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पती पीली,बाली सफेद देख अन्नदाता सन्न
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Sun, 23 Sep 2018 11:34 PM IST
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धान की रोगग्रस्त बालियों को दिखाता किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। अनुकूल मौसम, अच्छे बीज और संतुलित पोषक तत्व इस्तेमाल करने के बावजूद धान की फसल से रंगत गायब है। धान की बालियां निकलते ही सफेद हो जा रही हैं। पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। मिट्टी की जांच कराए बिना अंधाधुंध कीटनाशक और अ-संतुलित पोषक तत्व भी किसान फसल में डाल रहे हैं, लेकिन दाने अपेक्षाकृत कमजोर हैं। जिससे इस फसल का हश्र देख किसानों के चेहरे मुरझाए हैं। बहादुरपुर ब्लॉक के प्रतापपुर निवासी राम सुंदर तिवारी कहते हैं कि धान की पिछली तीन फसल कीट लगने से चौपट हो चुकी है। इस बार भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। महंगे कीटनाशकों का छिड़काव और मिट्टी के पूरक पोषक तत्व का इस्तेमाल करने के बावजूद फसल नहीं संभली। कृषि विशेषज्ञ डॉ. एसएन सिंह बताते रहे हैं कि धान में झोंका, भूरा धब्बा, शीथ ब्लाइट, आभासी कंड की समस्या प्रमुख है। इसके अलावा पत्ती लपेटक, धान का फूदका और गंधीबग कीटों से नुकसान हो रहा है।
खोखला कर रही बालियां
तना छेदक सूड़ी धान की कलिकाओं की पत्तियां छेद कर अंदर ही अंदर तने को खोखला कर गांठ तक चली जाती हैं। प्रकोप होने पर बालियां नहीं निकलती हैं। जो बाली निकली भी वेे सूखकर सफ़ेद हो जा रही हैं और उसमें दाने नहीं बनते हैं।
बचाव के उपाय
इसका उपाय यदि रोपाई के समय कर दिया जाए तो बचाव आसान हो जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पौधों के ऊपरी भाग की पत्तियों को थोड़ा सा काटकर रोपाई करने से इस कीट के अंडे नष्ट हो जाते हैं। बचाव के लिए धतूरा के पत्ते, नीम के पत्ती और तंबाकू को 20 लीटर पानी में उबालें यह पानी 4-5 लीटर रह जाए तो ठंडा कर 10 लीटर गौमूत्र में मिलाकर छिड़काव करें। जिंक सल्फेट और बुझे चूने का एक के सापेक्ष दो के अनुपात में प्रति नाली की दर से 15-20 ली पानी में घोलकर छिड़काव भी काफी कारगर होता है।
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खोखला कर रही बालियां
तना छेदक सूड़ी धान की कलिकाओं की पत्तियां छेद कर अंदर ही अंदर तने को खोखला कर गांठ तक चली जाती हैं। प्रकोप होने पर बालियां नहीं निकलती हैं। जो बाली निकली भी वेे सूखकर सफ़ेद हो जा रही हैं और उसमें दाने नहीं बनते हैं।
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बचाव के उपाय
इसका उपाय यदि रोपाई के समय कर दिया जाए तो बचाव आसान हो जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पौधों के ऊपरी भाग की पत्तियों को थोड़ा सा काटकर रोपाई करने से इस कीट के अंडे नष्ट हो जाते हैं। बचाव के लिए धतूरा के पत्ते, नीम के पत्ती और तंबाकू को 20 लीटर पानी में उबालें यह पानी 4-5 लीटर रह जाए तो ठंडा कर 10 लीटर गौमूत्र में मिलाकर छिड़काव करें। जिंक सल्फेट और बुझे चूने का एक के सापेक्ष दो के अनुपात में प्रति नाली की दर से 15-20 ली पानी में घोलकर छिड़काव भी काफी कारगर होता है।
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