{"_id":"59c400634f1c1bff6c8b45a7","slug":"101506017379-basti-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विदेशी तकनीक से विकसित होगी फलों की खेती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेशी तकनीक से विकसित होगी फलों की खेती
Updated Thu, 21 Sep 2017 11:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विदेशी तकनीक से विकसित होगी फलों की खेती
बस्ती।
पूर्वांचल की उर्वरा भूमि का उपयोग फलों की खेती के लिए होगा। इसकी पृष्ठभूमि तत्कालीन केंद्र सरकार ने 2013 में ही तैयार कर दी थी। केंद्र ने प्रदेश के बस्ती और कन्नौज को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में शामिल करते हुए बस्ती में फल तथा कन्नौज को सब्जी के लिए चुना था। अब यहां धरातल पर इसे उतारा जाना है। इसके लिए औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में तैयारी शुरू हो गई है। जिले में विदेेशी तकनीक से फलों की खेती को विकसित किया जाएगा।
वर्ष 2013 में की गई पहल के तहत 7.40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इस धन से हाईटेक नर्सरी, पॉली हाउस, नेट हाउस, माइक्रो इरिगेशन सिस्टम व किसानों के प्रशिक्षण सहित नई तकनीक का प्रदर्शन आदि चल रहा है। मार्च तक ये सारे कार्य पूरे हो जाएंगे। इसके बाद जिले के चिह्नित बागों को वैज्ञानिक तकनीक से बागवानी के लिए तैयार किया जाएगा। इसके लिए दिसंबर-जनवरी में इस्राइल से कृषि वैज्ञानिकों की टीम को बुलाया गया है। ये अपनी देखरेख में बागों का जीर्णोद्धार कराने के अलावा नई तकनीक का प्रशिक्षण किसानों को देंगे। इस योजना के फलीभूत होने के बाद पपीता, अमरूद, सब्जियाें के गुणवत्तायुक्त पौधे तैयार किए जाएंगे। साथ ही किसानों को भी उपलब्ध करा दिए जाएंगे। यही नहीं, किसानों के लिए यह भी मौका रहेगा कि वह अपने बीज को केंद्र पर उपलब्ध करा कर गुणवत्तायुक्त पौधे ले सकेगा। इसके बदले केंद्र उनसे शुल्क लेगा।
केंद्र के संयुक्त निदेशक डॉ. आरके तोमर ने बताया कि फलों के राजा आम के बागीचे यहां बहुत हैं। इन्हें सुसज्जित करने के लिए इस्राइली तकनीक अपनाई जाएगी। क्योंकि वहां के किसान आम के एक पेड़ से कई क्विंटल फल प्राप्त करते हैं। इस तकनीक का विकास यहां भी किया जाएगा। ताकि फल के क्षेत्र में पूर्वांचल अग्रणी हो जाए। कहा कि इस्राइल से कृषि वैज्ञानिकों की टीम बुलाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र भेजा जा चुका है। दिसंबर और जनवरी के मध्य में यह वैज्ञानिक यहां का भ्रमण करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती।
पूर्वांचल की उर्वरा भूमि का उपयोग फलों की खेती के लिए होगा। इसकी पृष्ठभूमि तत्कालीन केंद्र सरकार ने 2013 में ही तैयार कर दी थी। केंद्र ने प्रदेश के बस्ती और कन्नौज को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में शामिल करते हुए बस्ती में फल तथा कन्नौज को सब्जी के लिए चुना था। अब यहां धरातल पर इसे उतारा जाना है। इसके लिए औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में तैयारी शुरू हो गई है। जिले में विदेेशी तकनीक से फलों की खेती को विकसित किया जाएगा।
वर्ष 2013 में की गई पहल के तहत 7.40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इस धन से हाईटेक नर्सरी, पॉली हाउस, नेट हाउस, माइक्रो इरिगेशन सिस्टम व किसानों के प्रशिक्षण सहित नई तकनीक का प्रदर्शन आदि चल रहा है। मार्च तक ये सारे कार्य पूरे हो जाएंगे। इसके बाद जिले के चिह्नित बागों को वैज्ञानिक तकनीक से बागवानी के लिए तैयार किया जाएगा। इसके लिए दिसंबर-जनवरी में इस्राइल से कृषि वैज्ञानिकों की टीम को बुलाया गया है। ये अपनी देखरेख में बागों का जीर्णोद्धार कराने के अलावा नई तकनीक का प्रशिक्षण किसानों को देंगे। इस योजना के फलीभूत होने के बाद पपीता, अमरूद, सब्जियाें के गुणवत्तायुक्त पौधे तैयार किए जाएंगे। साथ ही किसानों को भी उपलब्ध करा दिए जाएंगे। यही नहीं, किसानों के लिए यह भी मौका रहेगा कि वह अपने बीज को केंद्र पर उपलब्ध करा कर गुणवत्तायुक्त पौधे ले सकेगा। इसके बदले केंद्र उनसे शुल्क लेगा।
विज्ञापन
केंद्र के संयुक्त निदेशक डॉ. आरके तोमर ने बताया कि फलों के राजा आम के बागीचे यहां बहुत हैं। इन्हें सुसज्जित करने के लिए इस्राइली तकनीक अपनाई जाएगी। क्योंकि वहां के किसान आम के एक पेड़ से कई क्विंटल फल प्राप्त करते हैं। इस तकनीक का विकास यहां भी किया जाएगा। ताकि फल के क्षेत्र में पूर्वांचल अग्रणी हो जाए। कहा कि इस्राइल से कृषि वैज्ञानिकों की टीम बुलाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र भेजा जा चुका है। दिसंबर और जनवरी के मध्य में यह वैज्ञानिक यहां का भ्रमण करेंगे।
विज्ञापन