सरयू मैया ने बचा दिया। सरकार और विधायक पर कोई भरोसा नहीं है। यह कहना है चांदपुर गांव के लोगों का
बातचीत में ग्राम प्रधान शोभाराम राजभर ने बताया कि इस तटबंध को सुरक्षित करने के लिए हम जिले के आला अधिकारी से दो सालों से गुहार लगा रहे हैं लेकिन बाढ़ के महीने यानी 16 जून से मरम्मत चालू हुई वह भी रोड़े और मिट्टी से। चांदपुर के बिफई राजभर का कहते हैं कि खतरा अभी टला नहीं है। गांव की कलावती देवी का कहना है रातभर नींद नहीं आती। तीन साल से नदी तटबंध पर कटान कर रही है लेकिन मरम्मत में तेजी नहीं आई। चांदपुर की माया देवी कहती हैं, आज तो लगा कि अब जिंदगी नहीं बचेगी लेकिन सरयू माई ने बचा लिया। वहीं, रामपाल राजभर कहते हैं कि बाढ़ खंड के ढीले मरम्मत कार्य पर लगातार हम लोग नाराजगी जताते आ रहे हैं। अगर अब भी ठोस मरम्मत का काम नहीं हुआ तो खतरा बना रहेगा। सुशीला कहती हैं कि खेतीबारी पहले ही कट गई। अब घर भी कट जाएगा यही सोचकर रात भर नींद नहीं आती है। चांदपुर के ही राकेश राजभर का कहना है कि जब बाढ़ आती है तब प्रशासन जागता है। वह तो भगवान का शुक्र रहा कि हम तबाह होने से बच गए। मिठाई लाल का कहना है कि सुबह से कटान हो रही थी। अगर मरम्मत तेजी हुई होती तो यह स्थिति नहीं आती अब तो सिर्फ भगवान पर ही भरोसा है।

रात में होगा मरम्मत का काम : अधिशासी अभियंता
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता डीके त्रिपाठी का कहना है कि जलस्तर घटने के कारण नदी ने चांदपुर गांव के पास करीब 50 मीटर व दो से तीन मीटर चौड़ाई में तटबंध को काट दिया है। मौके पर 250 मजदूरों व 50 टैक्ट्रर व ट्रॉली से बोल्डर व रोड़ा डाल कर मरम्मत कार्य तेजी से चल रहा है। स्थिति नियंत्रण में है। रात में भी मरम्मत कार्य चलेगा।

ग्रामीणों के लिए जरूरी प्रबंध करा रहे : एसडीएम
एसडीएम हर्रैया एसपी शुक्ल ने बताया कि चांदपुर गांव के करीब 400 ग्रामीणों के लिए प्राथमिक विद्यालय पर भोजन की व्यवस्था की जा रही है। जिसमें पूड़ी-सब्जी की व्यवस्था रहेगी। सभी मूलभूत जरूरतों की व्यवस्था की गई है। मेडिकल टीम भी लगाई गई है। बांध पर कटान नियंत्रण में है।

पहुंचे भाजयुमो और सपा नेता, कहा लापरवाही
चांदपुर बांध पर कटान की सूचना पर भाजपा युवा मोर्चा के नेता अभिनव उपाध्याय अपनी टीम के साथ बंधे पर पहुंच गए। कटान कर रही सरयू की स्थिति को पदाधिकारियों को फोन पर बताया। भाजपा नेता ने कार्य में शिथिलता पर नाराजगी जताई है। वहीं, सपा नेता सिद्धार्थ सिंह पूरे दल-बल के साथ बंधे पर पहुंच गए। सपा नेता का कहना था कि दो दिन धरना प्रदर्शन भी किया। बाढ़ खंड यदि बोल्डर से मरम्मत कराया होता तो यह नौबत ही नहीं आती। यह बाढ़ खंड के साथ प्रशासनिक लापरवाही भी है।

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सच होते दिखा गांव के अस्तित्व का भय
कटते-कटते बचा कटरिया-चांदपुर तटबंध
आनंद शुक्ल
दुबौलिया। जिस तटबंध को बचाने के लिए दो साल से ग्रामीण गुहार लगा रहे थे बृहस्पतिवार को सच होते दिखा तो रूह कांप गई। 70 फीसदी बांध लगातार नदी में समाता रहा। प्रशासन गांव छोड़ने की अपील करता रहा।
जिले के अतिसंवेदनशील कटरिया-चांदपुर तटबंध पर सुबह सात बजे से ही चांदपुर गांव के निकट सरयू की तेज धारा का तेज दबाव बना था। खाली जमीन काटती हुई नदी तटबंध के पास पहुंच गई। करीब साढ़े 11 बजे भीषण कटान शुरू हो गई। बंधा करीब 50 मीटर की लंबाई और दो से तीन मीटर की चौड़ाई में डेढ़ घंटे में कट गया। गांव में कोहराम मच गया। गांव के लोग बाढ़ खंड व प्रशासन के खिलाफ भड़ास निकालने लगे। चांदपुर व खलवा गांव के लोगों का आरोप था कि सुबह से ही कटान हो रही थी लेकिन बाढ़ खंड तत्काल नहीं पहुंचा। वहीं, बाढ़ खंड के जिम्मेदारों का कहना है कि अतिसंवेदनशील बांध है। चार किलोमीटर के दायरे में नदी दबाव बना रही है। जगह-जगह मरम्मत कार्य चल रहा है। कटान की सूचना पर एसडीएम एसपी शुक्ल, तहसीलदार मोहम्मद जसीम, नायब तहसीलदार विजय कुमार कटान स्थल पर पहुंचे। थोड़ी ही देर बाद एडीएम रमेश चंद्र, क्षेत्राधिकारी कलवारी अरविंद वर्मा व थानेदार कप्तानगंज व कलवारी भी टीम के साथ पहुंच गए। गांववालों को सुरक्षित स्थान पर जाने का एनाउंस करते रहे।

आसपास के गांवों में अफरा-तफरी
कटरिया-चांदपुर तटबंध कटने की सूचना पर चांदपुर गांव बसे 55 घरों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण अपने सामान को निकाल कर रामजानकी मार्ग की पटरी पर रखने लगे। बच्चों व बुजुर्गों तथा पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिए। प्रशासनिक अमले ने भी सरयू की तेज कटान देख कर लोगों से अपने-अपने घरों को खाली कर धर्मूपुर प्राथमिक विद्यालय पर पहुंचने को कहा। बगल के खलवा, दुबौलिया कस्बा, धर्मूपुर, खजांचीपुर, भिऊरा, मझियार आदि गांव में भी अफरा-तफरी मची रही।
क्षेत्र के स्कूल बंद किए गए
चांदपुर गांव के पास तटबंध कटने की सूचना पर क्षेत्र के राज पब्लिक स्कूल, विवेकानंद इंटर कॉलेज, आदर्श बाल शिक्षा निकेतन, ऐडी ऐकडमी धर्मूपुर, जय प्रभा इंटर कॉलेज, प्राथमिक विद्यालय चांदपुर आदि स्कूलों में छुट्टी कर दी गई।

भय से रोने लगीं महिलाएं-बच्चे
तटबंध कटने की सूचना पर हजारों की संख्या में ग्रामीण पहुंच गए। भीड़ से तटबंध के मरम्मत कार्य में बाधा आने लगी। भीड़ को रोकने के लिए सीओ कलवारी अरविंद वर्मा, दुबौलिया, कलवारी , कप्तानगंज की पुलिस को घंटों मशक्कत करती रही। बैरिकेडिंग कर ग्रामीणों को तटबंध पर जाने से रोका गया। वहीं, भगदड़ देखकर महिलाएं व बच्चे रोने लगे। हर तरफ चीख-पुकार मच गई। पालतू पशुओं को खोल दिया गया।

लाल निशान से 43 सेमी ऊपर बह रही सरयू
16 सेमी घटने के बाद भी कटान जारी
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। सरयू नदी का जलस्तर घटते ही कटान तेज हो गई है। अब भी जलस्तर खतरे के निशान 92.730 से 43 सेंटीमीटर ऊपर 93.160 पर है। बुधवार के जलस्तर 93.260 से 16 सेंटीमीटर घटोत्तरी दर्ज की गई है।

नदी एक बार फिर बढ़ने लगी है। इसके चलते शुक्रवार तक एक बार फिर जलस्तर बढ़ने की आशंका केंद्रीय जल आयोग ने व्यक्त किया है। जलस्तर घटने से विक्रमजोत ब्लॉक क्षेत्र में बांधविहीन गांवों में कटान शुरू हो गई है। केशवपुर गांव के पास नदी सीधे दबाव बना है। बाढ़ के चलते पहले से नम हुई जमीन तेजी से धारा में कट रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जबसे नदी का जलस्तर कम होना शुरू हुआ तब से नदी में लगभग एक एकड़ जमीन समा चुकी है। वहीं, भरथापुर गांव के पश्चिमी छोर पर नदी कटान करती हुई गांव से सट रही है। कल्यानपुर में केशवचन्द पाण्डेय के घर के बगल कटान होने से लोग सहम गए हैं। स्कूल भवन से नदी सट कर बह रही है। सहजौरा संदलपुर गांवों में कटान का क्रम चल रहा है। बाढ़ खंड द्वारा अभी तक किसी गांव में कटान को रोकने के कारगर उपाय नहीं किए गए। इससे काली माता मन्दिर नदी में समा गया। अब घरों और प्राथमिक विद्यालय सीतारामपुर की बारी है। विद्यालय ही सीतारामपुर गांव की मात्र एक निशानी बची है। राम चन्दर, शीतल प्रसाद, राज बहादुर, रामकुमार, सुशील यादव, मंगल, दयाराम, जगलाल, हेमन्त का कहना है कि गांव के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं पर शासन प्रशासन कुछ कर नहीं रहा है।

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