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इतिहास, अर्थशास्त्र और राजनीति शास्त्र का पाठ्यक्रम बदलें...
Updated Sun, 24 Dec 2017 12:18 AM IST
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बस्ती। भारत को यदि विश्व गुरु बनना है तो गुलामी का इतिहास बदलना होगा। पाठ्यक्रम में राणा प्रताप, भगत सिंह, वीर सावरकर को शामिल किया जाना चाहिए। मार्क्स और लेनिन की जगह कौटिल्य की राजनीति को राजनीति शास्त्र में शामिल किया जाना चाहिए। एडम स्मिथ की जगह पं. दीन दयाल के अंत्योदय के अर्थशास्त्र को पढ़ाए जाने की भी जरूरत है। यह मांगें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के गोरक्ष प्रांत के 57वें अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल मध्यप्रदेश, झारखंड के जनजाति प्रकोष्ठ के संगठन मंत्री प्रफुल्ल अकांत ने उठाई।
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज रामबाग में आयोजित अधिवेशन में प्रफुल्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। विश्व ग्लोबल वार्मिंग और चौथे विश्व युद्ध की संभावित वजह यानि जल संकट से निपटने के लिए भारत की ओर देख रहा है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद संगठन नहीं एक आंदोलन है। जो कभी भी राष्ट्रद्रोहियों को माफ कर चुप नहीं बैठ सकता। केरल में राष्ट्रवादियों की हत्या के विरोध में 40 हजार से अधिक परिषद के कार्यकर्ता त्रिवेंद्रम पहुंचे और विश्वविद्यालय में प्रतिबंधों के बाद भी तिरंगा फहराया। जहां राष्ट्र ध्वज फहराने के एवज में सामागगन रेड्डी को अपनी जान गंवानी पड़ी। कश्मीर के लाल चौक पर आजादी के जश्न में राष्ट्र विरोधी तत्वों ने संगठित होकर तिरंगा जलाया था। जिसका विरोध कर विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने प्राणों की बाजी लगा कर राष्ट्र ध्वज फहराया और ‘जहां हुआ तिरंगे का अपमान, वही करेंगे उसका सम्मान’ का नारा लगाया।
संबोधन से पहले मुख्य अतिथि के अलावा स्वागत समिति के अध्यक्ष सांसद जगदंबिका पाल, अनूप खरे, विद्यार्थी परिषद छात्र इकाई की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. उमा श्रीवास्तव, प्रांतीय अध्यक्ष राजशरण शाही, प्रांतीय मंत्री राकेश मौर्य ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित किए।
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सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि 1949 में जिस उद्देश्य से विद्यार्थी परिषद की यात्रा शुरू हुई, वही उद्देश्य आज भी है। डॉ. उमा ने कहा कि अच्छी शिक्षा, सुलभ शिक्षा तथा भारत के युवाओं में संस्कार भरने वाला संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद है।
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सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज रामबाग में आयोजित अधिवेशन में प्रफुल्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। विश्व ग्लोबल वार्मिंग और चौथे विश्व युद्ध की संभावित वजह यानि जल संकट से निपटने के लिए भारत की ओर देख रहा है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद संगठन नहीं एक आंदोलन है। जो कभी भी राष्ट्रद्रोहियों को माफ कर चुप नहीं बैठ सकता। केरल में राष्ट्रवादियों की हत्या के विरोध में 40 हजार से अधिक परिषद के कार्यकर्ता त्रिवेंद्रम पहुंचे और विश्वविद्यालय में प्रतिबंधों के बाद भी तिरंगा फहराया। जहां राष्ट्र ध्वज फहराने के एवज में सामागगन रेड्डी को अपनी जान गंवानी पड़ी। कश्मीर के लाल चौक पर आजादी के जश्न में राष्ट्र विरोधी तत्वों ने संगठित होकर तिरंगा जलाया था। जिसका विरोध कर विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने प्राणों की बाजी लगा कर राष्ट्र ध्वज फहराया और ‘जहां हुआ तिरंगे का अपमान, वही करेंगे उसका सम्मान’ का नारा लगाया।
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संबोधन से पहले मुख्य अतिथि के अलावा स्वागत समिति के अध्यक्ष सांसद जगदंबिका पाल, अनूप खरे, विद्यार्थी परिषद छात्र इकाई की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. उमा श्रीवास्तव, प्रांतीय अध्यक्ष राजशरण शाही, प्रांतीय मंत्री राकेश मौर्य ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित किए।
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सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि 1949 में जिस उद्देश्य से विद्यार्थी परिषद की यात्रा शुरू हुई, वही उद्देश्य आज भी है। डॉ. उमा ने कहा कि अच्छी शिक्षा, सुलभ शिक्षा तथा भारत के युवाओं में संस्कार भरने वाला संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद है।