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Bareilly News: बेटे को स्कूल वाहन तक छोड़ने गई पत्नी, 15 मिनट बाद लौटी तो दरवाजे पर मिली पति की जली लाश

Fri, 18 Jul 2025 02:34 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 18 Jul 2025 02:34 PM IST
सार

गोसलपुर गांव में शुक्रवार सुबह एक युवक की जली लाश घर के दरवाजे पर पड़ी मिली। उसकी पत्नी के मुताबिक वह बेटे को स्कूल वाहन तक छोड़ने गई थी। 15 मिनट बाद लौटी तो दरवाजे पर पति की लाश मिली। पुलिस घटना की जांच कर रही है। 

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Wife went to drop her son to school vehicle returned after 15 minutes dound her husband burnt body in house
मौके पर जांच करती पुलिस, घर के बाहर जुटी महिलाएं - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बरेली के हाफिजगंज थाना क्षेत्र के गोसलपुर गांव में एक व्यक्ति का शव उसके घर में ही जला हुआ मिला। घटनाक्रम महज 15 मिनट में हुआ, जब उसकी पत्नी अपने बेटे को स्कूल वाहन तक छोड़ने गई थी। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके की पड़ताल कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। पोस्टमॉर्टम में भी जलकर मरने की पुष्टि हुई है।

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गांव की जयंती देवी ने बताया कि शुक्रवार सुबह सात बजे वह अपने पांच साल के बेटे मयंक को स्कूल वाहन तक छोड़ने गई थीं। कुछ देर बाद जब वह लौटीं तो उनके पति लोचन प्रसाद (35) का जला हुआ शव घर के दरवाजे पर पड़ा था। वह समझ नहीं पाई कि ऐसा कैसे हो गया। 
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आसपास कोई और था भी नहीं। उसने शोर मचाया तो पड़ोसी आ गए। सूचना पर पहुंचे सीओ नवाबगंज गौरव सिंह ने बताया कि हर पहलू पर जांच की जा रही है। मामला संदिग्ध लग रहा है। अगर घर में आग लगती तो कोई और सामान भी जलता। उसने बचने के लिए शोर भी नहीं मचाया। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

कई सवाल अनसुलझे 
केवल 15 मिनट के अंतराल में किसान की घर में जिंदा जलकर मौत के मामले में कई सवाल अनसुलझे हैं। पुलिस आसपास के लोगों से सुरागकशी में जुटी है। जयंती देवी के मुताबिक बच्चे को स्कूल तक छोड़कर आने में उन्हें बमुश्किल 15 मिनट लगे। इतनी ही देर में पति जयंती प्रसाद की जलकर मौत हो चुकी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि घर में आग लगी तो अन्य सामान क्यों नहीं जला। 

आग लगने के बाद लोचन ने बचाव के लिए किसी को आवाज क्यों नहीं दी? जब गेट खुला था तो वह बचने के लिए क्यों नहीं भागा? घर में दिन में आग लगी तो किसी ने धुंआ क्यों नहीं देखा? ऐसे कई सवाल हैं जो साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। 

ग्रामीणों ने बताया कि लोचन प्रसाद की आठ साल पहले शादी हुई थी। पत्नी से विवाद के चलते दोनों अलग हो गए थे। कुछ साल पहले लोचन की दूसरी शादी हाफिजगंज थाना क्षेत्र के गांव ग्रेम निवासी जयंती देवी से हुई थी। जयंती दो महीने से मायके में ही थी। बुधवार को ही वह घर आई थी। शव के पास केवल जयंती का जला मोबाइल फोन मिला। 

पीलीभीत से जमीन बेचकर मामा के गांव में बसे
जयंती देवी ने बताया कि लोचन का पैतृक गांव बारगुलियां थाना जहानाबाद में है। उनके पति आठ साल से यहां मामा बेचेलाल के पास रहते थे। उन्होंने पीलीभीत के गांव में अपनी पैतृक पौने पांच बीघा जमीन 7.60 लाख रुपये में बेची थी और मामा के घर के पास मकान बनाने के लिए जमीन खरीद ली थी। इसमें उन्होंने पटान कराया था और टिन शेड डालकर रह रहे थे।

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