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जटाशंकर पर सगे भाइयों ने चलाई थी गोली
Updated Wed, 27 Sep 2017 11:31 PM IST
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बस्ती। परशुरामपुर ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी के लिए अंदरखाने में चल रही नूराकुश्ती का फायदा उठाते हुए जटा शंकर सिंह पर दिन दहाड़े जानलेवा हमला किया गया। इस तरह से वह एक तीर से दो निशाना साधना चाहता था। नंबर एक यह कि घायल की हत्या के बाद एक तो उनके भीतर धधक रही प्रतिशोध की ज्वाला शांत होगी, दूसरे इसका इल्जाम भी उनके धुर राजनीतिक विरोधी त्रयंबक नाथ पाठक पर लगेगा, जो कुछ दिनों से अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुटे थे।
12 सितंबर को दोपहर हुई इस घटना की साजिश करने वाले परशुरामपुर थानाक्षेत्र के पड़री बाबू निवासी राजेश सिंह उनके भाई राजन सिंह और राजेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर पूछताछ की तो तीनों ने पूूरे घटनाक्रम का ब्योरा उगल दिया। एसपी संकल्प शर्मा ने हमले के कारण के बारे में बताया कि राजेश सिंह की जटाशंकर सिंह से सीधी दुश्मनी नहीं थी, बल्कि उसके परिवार को तरह-तरह से तंग कर रहे पट्टीदार की अंदरूनी मदद करने की वजह से खार खाए था।
पुलिस की पूछताछ में तीनों ने बताया कि पिछली सपा सरकार में जटाशंकर सिंह की खूब चलती थी। ऐसे में उन्होंने राजेश सिंह की जमीनों पर कब्जा कराया और कई फर्जी मुकदमे भी कायम कराया, ताकि उनका परिवार गर्त में चला जाए। सत्ताबल से जटाशंकर सिंह अपने खास को प्रमुख की कुर्सी पर काबिज कराने में कामयाब रहे। इस खींचतान में सपा खेमे के त्रयंबक नाथ पाठक के समर्थित उम्मीदवार को करारी शिकस्त मिली थी। इसी खींचतान का फायदा उठाते हुए राजेश सिंह अपने भाई राजन के साथ तमंचा लेकर सामने जा धमके और फायर झोंक दिया। संयोग ही रहा कि जटाशंकर की जांघ छीलते गोली निकल गई। घटना में प्रयुक्त बाइक, तमंचे बरामद किए गए हैं। एसपी ने एसओ परशुरामपुर रवि राय, एसआइ रामगति, राम मिलन पांडेय के अलावा धीरेंद्र राय, पंकज शाही नंदू प्रसाद को इस पर्दाफाश के लिए नकद पुरस्कार देने का एलान किया है।
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12 सितंबर को दोपहर हुई इस घटना की साजिश करने वाले परशुरामपुर थानाक्षेत्र के पड़री बाबू निवासी राजेश सिंह उनके भाई राजन सिंह और राजेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर पूछताछ की तो तीनों ने पूूरे घटनाक्रम का ब्योरा उगल दिया। एसपी संकल्प शर्मा ने हमले के कारण के बारे में बताया कि राजेश सिंह की जटाशंकर सिंह से सीधी दुश्मनी नहीं थी, बल्कि उसके परिवार को तरह-तरह से तंग कर रहे पट्टीदार की अंदरूनी मदद करने की वजह से खार खाए था।
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पुलिस की पूछताछ में तीनों ने बताया कि पिछली सपा सरकार में जटाशंकर सिंह की खूब चलती थी। ऐसे में उन्होंने राजेश सिंह की जमीनों पर कब्जा कराया और कई फर्जी मुकदमे भी कायम कराया, ताकि उनका परिवार गर्त में चला जाए। सत्ताबल से जटाशंकर सिंह अपने खास को प्रमुख की कुर्सी पर काबिज कराने में कामयाब रहे। इस खींचतान में सपा खेमे के त्रयंबक नाथ पाठक के समर्थित उम्मीदवार को करारी शिकस्त मिली थी। इसी खींचतान का फायदा उठाते हुए राजेश सिंह अपने भाई राजन के साथ तमंचा लेकर सामने जा धमके और फायर झोंक दिया। संयोग ही रहा कि जटाशंकर की जांघ छीलते गोली निकल गई। घटना में प्रयुक्त बाइक, तमंचे बरामद किए गए हैं। एसपी ने एसओ परशुरामपुर रवि राय, एसआइ रामगति, राम मिलन पांडेय के अलावा धीरेंद्र राय, पंकज शाही नंदू प्रसाद को इस पर्दाफाश के लिए नकद पुरस्कार देने का एलान किया है।
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