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सड़क हादसे में युवक की मौत, अस्पताल में बंधक बनाया शव

Tue, 20 Jul 2021 12:40 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 12:40 AM IST
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Youth dies in road accident, dead body held hostage in hospital
अस्पताल के बाहर लगी लोगों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

मिनी बाईपास के अस्पताल का मामला, परिजन ने चंदा करके छुड़ाया शव

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सीबीगंज। परसाखेड़ा में सड़क हादसे में घायल हुए मथुरापुर निवासी 40 वर्षीय आजम शाह की सोमवार तड़के मिनी बाईपास के सत्या अस्पताल में मौत हो गई। इस बीच अस्पताल वालों ने 33 हजार रुपये का बिल बना दिया और भुगतान न होने पर शव देने से इनकार कर दिया। दोपहर बाद परिजन ने अस्पताल को लिखकर दिया कि वे रुपये दे देंगे, तब उन्हें शव दिया गया।
आजम शाह रविवार रात करीब आठ बजे पैदल ही फतेहगंज पश्चिमी के गांव माधवपुर स्थित अपनी ससुराल जा रहे थे। इसी दौरान परसाखेड़ा जीरो प्वाइंट के पास किसी वाहन ने उन्हें टक्कर मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। सूचना पर पहुंचे परसाखेड़ा चौकी इंचार्ज देवेंद्र सिंह ने एक वाहन से मिनी बाईपास पर सत्या अस्पताल में भर्ती कराया। उनके पैर में फ्रैक्चर होने के साथ ही सिर में भी चोट लगी थी। उपचार के दौरान रात करीब तीन बजे आजम की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल की ओर से उनके परिवार वालों को हादसा और मौत होने की सूचना दी गई। साथ ही अस्पताल के बिल के 33 हजार रुपये जमा करके शव ले जाने को कहा।
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सूचना पर आजम के भाई बबलू समेत अन्य परिवार वाले अस्पताल पहुंचे। बबलू ने अस्पताल प्रबंधन से कहा कि वे सभी लोग मजदूरी करके अपना पेट भरते हैं और इतने रुपये जमा कर पाने में असमर्थ हैं। आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन पूरे 33 हजार रुपये लेने की जिद पर पड़ा रहा। बात होते-होते से सुबह से दोपहर हो गई तब जाकर अस्पताल वाले बमुश्किल 17 हजार रुपये लेने को तैयार हुए। बबलू का आरोप है कि उन लोगों के पास इतने रुपये भी नहीं थे तो उन्होंने अपने परिचितों से चंदा करके रुपये इकट्ठे किए। इसके बाद शाम करीब पांच बजे अस्पताल वालों ने आजम का शव उन्हें सौंपा। आजम के परिवार में उसकी पत्नी गुड़िया उर्फ आसमां और दो बेटियां फुरकान व मुस्कान हैं। मगर रात में अस्पताल प्रबंधन ने कोई भुगतान न मिलने की बात कही तो बबलू इस पर चुप्पी साध गए।
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आजम के शरीर में कई जगह चोटें थीं, पैर भी कुचला हुआ था। करीब चार घंटे उसका ऑपरेशन चला। अस्पताल ने उसे खून भी अपने पास से ही लगाया। उनके परिवार ने अस्पताल में दवा या इलाज का कोई भी रुपया जमा नहीं किया है। शव बंधक बनाने का आरोप भी गलत है। - डॉ. आरके सिंह, एमडी सत्या अस्पताल

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