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खास खबर ई-नाम दूर करेगा अन्नदाता की दिक्कत
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खास खबर
ई-नाम दूर करेगा अन्नदाता की दिक्कत
ऑनलाइन मंडियों की साकार होगी परिकल्पना
बड़े व्यापारी गांव की मंडियों के लॉट की लगाएंगे बोली
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। यदि सब कुछ वादे के मुताबिक हुआ तो जल्द ही उपज की बिक्री को लेकर सांसत झेल रहे अन्नदाताओं को राहत मिल जाएगी। पहले से शुरू ऑनलाइन मंडी की परिकल्पन साकार करते हुए ई-नाम प्रणाली को सुदृढ़ बनाया जाएगा। इससे किसानों की निजी मंडियों और लाइसेंसी व्यापारियों के बीच व्यावहारिक समस्या दूर करते हुए प्रदेश सरकार के स्तर से सुविधा प्रदान की जाएगी।
जिले की1245 ग्राम पंचायतों में 90 फीसदी लोग किसी न किसी रूप में खेती से जुड़े हैं। इसमें मुख्यत: तीनों रबी खरीफ और जायद में मुख्य रूप से गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, सरसों, अलसी, लाही, आलू, तम्बाकू, खरीफ में चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, सावां, अरहर, मूंगफली, कपास, गन्ना और जायद में ककड़ी, खीरा, खरबूज, तरबूज, पलवल, लौकी, लोबिया आदि की खेती करते हैं। इनमें 60 प्रतिशत से ज्यादा किसानों की अर्थ व्यवस्था खेती पर टिकी है। उन्नतशील तकनीक और अन्य सुविधाओं के बल पर तमाम प्रगतिशील किसानों ने पैदावार में भी रिकॉर्ड कायम किया है। मगर विपणन की समस्या से उनके हौसले पस्त कर रहा है। सरकारी क्रय एजेंसियों की बेइमानी से इस बार भी किसान ठगा गया। एक चौथाई भी किसानों का धान अभी नहीं बिक पाया है। इस तरह की दिक्कत से ई-नाम प्रणाली निजात दिलाएगी। इसमें किसानों की आवक को जांच कर उसका लॉट नंबर जारी कर दिया जाता है। यह लॉट नंबर मंडी में लगी डिजिटल स्क्रीन पर डिस्प्ले किया जाता है। इससे मंडी में मौजूद व्यापारी और खरीददार बोली लगाते हैं। किसानों की आवक का मूल्य उसके ग्रेड ( ए, बी या सी) के आधार पर तय होता है, यानी की जितना अच्छा ग्रेड, उतनी अच्छी बोली।
किसान के घर पहुंचेगी मंडी
डीएम डॉ. राजशेखर का कहना है कि इस व्यवस्था के तहत लाइसेंसी व्यापारी एक लाइसेंस पर ही प्रदेश के किसी भी स्थान से खरीदारी कर सकेंगे। जबकि अभी तक मंडियों से ही सिर्फ खरीददारी संभव थी। ऐसा होने से किसानों के दरवाजे तक खुद बाजार पहुंचेगा, न कि उसे पैदावार बेचने के लिए चक्कर काटना पड़ेगा। इससे छोटे किसान ढुलाई और हैंडलिंग जैसे अन्य फालतू खर्चों से बच सकेंगे।
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ई-नाम दूर करेगा अन्नदाता की दिक्कत
ऑनलाइन मंडियों की साकार होगी परिकल्पना
बड़े व्यापारी गांव की मंडियों के लॉट की लगाएंगे बोली
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। यदि सब कुछ वादे के मुताबिक हुआ तो जल्द ही उपज की बिक्री को लेकर सांसत झेल रहे अन्नदाताओं को राहत मिल जाएगी। पहले से शुरू ऑनलाइन मंडी की परिकल्पन साकार करते हुए ई-नाम प्रणाली को सुदृढ़ बनाया जाएगा। इससे किसानों की निजी मंडियों और लाइसेंसी व्यापारियों के बीच व्यावहारिक समस्या दूर करते हुए प्रदेश सरकार के स्तर से सुविधा प्रदान की जाएगी।
जिले की1245 ग्राम पंचायतों में 90 फीसदी लोग किसी न किसी रूप में खेती से जुड़े हैं। इसमें मुख्यत: तीनों रबी खरीफ और जायद में मुख्य रूप से गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, सरसों, अलसी, लाही, आलू, तम्बाकू, खरीफ में चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, सावां, अरहर, मूंगफली, कपास, गन्ना और जायद में ककड़ी, खीरा, खरबूज, तरबूज, पलवल, लौकी, लोबिया आदि की खेती करते हैं। इनमें 60 प्रतिशत से ज्यादा किसानों की अर्थ व्यवस्था खेती पर टिकी है। उन्नतशील तकनीक और अन्य सुविधाओं के बल पर तमाम प्रगतिशील किसानों ने पैदावार में भी रिकॉर्ड कायम किया है। मगर विपणन की समस्या से उनके हौसले पस्त कर रहा है। सरकारी क्रय एजेंसियों की बेइमानी से इस बार भी किसान ठगा गया। एक चौथाई भी किसानों का धान अभी नहीं बिक पाया है। इस तरह की दिक्कत से ई-नाम प्रणाली निजात दिलाएगी। इसमें किसानों की आवक को जांच कर उसका लॉट नंबर जारी कर दिया जाता है। यह लॉट नंबर मंडी में लगी डिजिटल स्क्रीन पर डिस्प्ले किया जाता है। इससे मंडी में मौजूद व्यापारी और खरीददार बोली लगाते हैं। किसानों की आवक का मूल्य उसके ग्रेड ( ए, बी या सी) के आधार पर तय होता है, यानी की जितना अच्छा ग्रेड, उतनी अच्छी बोली।
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किसान के घर पहुंचेगी मंडी
डीएम डॉ. राजशेखर का कहना है कि इस व्यवस्था के तहत लाइसेंसी व्यापारी एक लाइसेंस पर ही प्रदेश के किसी भी स्थान से खरीदारी कर सकेंगे। जबकि अभी तक मंडियों से ही सिर्फ खरीददारी संभव थी। ऐसा होने से किसानों के दरवाजे तक खुद बाजार पहुंचेगा, न कि उसे पैदावार बेचने के लिए चक्कर काटना पड़ेगा। इससे छोटे किसान ढुलाई और हैंडलिंग जैसे अन्य फालतू खर्चों से बच सकेंगे।
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