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Bareilly News: फेल होने पर छोटी बहन ने चिढ़ाया तो छात्रा ने पी लिया कीटनाशक, अस्पताल में भर्ती

Tue, 14 May 2024 07:57 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 14 May 2024 07:57 AM IST
सार

बरेली में एक छात्रा ने जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया गया है कि हाईस्कूल में फेल होने पर छोटी बहन के चिढ़ाने पर बड़ी बहन ने मां से शिकायत की थी। मां ने उल्टा उसे ही डांट दिया, जिससे छात्रा ने घर में रखा जहरीला पदार्थ खा लिया।

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younger sister teased her for failing in highschool elder consumed poisonous substance in bareilly
अस्पताल में छात्रा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छोटी-छोटी बातों पर बच्चे नाराज होकर खतरनाक कदम उठा लेते हैं। बरेली के प्रेमनगर क्षेत्र निवासी छात्रा ने छोटी बहन के चिढ़ाने और मां के डांटने से आहत होकर कीटनाशक पी लिया। हालत बिगड़ने पर घरवालों को हकीकत पता चली। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब उसकी हालत में सुधार है।

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प्रेमनगर के एक मोहल्ले की रहने वाली 17 वर्षीय किशोरी ने यूपी बोर्ड से 10वीं की परीक्षा दी थी। इसमें वह फेल हो गई थी। तब से वह काफी उदास रहती थी। रविवार रात छोटी बहन से उसका किसी बात पर झगड़ा हो गया। तब छोटी बहन हाईस्कूल में फेल होने का ताना देते हुए उसे चिढ़ाने लगी। 
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छात्रा ने इसकी शिकायत मां से की। छात्रा के मुताबिक मां ने उल्टा उसी को डांट दिया। इससे नाराज छात्रा ने घर में रखी मच्छर मारने वाली दवा पी ली। इससे उसकी हालत बिगड़ने लगी। एंबुलेंस की मदद से उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां उसका उपचार चल रहा है।

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असफलता से न घबराएं- एसएसपी
एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने बताया कि जब मैंने हाईस्कूल किया तो महाराष्ट्र बोर्ड की टॉप-50 सूची में मेरा नाम शामिल था। जब इंटरमीडिएट किया तो उन दिनों महाराष्ट्र सरकार ने सूची ही जारी करना बंद कर दी थी। इसकी वजह यह थी कि तब इस सूची में नाम आने से वंचित रहे कई टॉपर्स ने आत्महत्या जैसी कोशिशें की थीं। कई बार मेधावियों में भी सम्मान को लेकर प्रतिस्पर्धा बन जाती है। किसी मामले में एक या ज्यादा बार असफल होना या पीछे रहने पर घबराना नहीं चाहिए। इतिहास गवाह है कि किशोरावस्था में असफल रहे लोगों ने भी सकारात्मक बदलाव कर कार्यक्षेत्र में कीर्तिमान रचे हैं।

दबाव में हैं अभिभावक और बच्चे
मनोविज्ञानी डॉ. हेमा खन्ना ने बताया कि कई बच्चे पढ़ाई को लेकर ज्यादा गंभीर होते हैं। निराशाजनक नतीजे आने पर वे टूट जाते हैं। ऐसे में उपेक्षा या कटाक्ष होने पर बच्चे इस तरह के कदम उठा लेते हैं। दरअसल, प्रतिस्पर्धा के दौर में बच्चों पर अच्छे प्रदर्शन का दबाव रहता है। वहीं, अभिभावकों पर भी दबाव रहता है कि उनके बच्चे आसपास के बच्चों से बेहतर अंक लाएं। खराब अंक लाने या फेल होने पर अभिभावकों का भावनात्मक सहारा मिलना बेहद जरूरी है। शिक्षकों व सहपाठियों को भी चाहिए कि वह इस तरह के विद्यार्थियों पर कटाक्ष करने की बजाय उन्हें दोबारा बेहतर प्रयास करने के लिए प्रेरित करें। 

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