{"_id":"598ca2684f1c1bed128b470f","slug":"121502388840-basti-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘प्रत्येक परोपकार का कर्म यज्ञ है’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘प्रत्येक परोपकार का कर्म यज्ञ है’
Updated Thu, 10 Aug 2017 11:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती। आठ दिवसीय श्रावणी उपाकर्म एवं वेद प्रचार सप्ताह के तीसरे दिन कर्म के महत्व पर प्रकाश डाला गया। चैयाबारी में पं. प्रभात आर्य व आचार्य देवव्रत आर्य के सानिध्य में हुए कार्यक्रम के यजमान अशोक सिंह रहे।
आर्य समाज नई बाजार की ओर से हो रहे कार्यक्रम में कर्म पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक परोपकार का कर्म यज्ञ है। यजुर्वेद में धर्मनीति, समाजनीति, राजनीति, अर्थनीति, शिल्प कला-कौशल तथा मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त सभी कर्मों का वर्णन है। वहीं हरैया में शिव मन्दिर थाना खास में योग शिक्षक प्रशिक्षक शिविर में वैदिक प्रवक्ता आचार्य महावीर मुमुक्षु ने बताया निराकार को जानने समझने के लिए साकार का सहारा लेना पड़ता है। जैसे स्वाद को जानने के लिए हमें जीभ व खट्टे मीठे पदार्थों की आवश्यकता होती है वैसे ही निराकार परमात्मा को जानने के लिए आत्मायुक्त शरीर की आवश्यकता होती है। श्रावणी पर्व पर कहा कि वेद में किसी पंथ, मत या मजहब की उन्नति की बात नहीं है बल्कि मानव मात्र के कल्याण का रास्ता बताया गया है। वेद सार्वदेशिक, सार्वकालिक व सार्वजनिक है इसलिए वेद ईश्वरीय ज्ञान है। सायंकालीन सभा में वक्ताओं ने भजनोपदेश में लोगों को नकारात्मक जीवन को छोड़कर सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा दी।ओंकार आर्य, आदित्य आर्य, राजेन्द्र जायसवाल, दिलीप कसौधन, अनीता जायसवाल, बेबी जायसवाल, संध्या जायसवाल, उपेन्द्र शर्मा, घनश्याम आर्य, राधेश्याम आर्य, विजय कुमार देवव्रत आर्य सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
विज्ञापन
आर्य समाज नई बाजार की ओर से हो रहे कार्यक्रम में कर्म पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक परोपकार का कर्म यज्ञ है। यजुर्वेद में धर्मनीति, समाजनीति, राजनीति, अर्थनीति, शिल्प कला-कौशल तथा मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त सभी कर्मों का वर्णन है। वहीं हरैया में शिव मन्दिर थाना खास में योग शिक्षक प्रशिक्षक शिविर में वैदिक प्रवक्ता आचार्य महावीर मुमुक्षु ने बताया निराकार को जानने समझने के लिए साकार का सहारा लेना पड़ता है। जैसे स्वाद को जानने के लिए हमें जीभ व खट्टे मीठे पदार्थों की आवश्यकता होती है वैसे ही निराकार परमात्मा को जानने के लिए आत्मायुक्त शरीर की आवश्यकता होती है। श्रावणी पर्व पर कहा कि वेद में किसी पंथ, मत या मजहब की उन्नति की बात नहीं है बल्कि मानव मात्र के कल्याण का रास्ता बताया गया है। वेद सार्वदेशिक, सार्वकालिक व सार्वजनिक है इसलिए वेद ईश्वरीय ज्ञान है। सायंकालीन सभा में वक्ताओं ने भजनोपदेश में लोगों को नकारात्मक जीवन को छोड़कर सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा दी।ओंकार आर्य, आदित्य आर्य, राजेन्द्र जायसवाल, दिलीप कसौधन, अनीता जायसवाल, बेबी जायसवाल, संध्या जायसवाल, उपेन्द्र शर्मा, घनश्याम आर्य, राधेश्याम आर्य, विजय कुमार देवव्रत आर्य सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
विज्ञापन