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भुईला डीह का रहस्य जानने पहुंची पुरातत्व टीम
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भुईला डीह के टीले पर जांच करती पुरातत्व विभाग की टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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बभनान। रहस्यों को समेटे भुईला डीह टीले पर शनिवार को राज्य पुरातत्व की टीम पहुंची। गोरखपुर इकाई के नरसिंह त्यागी की अगुवाई वाली टीम यहां से सिलबट्टे, ईट, बर्तन आदि अपने साथ ले गई। पुरातत्व अधिकारी ने बताया विधायक सीपी शुक्ला ने पत्र लिखकर पहल की थी।
गौर ब्लॉक के महुवाडाबर गांव स्थित यह टीला कई रहस्यों को समेटे है। शनिवार को क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी नरसिंह त्यागी ने बताया ईट व बर्तन के जो अवशेष मिले हैं वह 600 ईसा पूर्व से लेकर 1250 ई. तक के हैं। यहां मिले अवशेष मौर्य काल से मध्य काल के हैं। जिससे पता चलता है कि यहां 2600 वर्ष पहले कोई बड़ा नगर था। यहां खुदाई हुई तो इस क्षेत्र की प्रचीन संस्कृति व इतिहास का पता चल सकेगा। टीले को विभाग की ओर से संरक्षित करने के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। बिना खुदाई के इसके रहस्य के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है। बताया कि ऐसा ही टीला संतकबीरनगर के लहुरादेवरा में हैं। जहां खुदाई करने पर 10 हजार वर्ष पूर्व के अवशेष मिलें है। इस मौके श्याम बहादुर सिंह, केपी सिंह, नीतीश सिंह सहित तमाम लोग मौजूद थे।
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गौर ब्लॉक के महुवाडाबर गांव स्थित यह टीला कई रहस्यों को समेटे है। शनिवार को क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी नरसिंह त्यागी ने बताया ईट व बर्तन के जो अवशेष मिले हैं वह 600 ईसा पूर्व से लेकर 1250 ई. तक के हैं। यहां मिले अवशेष मौर्य काल से मध्य काल के हैं। जिससे पता चलता है कि यहां 2600 वर्ष पहले कोई बड़ा नगर था। यहां खुदाई हुई तो इस क्षेत्र की प्रचीन संस्कृति व इतिहास का पता चल सकेगा। टीले को विभाग की ओर से संरक्षित करने के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। बिना खुदाई के इसके रहस्य के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है। बताया कि ऐसा ही टीला संतकबीरनगर के लहुरादेवरा में हैं। जहां खुदाई करने पर 10 हजार वर्ष पूर्व के अवशेष मिलें है। इस मौके श्याम बहादुर सिंह, केपी सिंह, नीतीश सिंह सहित तमाम लोग मौजूद थे।
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