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32 लाख के छपाई के मामले में फंसे बीएसए
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:23 PM IST
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32 लाख की छपाई में फंसे बीएसए
बस्ती।
बिना टेंडर कराए 32 लाख रुपये की छपाई के मामले में बीएसए की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। चार माह के बाद भी बीएसए ने एडी बेसिक को छपाई से संबधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए। इस बीच उनका तबादला भी हो गया। कमिश्नर के आदेश पर इस घोटाले की जांच कर रहे एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी ने कहा कि अभिलेख देने के लिए बीएसए को अंतिम नोटिस भेजा गया है, उसके बाद आरोप पत्र दिया जाएगा।
2386 परिषदीय स्कूलों के दो लाख 48 हजार 890 बच्चों को छात्र प्रोफाइल और रिपोर्ट कार्ड की छपाई के लिए सर्व शिक्षा अभियान से 32 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए। नियमानुसार इतने बड़े काम के लिए ई-टेंडरिग होनी चाहिए मगर बीएसए ने नियम, कानून तोड़कर छपाई का ऑर्डर गाजीपुर की किसी पंचायत को दी। जबकि वही पंचायत बस्ती में भी संचालित हो रही है। मगर इसे छपाई का कार्य न देकर अपने चहेते को दे दिया। इतना ही नहीं छपाई से पहले जो नमूने दिए गए, उसमें भी हेराफेरी की गई। गुणवत्ता खराब दी गई। आरोप लगाया गया कि छपाई का ऑर्डर तो गाजीपुर की पंचायत को दिया गया और भुगतान भी पंचायत उद्योग के नाम किया गया मगर उसकी छपाई बस्ती में कराई। इतना ही नहीं जो भुगतान किया गया वह कंप्यूटर से निकाले गए बिल पर किया गया। जबकि पंचायत उद्योग के बिल पर होना चाहिए। चर्चा है कि इस खेल में सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े अन्य की भूमिका भी है। जब इसकी शिकायत कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह से की गई तो उन्होंने 23 मार्च 2017 को एडी बेसिक को जांच करने का आदेश दिया। एडी बेसिक का कहना है कि अभिलेख के लिए पिछले चार माह से बीएसए को लिखा जा रहा है मगर उपलब्ध नहीं कराया गया। बताया कि अभिलेख उपलब्ध न कराने के पीछे गोलमाल की पोल खुलने का डर है। बताया कि इसके बाद सीधे आरोप पत्र जारी कर दिया जाएगा।
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बस्ती।
बिना टेंडर कराए 32 लाख रुपये की छपाई के मामले में बीएसए की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। चार माह के बाद भी बीएसए ने एडी बेसिक को छपाई से संबधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए। इस बीच उनका तबादला भी हो गया। कमिश्नर के आदेश पर इस घोटाले की जांच कर रहे एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी ने कहा कि अभिलेख देने के लिए बीएसए को अंतिम नोटिस भेजा गया है, उसके बाद आरोप पत्र दिया जाएगा।
2386 परिषदीय स्कूलों के दो लाख 48 हजार 890 बच्चों को छात्र प्रोफाइल और रिपोर्ट कार्ड की छपाई के लिए सर्व शिक्षा अभियान से 32 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए। नियमानुसार इतने बड़े काम के लिए ई-टेंडरिग होनी चाहिए मगर बीएसए ने नियम, कानून तोड़कर छपाई का ऑर्डर गाजीपुर की किसी पंचायत को दी। जबकि वही पंचायत बस्ती में भी संचालित हो रही है। मगर इसे छपाई का कार्य न देकर अपने चहेते को दे दिया। इतना ही नहीं छपाई से पहले जो नमूने दिए गए, उसमें भी हेराफेरी की गई। गुणवत्ता खराब दी गई। आरोप लगाया गया कि छपाई का ऑर्डर तो गाजीपुर की पंचायत को दिया गया और भुगतान भी पंचायत उद्योग के नाम किया गया मगर उसकी छपाई बस्ती में कराई। इतना ही नहीं जो भुगतान किया गया वह कंप्यूटर से निकाले गए बिल पर किया गया। जबकि पंचायत उद्योग के बिल पर होना चाहिए। चर्चा है कि इस खेल में सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े अन्य की भूमिका भी है। जब इसकी शिकायत कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह से की गई तो उन्होंने 23 मार्च 2017 को एडी बेसिक को जांच करने का आदेश दिया। एडी बेसिक का कहना है कि अभिलेख के लिए पिछले चार माह से बीएसए को लिखा जा रहा है मगर उपलब्ध नहीं कराया गया। बताया कि अभिलेख उपलब्ध न कराने के पीछे गोलमाल की पोल खुलने का डर है। बताया कि इसके बाद सीधे आरोप पत्र जारी कर दिया जाएगा।
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