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पिता के विरोध के बाद भी बरेली में ही हुई अंत्येष्टि
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बरेली। हेमंत का अंतिम संस्कार बरेली में हो या उनके गृह जनपद कासगंज में, इस पर उनके पिता की रिश्तेदारों से नोंकझोंक हो गई। बाद में कुछ रिश्तेदारों के समझाने पर मामला शांत हो गया और बरेली में ही अंतिम संस्कार किया गया।
हेमंत के पिता और एक भाई कासगंज रहते हैं। पिता कांति स्वरूप चाहते थे कि हेमंत का अंतिम संस्कार कासगंज में हो। उन्होंने शव को कासगंज ले जाने की मंशा जताई तो हेमंत के ससुर नत्थूलाल राठौर और मोहल्ले के कुछ लोगों ने एतराज जताया। कुछ देर नोकझोंक के बाद कांति स्वरूप बरेली में अंतिम संस्कार पर राजी हो गए लेकिन उनका कहना था कि उनका छोटा बेटा नितेश इंदौर में नौकरी करता है। वह वहां से चल दिया है। अब उसके आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाए। उधर हेमंत के ससुराल वालों ने दस बजे ही शव फ्रीजर से निकालकर बाहर रख दिया था। लिहाजा छोटे भाई के आने से पहले ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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हेमंत के पिता और एक भाई कासगंज रहते हैं। पिता कांति स्वरूप चाहते थे कि हेमंत का अंतिम संस्कार कासगंज में हो। उन्होंने शव को कासगंज ले जाने की मंशा जताई तो हेमंत के ससुर नत्थूलाल राठौर और मोहल्ले के कुछ लोगों ने एतराज जताया। कुछ देर नोकझोंक के बाद कांति स्वरूप बरेली में अंतिम संस्कार पर राजी हो गए लेकिन उनका कहना था कि उनका छोटा बेटा नितेश इंदौर में नौकरी करता है। वह वहां से चल दिया है। अब उसके आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाए। उधर हेमंत के ससुराल वालों ने दस बजे ही शव फ्रीजर से निकालकर बाहर रख दिया था। लिहाजा छोटे भाई के आने से पहले ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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