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काम आई एहतियात.. पहले ही दिन जांच में सात यात्री मिले संक्रमित
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टोल प्लाजा पर कोरोना की जांच कराते लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
फतेहगंज पश्चिमी में टोल प्लाजा पर लगाया कैंप, अब रोज सुबह नौ से रात नौ बजे तक दो शिफ्टों में टीमें लेंगी सैंपल
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बरेली। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से की गई एहतियात आखिरकार काम आई। शुक्रवार को दिल्ली रोड पर फतेहगंज पश्चिमी टोल प्लाजा पर कैंप लगाकर दिन भर में करीब 390 यात्रियों की जांच की गई जिनमें सात लोग संक्रमित मिले। पहले ही दिन जांच का यह नतीजा सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी हतप्रभ रह गए। इससे यह भी साफ हो गया कि पिछले दिनों में दिल्ली से बरेली लौटे तमाम और लोग संक्रमित हो सकते हैं जो यहां फिर संक्रमण फैलाने का जरिया बन सकते हैं।
दिल्ली में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस बात से चिंतित है कि दिल्ली और बरेली के बीच रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही की वजह से तमाम लोग दिल्ली से संक्रमित होकर बरेली आ सकते हैं और यहां फिर संक्रमण फैला सकते हैं। डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने गुरुवार को फतेहगंज पश्चिमी के टोल प्लाजा पर कैंप लगाकर दिल्ली से आने वाले लोगों की एंटीजन और संदिग्धों की आरटीपीसीआर जांच कराने के निर्देश दिए थे। शुक्रवार सुबह फतेहगंज पश्चिमी सीएचसी की ओर से कैंप लगाकर जांच शुरू कर दी गई। शाम सात बजे तक दिल्ली से आने वाले लोगों में सात संक्रमित मिले। रात नौ बजे तक सैंपलिंग जारी रही। इस दौरान एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम, डॉ. संचित शर्मा, यूपी रोडवेज इंटरसेप्टर के एटीआई अभिषेक कुमार, रजनीश कपूर आदि मौजूद रहे।
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दिल्ली में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस बात से चिंतित है कि दिल्ली और बरेली के बीच रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही की वजह से तमाम लोग दिल्ली से संक्रमित होकर बरेली आ सकते हैं और यहां फिर संक्रमण फैला सकते हैं। डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने गुरुवार को फतेहगंज पश्चिमी के टोल प्लाजा पर कैंप लगाकर दिल्ली से आने वाले लोगों की एंटीजन और संदिग्धों की आरटीपीसीआर जांच कराने के निर्देश दिए थे। शुक्रवार सुबह फतेहगंज पश्चिमी सीएचसी की ओर से कैंप लगाकर जांच शुरू कर दी गई। शाम सात बजे तक दिल्ली से आने वाले लोगों में सात संक्रमित मिले। रात नौ बजे तक सैंपलिंग जारी रही। इस दौरान एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम, डॉ. संचित शर्मा, यूपी रोडवेज इंटरसेप्टर के एटीआई अभिषेक कुमार, रजनीश कपूर आदि मौजूद रहे।
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राहत मिलने के साथ चिंताएं भी बढ़ीं
सुबह नौ से दोपहर तीन बजे तक पहली टीम ने जांच की और 118 सैंपल लिए, इनमें एक युवक संक्रमित मिला। एमएमयू की दूसरी टीम ने 272 लोगों की जांच की। इनमें छह संक्रमित मिले। संक्रमितों के ट्रेस होने से एक तरफ जहां अफसरों ने राहत महसूस की, दूसरी तरफ इस कारण चिंता भी बढ़ गई कि पिछले दिनों दिल्ली से लौटे लोगों में अगर ज्यादा संक्रमित हुए तो वे कई और लोगों में भी संक्रमण फैला सकते हैं। ऐसे लोगों से अपनी तबीयत बिगड़ते ही जांच कराने को कहा गया है।
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तरीका कारगर पर लोग सहयोग करें
संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक दिल्ली से बरेली आने का कोई और मार्ग नहीं है। इसलिए सीमा पर जांच करना कारगर तरीका हो सकता है। कुछ लोग जांच में अभी निगेटिव हो सकते हैं लेकिन बाद में संक्रमित होने पर उनकी ट्रेसिंग काफी मुश्किल होगी। इससे बचने के लिए सभी लोगों को स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन का सहयोग करना चाहिए ताकि उनका परिवार सुरक्षित रहे।इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की भी जरूरत
चिकित्सकों के मुताबिक सीमा पर जांच करने का कदम सराहनीय है लेकिन दिल्ली से आने वालों को ट्रेस करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की भी जरूरत है। दिल्ली से बरेली तक छह टोल प्लाजा पड़ते हैं। उन लोगों की जांच जरूर होनी चाहिए जिन्होंने पिछले पांच टोल क्रॉस किए हों। हालांकि लोग जांच से बचने के लिए लोग खुद को मुरादाबाद-रामपुर से आना बताकर खतरा भी बढ़ा सकते हैं।शहरवासियों को होना पड़ेगा जागरूक
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुदीप सरन का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ेगा तो संभव है कि लोग शॉर्ट कट अपनाने का प्रयास करें जो संक्रमण की वजह बन सकता है। इसके लिए जरूरी है कि लोग भी जागरूक बने और उन लोगों पर निगाह रखें जो दिल्ली से आए हैं।दिल्ली में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। हर दिन तमाम लोग दिल्ली से बरेली लौटते हैं जिनमें कुछ संक्रमित हो सकते हैं और उन्हें ट्रेस करना बेहद जरूरी है। इस आशंका को नजरंदाज नहीं किया जा सकता कि दिल्ली में संक्रमित होकर लौट रहे लोग यहां तमाम लोगों में संक्रमण फैला सकते हैं। - नितीश कुमार, डीएम
दिल्ली से आने वालों में संक्रमितों को ट्रेस करने के लिए टोल प्लाजा पर जांच शिविर लगाया गया है। शिविर में वैसे तो एंटीजन जांच की गई मगर जो हाई रिस्क पर थे उनका आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल लिया गया। संक्रमितों को लक्षण के आधार पर आइसोलेट किया जा रहा है। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ