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पीलीभीत में न मिलता ग्रीन सिग्नल तो बरेली न पहुंचते हाथी
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बरेली/पीलीभीत। फॉरेस्ट गार्ड समेत अब तक चार लोगों की जान ले चुके नेपाल के हाथी बरेली न पहुंचे होते, अगर पीलीभीत टाइगर रिजर्व से ही उन्हें नेपाल की ओर लौटाने का सार्थक प्रयास किया गया होता। टाइगर रिजर्व के स्टाफ के लिए यह काम काफी आसान था, लेकिन यह सोचा ही नहीं गया कि ये हाथी अगर बरेली की ओर निकल गए तो कितनी बड़ी मुसीबत बन जाएंगे। यही वजह रही कि अलर्ट जारी होने के बावजूद टाइगर रिजर्व का स्टाफ आराम की नींद सोता रहा और हाथी रात में लंबा सफर तय कर बरेली निकल आए।
नेपाल की शुक्लाफांटा सेंक्चुरी से करीब 100 किमी दूरी तय कर ये हाथी बरेली पहुंच पिछले दस दिनों से उत्पात मचा रहे हैं। ऐसा नहीं कि नेपाल से पहली बार हाथी पीलीभीत के जंगल में पहुंचे हों, इससे पहले भी कई बार हाथी पीलीभीत से सटे लग्गा-भग्गा और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में आते रहे हैं। दो साल पहले भी नेपाल के हाथी लग्गा-भग्गा के जंगलों से होते हुए पीलीभीत की महोफ रेंज तक पहुंच गए थे। तब टाइगर रिजर्व के स्टाफ ने दिन-रात एक कर उन्हें वापस नेपाल रवाना कर दिया था। दरअसल शुक्लाफांटा सेंक्चुरी का जंगल पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के जंगल से मिला हुआ है। दो सप्ताह पहले बराही रेंज के लग्गा भग्गा जंगल से निकले ये हाथी शारदा नदी और डैम पार कर महोफ के जंगल में पहुंचे तो अलर्ट जारी किया गया। इसके बावजूद टाइगर रिजर्व से हाथियों का रुख वापस नेपाल की ओर मोड़ने की कोई खास कोशिश नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि हाथी बरेली की ओर निकल आए और बरेली और रामपुर में चार लोगों की जान भी ले चुके हैं।
हाथियों के आने की सूचना मिलते ही सतर्कता बढ़ा दी गई थी, लेकिन रात के समय हाथी जंगल से बाहर निकल गए थे। इसके बाद भी उनकी निगरानी जारी रही। चूंकि हाथी को आसानी से नहीं रोका जा सकता, इसलिए वे बरेली की ओर निकल गए। -आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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अभी पूरा विभाग हाथियों की घर वापसी कराने के प्रयास में जुटा हुआ है। इस अभियान के बाद हाथी कैसे बरेली तक पहुंचे, इस बिंदु की भी समीक्षा की जाएगी। अगर किसी स्तर पर कोई कमी या लापरवाही पाई जाएगी तो उस पर कार्रवाई भी की जाएगी। - ललित कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक
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नेपाल की शुक्लाफांटा सेंक्चुरी से करीब 100 किमी दूरी तय कर ये हाथी बरेली पहुंच पिछले दस दिनों से उत्पात मचा रहे हैं। ऐसा नहीं कि नेपाल से पहली बार हाथी पीलीभीत के जंगल में पहुंचे हों, इससे पहले भी कई बार हाथी पीलीभीत से सटे लग्गा-भग्गा और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में आते रहे हैं। दो साल पहले भी नेपाल के हाथी लग्गा-भग्गा के जंगलों से होते हुए पीलीभीत की महोफ रेंज तक पहुंच गए थे। तब टाइगर रिजर्व के स्टाफ ने दिन-रात एक कर उन्हें वापस नेपाल रवाना कर दिया था। दरअसल शुक्लाफांटा सेंक्चुरी का जंगल पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के जंगल से मिला हुआ है। दो सप्ताह पहले बराही रेंज के लग्गा भग्गा जंगल से निकले ये हाथी शारदा नदी और डैम पार कर महोफ के जंगल में पहुंचे तो अलर्ट जारी किया गया। इसके बावजूद टाइगर रिजर्व से हाथियों का रुख वापस नेपाल की ओर मोड़ने की कोई खास कोशिश नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि हाथी बरेली की ओर निकल आए और बरेली और रामपुर में चार लोगों की जान भी ले चुके हैं।
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हाथियों के आने की सूचना मिलते ही सतर्कता बढ़ा दी गई थी, लेकिन रात के समय हाथी जंगल से बाहर निकल गए थे। इसके बाद भी उनकी निगरानी जारी रही। चूंकि हाथी को आसानी से नहीं रोका जा सकता, इसलिए वे बरेली की ओर निकल गए। -आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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अभी पूरा विभाग हाथियों की घर वापसी कराने के प्रयास में जुटा हुआ है। इस अभियान के बाद हाथी कैसे बरेली तक पहुंचे, इस बिंदु की भी समीक्षा की जाएगी। अगर किसी स्तर पर कोई कमी या लापरवाही पाई जाएगी तो उस पर कार्रवाई भी की जाएगी। - ललित कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक