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बाढ़ से हालत बिगड़े, स्कूल बंद
Updated Sat, 19 Aug 2017 11:33 PM IST
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बाढ़ से हालात बिगड़े, स्कूल बंद
बस्ती।
घाघरा में बाढ़ से हालात दिनोंदिन खराब हो रहे हैं। सरकारी और गैर सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। बाढ़ खंड के इंजीनियर कैंप कर रहे हैं। बाढ़ का पानी हाईवे तक पहुंच गया है। कटान को छोड़कर किसी प्रकार की जनहानि या पशुधन की हानि अभी तक नहीं है। डीआईओएस डॉ. बृजभूषण मौर्य ने विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के सभी हाईस्कूल और इंटर के कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। अगर कोई प्रधानाचार्य इस आदेश का पालन नहीं करेंगे तो उन पर कार्रवाई भी की जाएगी। जबकि बीएसए सत्येंद्र कुमार सिंह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र विक्रमजोत, कुदरहा और दुबौलिया ब्लॉक के सभी प्राइमरी और जूनियर स्कूल को 22 तक बंद रखने का निर्देश दिया है। बताया कि इन तीनों ब्लॉकों को छोड़कर वे सभी स्कूल खुले रहेंगे जो बाढ़ प्रभावित नहीं हैं।
विक्रमजोत प्रतिनिधि के मुताबिक घाघरा किनारे बसे 17 गांवों के चारों ओर पानी भर चुका है। इसमें निर्माणाधीन विक्रमजोत लोलपुर बांध से सटे केशवपुर, भदोई, सहजौरापाठक, कल्याणपुर, भरथापुर तो पहले से है ही अब वीडी बांध से सटे गांव पूरेचेतन, पिपरी, संग्राम, राजी डूही, पूरे सोन शम्भूपुर, भरथापुर खुर्द, काजीपुर, पाण्डेलकडी, अर्जुनपुर, पकडी, बेतावा, कन्हईपुर, बेताला, त्रिलोकपुर को प्रशासन ने मैरुंड घोषित कर दिया है। करीब 77 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। धान और गन्ने कि फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार को प्रशासनिक अमले के साथ पहुंचे डीएम ने भोजन समेत अन्य आवश्यक सामग्रियों को बांटने का निर्देश दिया।
कुदरहा प्रतिनिधि के मुताबिक कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण पानी ही पानी है। फसलें डूब गई हैं। पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी मुसीबत उनके चारे की है। वहीं, नौरहनी घाट स्थित शिव मंदिर भी नदी की धार से ध्वस्त हो गया है। टेंगरिहा राजा गांव के दोनों पुरवे को पानी ने चारों तरफ से घेर लिया है। यहां के लोग धीरे-धीरे अपना सामान सुरक्षित स्थानों और बंधे पर ले जा रहे हैं। शनिवार को क्षेत्रीय विधायक रवि सोनकर ने बाढ़ पीड़ितों से संपर्क कर उन्हें बंधे पर शरण लेने का आग्रह किया। फौरी तौर पर लाई, भूजा आदि उपलब्ध कराकर मदद की है।
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दुबौलिया प्रतिनिधि के मुुताबिक बाढ़ पीड़ितों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। अभी तक सहायता के नाम पर कुछ नहीं मिला है। अशोकपुर गांव के मजहनिया, सतहा, जेठू पुरवा, खेलाड़ी पुरवा, गोड़ियोना, बलुया सहित 14 पुरवा के करीब आठ हजार लोग बाढ़ से पीड़ित हैं। जो नाव के सहारे छह दिन से आ-जा रहे हैं। विशुनदास पुरवा के लोग कमर भर पानी से होकर घर पहुंच रहे हैं। सूबिका बाबू, देवरागंग बरार, खंचाजी पुरवा, खलवा व बानेपुर गांव चारों तरफ से पानी से घिरा है। बाढ़ पीड़ितों में गुस्सा है। वहीं, चांदपुर और पारा के पास नदी का कटान जारी है। उंजी सैफाबाद व चांदपुर, कटरिया बंधे के पास नदी कटान कर रही है। चांदपुर में एक और पारा में तीन स्पर बैठ गए। मजदूर बोरा में ईंट भरकर स्पर को मजबूत करने में लगे हैं।
हर्रैया के तीन गांव मैरुंड घोषित
बस्ती।
प्रशासन ने शनिवार को हर्रैया तहसील के ग्राम सहजरौरा, भरथापुर और कल्याणपुर को मैरुंड घोषित किया है। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में हर्रैया और सदर तहसील के 67 गांव को प्रभावित होना बताया गया। इससे 3950 जनसंख्या प्रभावित हैं। 1621 कृषि योग्य भूमि और 1621 हेक्टेअर बोई गई फसल सहित कुल 3050 हेक्टेअर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है।
राहत कार्य में 29 नावें लगाई गईं
बस्ती। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य के कई व्यवस्था की गई है। नौ बाढ़ चौकी स्थापित किए गए हैं, पांच राहत शिविर संचालित होने का दावा किया गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए 29 नाव लगान की बात कही गई है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक विक्रमजोत-घुसवा एवं काशीपुर-दुबौलिया तटबंध की स्थिति को सामान्य बताया गया है।
बाढ़ से होने वाले क्षतिपूर्ति को चाहिए 13 करोड़
बस्ती।
बाढ़ से होने वाले क्षति का आकलन कर लिया गया है। शासन की मांग पर आनन-फानन भेजे गए प्रारंभिक आकलन में 12.98 करोड़ की क्षति होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में 10 जनहानि और 30 पशुहानि का आकलन किया गया है। एडीएम भगवान शरण ने बताया कि शासन की मांग पर बाढ़ से होने वाली क्षति का प्रारंभिक आकलन भेज दिया गया है। बताया कि क्षतिपूर्ति के लिए जो आकलन किया गया है, उनमें 40 लाख 10 जनहानि होने पर, नौ लाख 30 पशुहानि पर, 35 लाख राहत शिविरों पर, दो लाख पशु शिविर, 25 सौ मकानों की क्षति होने पर एक करोड़ दो लाख, फसलों के नुकसान पर 10.10 करोड़, 50 सार्वजनिक के क्षति होने पर एक करोड़। इस तरह 12.98 करोड़ रुपये की क्षति का आकलन किया गया है।
भूखे रहे बाढ़ पीड़ित, नहीं पहुंचा भोजन
विक्रमजोत।
जिला प्रशासन ने सभी मैरुंड गांवों में पके-पकाये पैकेट बंद भोजन देने का निर्देश शुक्रवार शाम को ही दे दिया। लेकिन यह व्यवस्था शुरू में ही धराशायी हो गई। दो-ढाई सौ पैकेट भोजन लेकर सैकड़ों की भीड़ में लेखपाल और प्रधान पहुंचे। पैकेट कम पड़ने से भूख पीड़ितों को लौटना पड़ा। पशुओं के चारे के लिए भी प्रशासन की तरफ से कोई राहत मुहैया नहीं कराई गई है।
शुक्रवार शाम ही प्रशासनिक अमले के साथ पहुंचे डीएम अरविंद सिंह ने बाढ़ पीड़ितों को भोजन और पशुओं को तत्काल चारा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। शनिवार देर शाम तक श्रीप्रसाद्र सुमेसर, तिलकराम यादव, भगान्दू, महावीरे, विनोद सहित तमाम पीड़ित सरकारी भूसे कि राह देखते रहे लेकिन निराशा ही हाथ लगी। बाढ़ प्रभावित गांवों में पशु बीमार हो रहे हैं। घर-बार छोड़ चुके सहजौरा पाठक गांव के लोग बांध पर आ गए हैं। चारे के अभाव और गंदे पानी से जूझ रहे जानवरों में अचानक पेट फूलने और मुंह से झाग गिरने की बीमारी हो जा रही है। इससे मौत भी हो रही है। सहजौरा के पूर्व प्रधान हृदयराम यादव की भैंस दोपहर में बीमार हुई। नजदीकी पशु चिकित्सक को कई बार बुलाने गए तो फार्मासिस्ट आए लेकिन तब तक भैंस मर चुकी थी। इसकी सूचना पर पशुपालकों में दहशत बढ़ गई है। गांव के पुनीत यादव ने बताया कि इस तरह दो दर्जन गायों और भैंसों में संक्रमण हो चुका है। कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरापाठक के दो सौ परिवारों को दोनों समय पैकेटबंद भोजन देने की व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई है। शुक्रवार रात और शनिवार सुबह भी सभी को भोजन नहीं मिल सका। शनिवार 11 बजे खाने का डिब्बा मिला, जिसमें चार पूड़ी और थोड़ी सी आलू की सूखी सब्जी थी जो खाने भर की नहीं थी। डीएम के निर्देश के बावजूद चारे के संकट से जूझ रहे पालकों को भूसा दिलाने की व्यवस्था का अता-पता नहीं है। लोग लेखपाल और प्रधान पर आरोप लगाते रहे कि खाने का डिब्बा और पालीथिन को मुंहदेखी कर बांटा, शेष छुपा लिया गया। इसके बारे में एसडीएम और तहसीलदार ने तत्काल निरीक्षण कर ठीक करने आश्वासन दिया।
सीएमओ ने जायजा लिया
सीएमओ डॉ. जेबीएल कुशवाहा भी शनिवार को कल्याणपुर पहुंचे। यहां सीएचसी की टीम दवा वितरण कर रही थी। एंटी लार्वा का छिड़काव किया जाता मिला। सीएमओ ने घर में शौचालयों को देखा। बांटी जा रही दवाओं की भी जांच की। कैंप कर रहे स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी शुभकरन से पूछताछ की। प्रसूता महिला कुसुम को फल दूध ब्रेड दिलाया। जबकि एनएएम सुमन सिंह, आशा, सरिता, इन्द्रावती को ड्यूटी पर मुस्तैद रहने को कहा। कल्याणपुर निवासी जीतेन्द्र यादव, ललिता और अमन ने बताया कि उन्हें चार दिनों से बुखार है आज दवा मिली है। गांव में बुखार, सिर दर्द और पेट दर्द की शिकायतें बढ़ी हैं। संतुष्ट होने के बाद परशुरामपुर किसी जांच के लिए चल दिए।
हाईवे पार पहुंच रहा बाढ़ का पानी
विक्रमजोत।
घाघरा का जलस्तर शनिवार शाम 93.680 पर रहा जो कि खतरे के निशान से 94 सेमी ऊपर है। 17 गांव मैरुंड हैं जबकि 56 गांवों में बाढ़ के पानी से फसलों को क्षति पहुंची है। बाढ़ का पानी हाईवे पार कर खेतों में और निचले क्षेत्रों में फैल रहा है। बाढ़ से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
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घाघरा में बाढ़ से हालात दिनोंदिन खराब हो रहे हैं। सरकारी और गैर सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। बाढ़ खंड के इंजीनियर कैंप कर रहे हैं। बाढ़ का पानी हाईवे तक पहुंच गया है। कटान को छोड़कर किसी प्रकार की जनहानि या पशुधन की हानि अभी तक नहीं है। डीआईओएस डॉ. बृजभूषण मौर्य ने विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के सभी हाईस्कूल और इंटर के कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। अगर कोई प्रधानाचार्य इस आदेश का पालन नहीं करेंगे तो उन पर कार्रवाई भी की जाएगी। जबकि बीएसए सत्येंद्र कुमार सिंह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र विक्रमजोत, कुदरहा और दुबौलिया ब्लॉक के सभी प्राइमरी और जूनियर स्कूल को 22 तक बंद रखने का निर्देश दिया है। बताया कि इन तीनों ब्लॉकों को छोड़कर वे सभी स्कूल खुले रहेंगे जो बाढ़ प्रभावित नहीं हैं।
विक्रमजोत प्रतिनिधि के मुताबिक घाघरा किनारे बसे 17 गांवों के चारों ओर पानी भर चुका है। इसमें निर्माणाधीन विक्रमजोत लोलपुर बांध से सटे केशवपुर, भदोई, सहजौरापाठक, कल्याणपुर, भरथापुर तो पहले से है ही अब वीडी बांध से सटे गांव पूरेचेतन, पिपरी, संग्राम, राजी डूही, पूरे सोन शम्भूपुर, भरथापुर खुर्द, काजीपुर, पाण्डेलकडी, अर्जुनपुर, पकडी, बेतावा, कन्हईपुर, बेताला, त्रिलोकपुर को प्रशासन ने मैरुंड घोषित कर दिया है। करीब 77 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। धान और गन्ने कि फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार को प्रशासनिक अमले के साथ पहुंचे डीएम ने भोजन समेत अन्य आवश्यक सामग्रियों को बांटने का निर्देश दिया।
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कुदरहा प्रतिनिधि के मुताबिक कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण पानी ही पानी है। फसलें डूब गई हैं। पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी मुसीबत उनके चारे की है। वहीं, नौरहनी घाट स्थित शिव मंदिर भी नदी की धार से ध्वस्त हो गया है। टेंगरिहा राजा गांव के दोनों पुरवे को पानी ने चारों तरफ से घेर लिया है। यहां के लोग धीरे-धीरे अपना सामान सुरक्षित स्थानों और बंधे पर ले जा रहे हैं। शनिवार को क्षेत्रीय विधायक रवि सोनकर ने बाढ़ पीड़ितों से संपर्क कर उन्हें बंधे पर शरण लेने का आग्रह किया। फौरी तौर पर लाई, भूजा आदि उपलब्ध कराकर मदद की है।
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दुबौलिया प्रतिनिधि के मुुताबिक बाढ़ पीड़ितों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। अभी तक सहायता के नाम पर कुछ नहीं मिला है। अशोकपुर गांव के मजहनिया, सतहा, जेठू पुरवा, खेलाड़ी पुरवा, गोड़ियोना, बलुया सहित 14 पुरवा के करीब आठ हजार लोग बाढ़ से पीड़ित हैं। जो नाव के सहारे छह दिन से आ-जा रहे हैं। विशुनदास पुरवा के लोग कमर भर पानी से होकर घर पहुंच रहे हैं। सूबिका बाबू, देवरागंग बरार, खंचाजी पुरवा, खलवा व बानेपुर गांव चारों तरफ से पानी से घिरा है। बाढ़ पीड़ितों में गुस्सा है। वहीं, चांदपुर और पारा के पास नदी का कटान जारी है। उंजी सैफाबाद व चांदपुर, कटरिया बंधे के पास नदी कटान कर रही है। चांदपुर में एक और पारा में तीन स्पर बैठ गए। मजदूर बोरा में ईंट भरकर स्पर को मजबूत करने में लगे हैं।
हर्रैया के तीन गांव मैरुंड घोषित
बस्ती।
प्रशासन ने शनिवार को हर्रैया तहसील के ग्राम सहजरौरा, भरथापुर और कल्याणपुर को मैरुंड घोषित किया है। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में हर्रैया और सदर तहसील के 67 गांव को प्रभावित होना बताया गया। इससे 3950 जनसंख्या प्रभावित हैं। 1621 कृषि योग्य भूमि और 1621 हेक्टेअर बोई गई फसल सहित कुल 3050 हेक्टेअर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है।
राहत कार्य में 29 नावें लगाई गईं
बस्ती। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य के कई व्यवस्था की गई है। नौ बाढ़ चौकी स्थापित किए गए हैं, पांच राहत शिविर संचालित होने का दावा किया गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए 29 नाव लगान की बात कही गई है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक विक्रमजोत-घुसवा एवं काशीपुर-दुबौलिया तटबंध की स्थिति को सामान्य बताया गया है।
बाढ़ से होने वाले क्षतिपूर्ति को चाहिए 13 करोड़
बस्ती।
बाढ़ से होने वाले क्षति का आकलन कर लिया गया है। शासन की मांग पर आनन-फानन भेजे गए प्रारंभिक आकलन में 12.98 करोड़ की क्षति होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में 10 जनहानि और 30 पशुहानि का आकलन किया गया है। एडीएम भगवान शरण ने बताया कि शासन की मांग पर बाढ़ से होने वाली क्षति का प्रारंभिक आकलन भेज दिया गया है। बताया कि क्षतिपूर्ति के लिए जो आकलन किया गया है, उनमें 40 लाख 10 जनहानि होने पर, नौ लाख 30 पशुहानि पर, 35 लाख राहत शिविरों पर, दो लाख पशु शिविर, 25 सौ मकानों की क्षति होने पर एक करोड़ दो लाख, फसलों के नुकसान पर 10.10 करोड़, 50 सार्वजनिक के क्षति होने पर एक करोड़। इस तरह 12.98 करोड़ रुपये की क्षति का आकलन किया गया है।
भूखे रहे बाढ़ पीड़ित, नहीं पहुंचा भोजन
विक्रमजोत।
जिला प्रशासन ने सभी मैरुंड गांवों में पके-पकाये पैकेट बंद भोजन देने का निर्देश शुक्रवार शाम को ही दे दिया। लेकिन यह व्यवस्था शुरू में ही धराशायी हो गई। दो-ढाई सौ पैकेट भोजन लेकर सैकड़ों की भीड़ में लेखपाल और प्रधान पहुंचे। पैकेट कम पड़ने से भूख पीड़ितों को लौटना पड़ा। पशुओं के चारे के लिए भी प्रशासन की तरफ से कोई राहत मुहैया नहीं कराई गई है।
शुक्रवार शाम ही प्रशासनिक अमले के साथ पहुंचे डीएम अरविंद सिंह ने बाढ़ पीड़ितों को भोजन और पशुओं को तत्काल चारा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। शनिवार देर शाम तक श्रीप्रसाद्र सुमेसर, तिलकराम यादव, भगान्दू, महावीरे, विनोद सहित तमाम पीड़ित सरकारी भूसे कि राह देखते रहे लेकिन निराशा ही हाथ लगी। बाढ़ प्रभावित गांवों में पशु बीमार हो रहे हैं। घर-बार छोड़ चुके सहजौरा पाठक गांव के लोग बांध पर आ गए हैं। चारे के अभाव और गंदे पानी से जूझ रहे जानवरों में अचानक पेट फूलने और मुंह से झाग गिरने की बीमारी हो जा रही है। इससे मौत भी हो रही है। सहजौरा के पूर्व प्रधान हृदयराम यादव की भैंस दोपहर में बीमार हुई। नजदीकी पशु चिकित्सक को कई बार बुलाने गए तो फार्मासिस्ट आए लेकिन तब तक भैंस मर चुकी थी। इसकी सूचना पर पशुपालकों में दहशत बढ़ गई है। गांव के पुनीत यादव ने बताया कि इस तरह दो दर्जन गायों और भैंसों में संक्रमण हो चुका है। कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरापाठक के दो सौ परिवारों को दोनों समय पैकेटबंद भोजन देने की व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई है। शुक्रवार रात और शनिवार सुबह भी सभी को भोजन नहीं मिल सका। शनिवार 11 बजे खाने का डिब्बा मिला, जिसमें चार पूड़ी और थोड़ी सी आलू की सूखी सब्जी थी जो खाने भर की नहीं थी। डीएम के निर्देश के बावजूद चारे के संकट से जूझ रहे पालकों को भूसा दिलाने की व्यवस्था का अता-पता नहीं है। लोग लेखपाल और प्रधान पर आरोप लगाते रहे कि खाने का डिब्बा और पालीथिन को मुंहदेखी कर बांटा, शेष छुपा लिया गया। इसके बारे में एसडीएम और तहसीलदार ने तत्काल निरीक्षण कर ठीक करने आश्वासन दिया।
सीएमओ ने जायजा लिया
सीएमओ डॉ. जेबीएल कुशवाहा भी शनिवार को कल्याणपुर पहुंचे। यहां सीएचसी की टीम दवा वितरण कर रही थी। एंटी लार्वा का छिड़काव किया जाता मिला। सीएमओ ने घर में शौचालयों को देखा। बांटी जा रही दवाओं की भी जांच की। कैंप कर रहे स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी शुभकरन से पूछताछ की। प्रसूता महिला कुसुम को फल दूध ब्रेड दिलाया। जबकि एनएएम सुमन सिंह, आशा, सरिता, इन्द्रावती को ड्यूटी पर मुस्तैद रहने को कहा। कल्याणपुर निवासी जीतेन्द्र यादव, ललिता और अमन ने बताया कि उन्हें चार दिनों से बुखार है आज दवा मिली है। गांव में बुखार, सिर दर्द और पेट दर्द की शिकायतें बढ़ी हैं। संतुष्ट होने के बाद परशुरामपुर किसी जांच के लिए चल दिए।
हाईवे पार पहुंच रहा बाढ़ का पानी
विक्रमजोत।
घाघरा का जलस्तर शनिवार शाम 93.680 पर रहा जो कि खतरे के निशान से 94 सेमी ऊपर है। 17 गांव मैरुंड हैं जबकि 56 गांवों में बाढ़ के पानी से फसलों को क्षति पहुंची है। बाढ़ का पानी हाईवे पार कर खेतों में और निचले क्षेत्रों में फैल रहा है। बाढ़ से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।