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अफसरों ने किया मूड का सत्यानाश.. इसीलिए गुस्से में गजराज
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बरेली/फतेहगंज पश्चिमी। परचई गांव में सोमवार की शाम ट्रैंक्युलाइज किए गए दुधवा नेशनल पार्क का हाथी गजराज सुबह होश में आते ही फिर बेकाबू हो गया। उसने एक बार फिर पैरों में बंधी जंजीरें तोड़ने के लिए जोर लगाना शुरू किया तो अफसर तनाव में आ गए। बुरी तरह गुस्साए गजराज के गांव में उत्पात मचाने की आशंका के कारण एक बार फिर उसे ट्रैंक्युलाइज कर क्रेन के जरिये ट्रक में लादा गया और फिर रबर फैक्ट्री पहुंचा दिया गया जहां उसे फिर जंजीरों में जकड़ दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की वजह से गजराज का मूड बदला है। ऐसे में आसपास भीड़ देखकर उसे गुस्सा आ रहा है।
गजराज को तीन हथिनियों के साथ दुधवा नेशनल पार्क से लाया गया था ताकि नेपाल के हाथियों को हांका लगाकर वापस भेजा जा सके। रविवार को अचानक गजराज का मूड बदल गया। वह अचानक उग्र हो गया तो जैसे-तैसे उसे काबू में किया गया और जंजीरों से बांध दिया गया। इसके बावजूद गजराज आसपास भीड़ को देखकर बार-बार उखड़ता रहा। सोमवार की सुबह उसने अपने अगले पैरों की जंजीरें तोड़ दीं तो अफसरों की धड़कनें बढ़ गईं। आनन-फानन में उसे ट्रैंक्युलाइज कर फिर जंजीरें बांध दी गईं। सतर्कतावश पास ही स्थित दोनों स्कूल भी बंद करा दिए गए। लेकिन मंगलवार सुबह होश में आते ही गजराज फिर बिगड़ गया। इस पर उसे दोबारा ट्रैंक्युलाइज करना पड़ा। बेहोश होने के बाद उसे क्रेन के जरिये एक ट्रक में लादा गया और फिर रबर फैक्ट्री लाकर खाली पड़ी आवासीय कॉलोनी में दो पेड़ों के साथ जंजीरों से जकड़ दिया गया। बरेली के साथ नैनीताल और दुधवा वन विभाग की टीम भी उसकी निगरानी में लगी हुई है।
गजराज को देखने पहुुंचे दुधवा के डायरेक्टर
शाम को दुधवा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर संजय पाठक मौके पर पहुंचे। उन्होंने गजराज की हालत को देखते हुए मौजूद वन विभाग की टीम को उसकी सेहत का ध्यान रखने के सख्त निर्देश दिए। डॉ. आरके सिंह ने डायरेक्टर को गजराज की हालत में सुधार होने की जानकारी दी। उनके मुताबिक पिछले दिनों गजराज को चारा मिलने में देरी हुई, जिसके चलते भूख से व्याकुल होने से गजराज बेकाबू हो गया।
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विशेषज्ञ बोले, एकांतवास करेगा गजराज को शांत
डॉ. आरके सिंह के मुताबिक 25 वर्षीय गजराज कई दिनों से हथिनियों के साथ है। ये मौसम भी हाथियों की मेटिंग के लिए अनुकूल है, इसी वजह से गजराज का मूड चेंज हो गया मानी है। डॉ. सिंह ने बताया कि हीट के दौरान एकांतवास करने वाले गजराज भीड़ को देखकर आक्रामक हो गया था, जो स्वाभाविक है। अब एकांत में रहने से उसकी हालत में जल्द सुधार हो जाएगा।
गजराज को देखने पहुंचे लोगों को हटाया
गजराज को एकांतवास का मौका देने की कोशिश उसे परचई गांव से रबर फैक्ट्री लाने के बाद भी पूरी नहीं हुई। गजराज को देखने के लिए यहां भी भीड़ उमड़ने लगी। उसकी देखरेख में जुटे एसडीओ बीएन सिंह, दुधवा वार्डन एसके अमरीश, डॉ. आरके सिंह, डॉ. दया और वन दरोगा एससी भास्कर ने भीड़ को हटाकर वहां दोबारा आने से मना किया। हालांकि इसके बाद भी लोग नहीं माने।
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गजराज को तीन हथिनियों के साथ दुधवा नेशनल पार्क से लाया गया था ताकि नेपाल के हाथियों को हांका लगाकर वापस भेजा जा सके। रविवार को अचानक गजराज का मूड बदल गया। वह अचानक उग्र हो गया तो जैसे-तैसे उसे काबू में किया गया और जंजीरों से बांध दिया गया। इसके बावजूद गजराज आसपास भीड़ को देखकर बार-बार उखड़ता रहा। सोमवार की सुबह उसने अपने अगले पैरों की जंजीरें तोड़ दीं तो अफसरों की धड़कनें बढ़ गईं। आनन-फानन में उसे ट्रैंक्युलाइज कर फिर जंजीरें बांध दी गईं। सतर्कतावश पास ही स्थित दोनों स्कूल भी बंद करा दिए गए। लेकिन मंगलवार सुबह होश में आते ही गजराज फिर बिगड़ गया। इस पर उसे दोबारा ट्रैंक्युलाइज करना पड़ा। बेहोश होने के बाद उसे क्रेन के जरिये एक ट्रक में लादा गया और फिर रबर फैक्ट्री लाकर खाली पड़ी आवासीय कॉलोनी में दो पेड़ों के साथ जंजीरों से जकड़ दिया गया। बरेली के साथ नैनीताल और दुधवा वन विभाग की टीम भी उसकी निगरानी में लगी हुई है।
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गजराज को देखने पहुुंचे दुधवा के डायरेक्टर
शाम को दुधवा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर संजय पाठक मौके पर पहुंचे। उन्होंने गजराज की हालत को देखते हुए मौजूद वन विभाग की टीम को उसकी सेहत का ध्यान रखने के सख्त निर्देश दिए। डॉ. आरके सिंह ने डायरेक्टर को गजराज की हालत में सुधार होने की जानकारी दी। उनके मुताबिक पिछले दिनों गजराज को चारा मिलने में देरी हुई, जिसके चलते भूख से व्याकुल होने से गजराज बेकाबू हो गया।
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विशेषज्ञ बोले, एकांतवास करेगा गजराज को शांत
डॉ. आरके सिंह के मुताबिक 25 वर्षीय गजराज कई दिनों से हथिनियों के साथ है। ये मौसम भी हाथियों की मेटिंग के लिए अनुकूल है, इसी वजह से गजराज का मूड चेंज हो गया मानी है। डॉ. सिंह ने बताया कि हीट के दौरान एकांतवास करने वाले गजराज भीड़ को देखकर आक्रामक हो गया था, जो स्वाभाविक है। अब एकांत में रहने से उसकी हालत में जल्द सुधार हो जाएगा।
गजराज को देखने पहुंचे लोगों को हटाया
गजराज को एकांतवास का मौका देने की कोशिश उसे परचई गांव से रबर फैक्ट्री लाने के बाद भी पूरी नहीं हुई। गजराज को देखने के लिए यहां भी भीड़ उमड़ने लगी। उसकी देखरेख में जुटे एसडीओ बीएन सिंह, दुधवा वार्डन एसके अमरीश, डॉ. आरके सिंह, डॉ. दया और वन दरोगा एससी भास्कर ने भीड़ को हटाकर वहां दोबारा आने से मना किया। हालांकि इसके बाद भी लोग नहीं माने।