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केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान में 90 फीसदी फाइलों पर काम हिंदी में
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हिंदी हैं हम
- फोटो : Amar Ujala
वैज्ञानिकों के लिए हिंदी में शोधपत्र की प्रतियोगिताएं कराने के साथ ही कराई जाती हैं अन्य गतिविधियां
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बरेली। केंद्रीय पशु चिकित्सा अनुंसधान संस्थान (सीएआरआई) में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए तमाम महत्वपूर्ण गतिविधियां हो रही हैं। वैज्ञानिकों की हिंदी में कई प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं तो फाइलों में 90 फीसदी काम हिंदी में किया जाता है। इसके अलावा कंप्यूटर में भी हिंदी में काम शुरू करने की कवायद जारी है।
हिंदी में काम करने के लिए कंप्यूटर पर सक्रिय हैं हिंदी फांट: डॉ. संजीव
केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. संजीव कुमार का कहना है कि राजभाषा हिंदी का प्रयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। सरकार के राजभाषा विभाग और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निर्देशानुसार संस्थान में प्रत्येक तिमाही राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठकों का आयोजन किया जाता है। इसमें पिछली तिमाही की राजभाषा प्रयोग संबंधी प्रगति रिपोर्ट के बारे में सभी को बताया जाता है। कर्मचारियों को हिंदी में काम करने की झिझक को दूर करने एवं हिंदी में काम करने के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए वर्ष में चार हिंदी कार्यशालाएं भी आयोजित की जाती हैं। राजभाषा प्रयोग संबंधी तिमाही प्रगति रिपोर्ट परिषद मुख्यालय, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति तथा राजभाषा विभाग को ऑनलाइन भेजी जाती है। संस्थान में 90 प्रतिशत से अधिक फाइलों पर टिप्पणी लेखन का कार्य हिंदी में किया जाता है। सभी कंप्यूटरों में हिंदी यूनीकोड सक्रिय है, जिससे उन पर सुगमतापूर्वक हिंदी में काम किया जा रहा है। सभी नाम-पट्ट और रबर की मोहरों को द्विभाषी रूप (हिंदी-अंग्रेजी) में बनवा दिया गया है। मूल रूप से हिंदी में काम करने वाले कर्मचारियों को नकद पुरस्कार प्रदान करने के लिए प्रोत्साहन योजना लागू की जाती है। संस्थान में हिंदी प्रयोग के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए प्रति वर्ष हिंदी सप्ताह/हिंदी पखवाड़ा का आयोजन किया जाता है, जिसमें हिंदी में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं भी होती हैं। विज्ञान के क्षेत्र में हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिकों के लिए हिंदी में शोध-पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।
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130 करोड़ भारतीयों के दिल की धड़कन है हिंदी: यथार्थ
बरेली कॉलेज में बीए तृतीय वर्ष के छात्र यथार्थ आनंद का कहना है कि कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी। हमारा देश सैकड़ों बोलियों और भाषाओं वाला देश है। देश में हिंदी का स्थान सदैव से ही ऊंचा रहा है। वर्तमान परिवेश में हम छात्रों के जीवन में अंग्रेजी भाषा का चलन बढ़ता ही जा रहा है, किंतु हिंदी का दर्जा अन्य कोई भाषा नहीं ले सकती। हिंदी हमारे रोम-रोम में बसती है और यह हमारी जिंदगी से बंधी हुई है। किसी भी भाषा की ताकत उसके उपयोग से तय होती है तो हम सभी 130 करोड़ भारतीय हिंदी भाषा का सम्मान करें। इसे ज्यादा से ज्यादा उपयोग में लाएं। हम सभी गर्व से कहें.. हिंदी हैं हम।
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