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परिषदीय स्कूलों की द
Updated Tue, 12 Sep 2017 11:31 PM IST
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परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था हुई चौपट, जिम्मेदार खामोश
बस्ती। परिषदीय स्कूलों की दशा में कोई सुधार नहीं हो रहा है। इसकी जिम्मेदारी संभालने वाले शिक्षक से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी और बीएसए तक लापरवाह हो गए हैं। शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदार कितने असंवेदनशील है कि उन्हें इसकी जरा भी परवाह नहीं हैं। समय से स्कूल न जाना और बिना बताए स्कूल से गायब रहना मानों शिक्षक जन्म सिद्ध अधिकार मानने लगे हैं। जबकि सरकार शिक्षकों के वेतन के नाम पर हर साल 250 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रही है। शिक्षकों का अधिकतर समय में कम और धरना प्रदर्शन करने में अधिक बीतता है। चूंकि विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता इस लिए शिक्षक लापरवाह हो गए। खंड शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही सबसे अधिक सामने आ रही है। स्कूलों का निरीक्षण करने के बजाए निरीक्षण के बहाने शिक्षकों का शोषण करने में लगे रहते हैं। मंगलवार को जब अमर उजाला की टीम से स्कूलों का पड़ताल की तो सच सामने आया।
सल्टौआ प्रतिनिधि के मुताबिक इस क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में अभी तक बच्चों को पूरी पुस्तकें तक नहीं मिलीं, जैसे-तैसे बच्चे पढ़ रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय अमरौली शुमाली में 87 बच्चों को एक सहायक अध्यापक अंकुश कुमार साहू संभाले हुए मिले। एक अन्य शिक्षा मित्र नहीं आ रहे हैं। इसी परिसर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय भी संचालित है यहां कुल 60 बच्चे पंजीकृत हैं जिसमें से कुल 43 बच्चे उपस्थित थे। यहां इंचार्ज प्रधानाध्यापक मो. तारिक, सहायक अध्यापक के रूप में अरुणिमा चौधरी, आनंद कुमार की तैनाती है, इनके बारे में बताया कि आज ये बस्थानवा विद्यालय में गए हैं वहां के अध्यापक अवकाश पर हैं। परिसर में बनाया गए शौचालय में गंदगी का अंबार लगा है। महीनों से साफ-सफाई नहीं हुई है। बच्चों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। प्राथमिक विद्यालय शिवा में भी शौचालय की स्थिति बेहद खराब रही। परिसर में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है। जिसे पीने के लिए बच्चे मजबूर हैं। प्राथमिक विद्यालय चौरा में तैनात प्रधानाध्यापक के रूप में राम सरोज मौके पर नहीं मिले। शिक्षामित्र धर्मेन्द्र नहीं आए हैं। यह विद्यालय हमेशा सुर्खियों में रहा यहां वर्ष 200-0/9 में रहे भवन प्रभारी भवन निर्माण कराने में भारी वित्तीय अनियमितता में फंस चुके हैं। भवन अब भी अधूरा है। बच्चों को विद्यालय में बैठने तक की व्यवस्था ठीक से नही है। बीईओ विजय कुमार ओझा ने बताया किताबें आ गई हैं स्कूलों में पहुंचाई जा रही हैं।
वाल्टरगंज प्रतिनिधि के मुताबिक विकास क्षेत्र साऊॅघाट में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। एक तरफ जहां एक अकेली महिला अध्यापक पर 92 बच्चों की जिम्मेदारी है। वहीं 35 बच्चों पर चार अध्यापक लगाए गए हैं। प्राथमिक विद्यालय हथियागढ़ में प्रधानाध्यापिका किरण बाला अकेली पंजीकृत 92 बच्चों में 72 बच्चों को संभालती हुई देखी गई उन्होंने बताया कि उनके यहां तीन शिक्षामित्र अंजली वर्मा, कामता मिश्रा, तथा राधा शुक्ला हैं। लेकिन तीनों लोग दिल्ली धरने में गए हुए हैं। अकेली ही सभी बच्चों को संभाल पाना बड़ा ही मुश्किल हो रहा है। परिसर में गंदगी था उन्होंने बताया कि सफाई कर्मचारी आती है लेकिन आज नहीं आई है। शौचालय में ताला लटका हुआ था। पूर्व माध्यमिक विद्यालय हथियागढ़ में पंजीकृत मात्र 35 बच्चों में 28 बच्चे मौजूद रहे। प्रधानाध्यापक राजीव सिंह तथा सहायक अध्यापक इंदुमति कमला यादव, अनुपमा वर्मा मौजूद रहे। एमडीएम में चावल-दाल बच्चों को खिलाया जा रहा था कमरे में ही यहां पर पानी की टंकी रखी हुई थी बच्चे हैंडपंप पर ही पानी पीते हुए दिखाई दिए प्रधानाध्यापक ने बताया कि बिजली लगी हुई है लेकिन पोल से ही खराबी के कारण आपूर्ति नहीं हो पा रही है। अनेक जगह फर्श टूटी हुई थी।
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लेटलतीफी से आजिज अभिभावकों ने घेरा विद्यालय
कलवारी।
बहादुरपुर विकास खण्ड के प्राथमिक विद्यालय धोबहट को मंगलवार की सुबह अभिभावकों ने प्रधानाध्यापिका द्वारा देर से विद्यालय आने की शिकायत को लेकर घेर लिया। मंगलवार की सुबह दर्जनों अभिभावक विद्यालय पहुंचे तो यह देख दंग रह गये कि सवा आठ बजे तक वह नहीं आयी थीं। यह अलग बात है कि सरकार प्राथमिक विद्यालयों के पठन-पाठन को लेकर लगातार प्रयासरत है, और साढ़े सात बजे तक हर हाल में विद्यालय पहुंचने का निर्देश है।
प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार तमाम नए नियम कानून बना दिए हैं। बावजूद सके जिम्मेदार लापरवाह बने हुए हैं। समय से स्कूल न आने जाने की प्रवृत्ति के चलते बच्चों की संख्या में भी लगातार गिरावट हो रही है। उक्त विद्यालय में भी यही हाल है। प्रधानाध्यापिका अमरेशा यादव के गैर जिम्मेदाराना कार्यों के चलते बच्चों की संख्या 112 से घटकर 73 पर पहुंच गई है। बावजूद लेट लतीफी में कोई बदलाव नहीं आया है।
इन स्थितियों का संज्ञान लेकर मंगलवार की सुबह लगभग आठ बजे पहुंचे अभिभावक हीरालाल, राजेश यादव, प्रेमलता, चतुरा देवी, तारा, मुनक्का, अशरफा, शीला, राम लौट, राम दरश, राम बुझारत, मैना, रोशन, जोगेन्द्र, विजय कुमार, बसंत, राम बुझारत, सर्वजीत, राजेंद्र, अशोक, पूजन, राधेश्याम, रामजनक, गंगाराम, सुग्रीव, दिलीप कुमार, धर्मेंद्र, अनिल कुमार, रामराज, शिवकुमार, विश्राम ने स्कूल पर पहुंच गए। बताया कि बच्चों को सुबह विद्यालय जाने के लिए कहते हैं, मगर बच्चे कहते थे कि बहनजी लेट आती हैं तो हम जाकर क्या करेंगे? सुबह हम लोग विद्यालय पहुंचे तो बात सही निकली सवा आठ तक विद्यालय नहीं खुला था। बेसिक शिक्षा अधिकारी सत्येंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रधानाध्यापिका का लेट आने की शिकायत मिल रही है। जांच की जायेगी। सही पाया गया तो कठोर कार्रवाई होगी।
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बस्ती। परिषदीय स्कूलों की दशा में कोई सुधार नहीं हो रहा है। इसकी जिम्मेदारी संभालने वाले शिक्षक से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी और बीएसए तक लापरवाह हो गए हैं। शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदार कितने असंवेदनशील है कि उन्हें इसकी जरा भी परवाह नहीं हैं। समय से स्कूल न जाना और बिना बताए स्कूल से गायब रहना मानों शिक्षक जन्म सिद्ध अधिकार मानने लगे हैं। जबकि सरकार शिक्षकों के वेतन के नाम पर हर साल 250 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रही है। शिक्षकों का अधिकतर समय में कम और धरना प्रदर्शन करने में अधिक बीतता है। चूंकि विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता इस लिए शिक्षक लापरवाह हो गए। खंड शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही सबसे अधिक सामने आ रही है। स्कूलों का निरीक्षण करने के बजाए निरीक्षण के बहाने शिक्षकों का शोषण करने में लगे रहते हैं। मंगलवार को जब अमर उजाला की टीम से स्कूलों का पड़ताल की तो सच सामने आया।
सल्टौआ प्रतिनिधि के मुताबिक इस क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में अभी तक बच्चों को पूरी पुस्तकें तक नहीं मिलीं, जैसे-तैसे बच्चे पढ़ रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय अमरौली शुमाली में 87 बच्चों को एक सहायक अध्यापक अंकुश कुमार साहू संभाले हुए मिले। एक अन्य शिक्षा मित्र नहीं आ रहे हैं। इसी परिसर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय भी संचालित है यहां कुल 60 बच्चे पंजीकृत हैं जिसमें से कुल 43 बच्चे उपस्थित थे। यहां इंचार्ज प्रधानाध्यापक मो. तारिक, सहायक अध्यापक के रूप में अरुणिमा चौधरी, आनंद कुमार की तैनाती है, इनके बारे में बताया कि आज ये बस्थानवा विद्यालय में गए हैं वहां के अध्यापक अवकाश पर हैं। परिसर में बनाया गए शौचालय में गंदगी का अंबार लगा है। महीनों से साफ-सफाई नहीं हुई है। बच्चों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। प्राथमिक विद्यालय शिवा में भी शौचालय की स्थिति बेहद खराब रही। परिसर में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है। जिसे पीने के लिए बच्चे मजबूर हैं। प्राथमिक विद्यालय चौरा में तैनात प्रधानाध्यापक के रूप में राम सरोज मौके पर नहीं मिले। शिक्षामित्र धर्मेन्द्र नहीं आए हैं। यह विद्यालय हमेशा सुर्खियों में रहा यहां वर्ष 200-0/9 में रहे भवन प्रभारी भवन निर्माण कराने में भारी वित्तीय अनियमितता में फंस चुके हैं। भवन अब भी अधूरा है। बच्चों को विद्यालय में बैठने तक की व्यवस्था ठीक से नही है। बीईओ विजय कुमार ओझा ने बताया किताबें आ गई हैं स्कूलों में पहुंचाई जा रही हैं।
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वाल्टरगंज प्रतिनिधि के मुताबिक विकास क्षेत्र साऊॅघाट में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। एक तरफ जहां एक अकेली महिला अध्यापक पर 92 बच्चों की जिम्मेदारी है। वहीं 35 बच्चों पर चार अध्यापक लगाए गए हैं। प्राथमिक विद्यालय हथियागढ़ में प्रधानाध्यापिका किरण बाला अकेली पंजीकृत 92 बच्चों में 72 बच्चों को संभालती हुई देखी गई उन्होंने बताया कि उनके यहां तीन शिक्षामित्र अंजली वर्मा, कामता मिश्रा, तथा राधा शुक्ला हैं। लेकिन तीनों लोग दिल्ली धरने में गए हुए हैं। अकेली ही सभी बच्चों को संभाल पाना बड़ा ही मुश्किल हो रहा है। परिसर में गंदगी था उन्होंने बताया कि सफाई कर्मचारी आती है लेकिन आज नहीं आई है। शौचालय में ताला लटका हुआ था। पूर्व माध्यमिक विद्यालय हथियागढ़ में पंजीकृत मात्र 35 बच्चों में 28 बच्चे मौजूद रहे। प्रधानाध्यापक राजीव सिंह तथा सहायक अध्यापक इंदुमति कमला यादव, अनुपमा वर्मा मौजूद रहे। एमडीएम में चावल-दाल बच्चों को खिलाया जा रहा था कमरे में ही यहां पर पानी की टंकी रखी हुई थी बच्चे हैंडपंप पर ही पानी पीते हुए दिखाई दिए प्रधानाध्यापक ने बताया कि बिजली लगी हुई है लेकिन पोल से ही खराबी के कारण आपूर्ति नहीं हो पा रही है। अनेक जगह फर्श टूटी हुई थी।
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लेटलतीफी से आजिज अभिभावकों ने घेरा विद्यालय
कलवारी।
बहादुरपुर विकास खण्ड के प्राथमिक विद्यालय धोबहट को मंगलवार की सुबह अभिभावकों ने प्रधानाध्यापिका द्वारा देर से विद्यालय आने की शिकायत को लेकर घेर लिया। मंगलवार की सुबह दर्जनों अभिभावक विद्यालय पहुंचे तो यह देख दंग रह गये कि सवा आठ बजे तक वह नहीं आयी थीं। यह अलग बात है कि सरकार प्राथमिक विद्यालयों के पठन-पाठन को लेकर लगातार प्रयासरत है, और साढ़े सात बजे तक हर हाल में विद्यालय पहुंचने का निर्देश है।
प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार तमाम नए नियम कानून बना दिए हैं। बावजूद सके जिम्मेदार लापरवाह बने हुए हैं। समय से स्कूल न आने जाने की प्रवृत्ति के चलते बच्चों की संख्या में भी लगातार गिरावट हो रही है। उक्त विद्यालय में भी यही हाल है। प्रधानाध्यापिका अमरेशा यादव के गैर जिम्मेदाराना कार्यों के चलते बच्चों की संख्या 112 से घटकर 73 पर पहुंच गई है। बावजूद लेट लतीफी में कोई बदलाव नहीं आया है।
इन स्थितियों का संज्ञान लेकर मंगलवार की सुबह लगभग आठ बजे पहुंचे अभिभावक हीरालाल, राजेश यादव, प्रेमलता, चतुरा देवी, तारा, मुनक्का, अशरफा, शीला, राम लौट, राम दरश, राम बुझारत, मैना, रोशन, जोगेन्द्र, विजय कुमार, बसंत, राम बुझारत, सर्वजीत, राजेंद्र, अशोक, पूजन, राधेश्याम, रामजनक, गंगाराम, सुग्रीव, दिलीप कुमार, धर्मेंद्र, अनिल कुमार, रामराज, शिवकुमार, विश्राम ने स्कूल पर पहुंच गए। बताया कि बच्चों को सुबह विद्यालय जाने के लिए कहते हैं, मगर बच्चे कहते थे कि बहनजी लेट आती हैं तो हम जाकर क्या करेंगे? सुबह हम लोग विद्यालय पहुंचे तो बात सही निकली सवा आठ तक विद्यालय नहीं खुला था। बेसिक शिक्षा अधिकारी सत्येंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रधानाध्यापिका का लेट आने की शिकायत मिल रही है। जांच की जायेगी। सही पाया गया तो कठोर कार्रवाई होगी।