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शासन ने पूछा आखिर क्यों नहीं कराई एनकाउंटर मामलों की न्यायिक जांच
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बरेली। एनकाउंटर के मामलों की न्यायिक जांच न कराने पर शासन ने प्रशासन से जवाब तलब किया है। पूछा है कि आखिर क्या वजह रही जिसकी वजह से इन मामलों की न्यायिक जांच नहीं हो सकी। डीएम ने एडीएम सिटी को ऐसे सभी मामलों की जानकारी लेकर जल्द से जल्द शासन को जवाब भेजने के लिए कहा है। एडीएम सिटी ने वर्ष 2020 में हुए सभी एनकाउंटर के संबंध में एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट से जानकारी मांगी है।
प्रदेश में अपराधों की रोकथाम के लिए योगी सरकार में अपराधियों पर पुलिस ने खूब गोलियां बरसाईं हैं। कभी बदमाशों को गोली लगी तो कभी छूकर निकल गई। मुठभेड में पुलिसकर्मी भी चोटिल होते रहे। नियमानुसार ऐसे सभी प्रकरणों की मजिस्ट्रेटी जांच करानी चाहिए। मगर, अफसरों ने नियमों को ताक पर रख दिया। एनकाउंटरों की मजिस्ट्रेटी जांचें लंबित होने का मामला शासन तक पहुंचा तो हड़कंप मच गया है। पहले एनकाउंटर पर सवाल उठे थे मगर अब उनकी जांच न कराए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। एडीएम और एसीएम के पास संबंधित एनकाउंटरों की जांचें लंबित है। ऐसे में अब शासन ने प्रशासन से जवाब मांगा गया है कि आखिर किन हालात में एनकाउंटर की मजिस्ट्रेटी जांच नहीं कराई जा सकी।
इन मामलों पर उठे थे सवाल
बीते दिनों पुलिस ने ताबड़तोड़ एनकाउंटर किए। इन पर सवाल भी उठते रहे मगर कोई सुनवाई नहीं की गई। अहलादपुर एनकाउंटर और एक सिपाही के हत्यारोपियों के एनकाउंटर के मामले में भी पुलिस की भूमिका संदिग्ध मानी जाती रही। मगर विभागीय जांच में एनकाउंटर को क्लीन चिट दे दी गई। मेडिकल रिपोर्ट बनाने में भी खेल का आरोप लगा। सवाल अब भी बरकार हैं।
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इन बिंदुओं पर होती है मजिस्ट्रेटी जांच
एनकाउंटर के बाद संबंधित प्रकरण पर कोई सवाल उठे तो उसका तत्काल जवाब देने के लिए मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाती है। इसमें एनकाउंटर किए जाने की वजह और हालात, संबंधित अपराधी का क्राइम रिकॉर्ड, शामिल पुलिसकर्मियों का ब्योरा, अपराधी के परिवार के लोगों के बयान और अन्य कई बिन्दुओं पर जांच की जाती है। फिलहाल कई एनकाउंटर की मजिस्ट्रेटी जांचें एसडीएम और एसीएम के पास लंबित हैं।
कोरोना संक्रमण की रोकथाम में सभी के व्यस्त हो जाने की वजह से जांच नहीं की जा सकी। अब सभी जांचें पूरी कराने के साथ ही, मामलों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। इसे शासन को भेजा जाएगा। - महेंद्र कुमार सिंह, एडीएम सिटी
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प्रदेश में अपराधों की रोकथाम के लिए योगी सरकार में अपराधियों पर पुलिस ने खूब गोलियां बरसाईं हैं। कभी बदमाशों को गोली लगी तो कभी छूकर निकल गई। मुठभेड में पुलिसकर्मी भी चोटिल होते रहे। नियमानुसार ऐसे सभी प्रकरणों की मजिस्ट्रेटी जांच करानी चाहिए। मगर, अफसरों ने नियमों को ताक पर रख दिया। एनकाउंटरों की मजिस्ट्रेटी जांचें लंबित होने का मामला शासन तक पहुंचा तो हड़कंप मच गया है। पहले एनकाउंटर पर सवाल उठे थे मगर अब उनकी जांच न कराए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। एडीएम और एसीएम के पास संबंधित एनकाउंटरों की जांचें लंबित है। ऐसे में अब शासन ने प्रशासन से जवाब मांगा गया है कि आखिर किन हालात में एनकाउंटर की मजिस्ट्रेटी जांच नहीं कराई जा सकी।
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इन मामलों पर उठे थे सवाल
बीते दिनों पुलिस ने ताबड़तोड़ एनकाउंटर किए। इन पर सवाल भी उठते रहे मगर कोई सुनवाई नहीं की गई। अहलादपुर एनकाउंटर और एक सिपाही के हत्यारोपियों के एनकाउंटर के मामले में भी पुलिस की भूमिका संदिग्ध मानी जाती रही। मगर विभागीय जांच में एनकाउंटर को क्लीन चिट दे दी गई। मेडिकल रिपोर्ट बनाने में भी खेल का आरोप लगा। सवाल अब भी बरकार हैं।
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इन बिंदुओं पर होती है मजिस्ट्रेटी जांच
एनकाउंटर के बाद संबंधित प्रकरण पर कोई सवाल उठे तो उसका तत्काल जवाब देने के लिए मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाती है। इसमें एनकाउंटर किए जाने की वजह और हालात, संबंधित अपराधी का क्राइम रिकॉर्ड, शामिल पुलिसकर्मियों का ब्योरा, अपराधी के परिवार के लोगों के बयान और अन्य कई बिन्दुओं पर जांच की जाती है। फिलहाल कई एनकाउंटर की मजिस्ट्रेटी जांचें एसडीएम और एसीएम के पास लंबित हैं।
कोरोना संक्रमण की रोकथाम में सभी के व्यस्त हो जाने की वजह से जांच नहीं की जा सकी। अब सभी जांचें पूरी कराने के साथ ही, मामलों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। इसे शासन को भेजा जाएगा। - महेंद्र कुमार सिंह, एडीएम सिटी