{"_id":"624c4515adef0306663a7e7f","slug":"worship-of-kushmanda-the-mother-who-gave-birth-to-the-universe-bareilly-news-bly480403440","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्रह्मांड को जन्म देने वाली देवी मां कुष्मांडा का हुआ पूजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्रह्मांड को जन्म देने वाली देवी मां कुष्मांडा का हुआ पूजन
विज्ञापन
शाहजहांपुर में नवरात्रि के चौथे दिन श्रीबाबा विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु । सं
- फोटो : SHAHJAHANPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहजहांपुर। वासंतिक नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को घरों और मंदिरों में मां कुष्मांडा की आराधना की गई। पुराणों के अनुसार जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी, उस समय चारों तरफ अंधकार था। तब कुष्मांडा मां ने ब्रह्मांड को जन्म दिया। देवी मां कष्ट, रोग, शोक, संतापों का नाश करती हैं।
मंगलवार सुबह को जल्दी उठकर देवी भक्तों ने जहां स्तवन किया, तो दुर्गा चालीसा और सप्तशती का पाठ भी हुआ। देवी के छंद गाए गए। मंदिरों में देवी दर्शन के लिए भक्त पहुंचे। चौक मंडी स्थित दुर्गा माता मंदिर के पुजारी अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि मां कुष्मांडा को नवरात्रि के चतुर्थ दिवस देवी शक्ति के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है।
पुराणों के अनुसार जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय चारों तरफ अंधकार था, तब देवी के इस स्वरूप द्वारा ब्रह्मांड का जन्म हुआ। देवी कुष्मांडा अष्टभुजा धारी हैं, इसलिए इन्हें देवी अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है। ये भक्तों के कष्ट रोग, शोक संतापों का नाश करती हैं। मंदिर में सुबह व शाम को मां कुष्मांडा की आरती की गई। इसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंगलवार सुबह को जल्दी उठकर देवी भक्तों ने जहां स्तवन किया, तो दुर्गा चालीसा और सप्तशती का पाठ भी हुआ। देवी के छंद गाए गए। मंदिरों में देवी दर्शन के लिए भक्त पहुंचे। चौक मंडी स्थित दुर्गा माता मंदिर के पुजारी अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि मां कुष्मांडा को नवरात्रि के चतुर्थ दिवस देवी शक्ति के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है।
विज्ञापन
पुराणों के अनुसार जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय चारों तरफ अंधकार था, तब देवी के इस स्वरूप द्वारा ब्रह्मांड का जन्म हुआ। देवी कुष्मांडा अष्टभुजा धारी हैं, इसलिए इन्हें देवी अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है। ये भक्तों के कष्ट रोग, शोक संतापों का नाश करती हैं। मंदिर में सुबह व शाम को मां कुष्मांडा की आरती की गई। इसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया।
विज्ञापन