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कहां गुम हो गया वीरपाल का इस्तीफा
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Thu, 08 Sep 2016 01:29 AM IST
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पूर्व सासंद वीरपाल सिंह यादव का जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा कहां गया कुछ पता नहीं चल रहा है। प्रदेश मुख्यालय से न तो इस्तीफे की पुष्टि हो रही है और न ही डांट-डपट या मान मनुहार। वीरपाल विरोधी यहां तक कहने लगे हैं कि उन्होंने यूं ही हवा में कोई नया राजनीतिक दांव तो नहीं चला है। वैसे ये तो सच है कि इस्तीफा लिखा गया। वीरपाल ने इसकी पुष्टि भी की और मीडिया तक इसे पहुंचाया भी गया। पूरा एक दिन गुजर गया लखनऊ मुख्यालय पर सपा नेताओं की मीटिंग में वीरपाल के इस्तीफे पर चर्चा तक नहीं हुई।
बरेली में हलचल के बावजूद भी हाईकमान ने वीरपाल प्रकरण को बहुत गंभीरता से नहीं लिया। सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि बरेली में वीरपाल सिंह यादव के इस्तीफा देने के बारे में उनको कोई जानकारी नहीं है। इधर वीरपाल सामान्य ढंग से अपना काम भी कर रहे हैं। इस्तीफा देने के अगले दिन उन्होंने मीरगंज पहुंचकर सपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में हिस्सा लिया। वहां से लौटने के बाद इस्तीफा देने के बारे में किसी से कोई बात नहीं की। उनके करीबी भी इस बारे में कुछ नहीं बोल रहे हैं।
उधर, वीरपाल सिंह यादव के जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देते ही इस पद की दौड़ में शामिल सपा नेता लखनऊ के चक्कर लगाने लगे हैं। कुछ सपाई लखनऊ पहुंचकर हालात पता करने के बाद देर रात बरेली वापस आ गए तो एक नेता बदायूं सांसद से मिलकर खुद को जिलाध्यक्ष बनाने की पैरवी कराने में लगे हैं। पांच जिला उपाध्यक्षों में तीन की नजर भी इस पद पर लगी है। ये भविष्य के गर्भ में है कि हाईकमान जिलाध्यक्ष पद से वीरपाल का इस्तीफा स्वीकार करेगा या नहीं। इस्तीफा स्वीकृत होने की स्थिति में उनके किसी समर्थक को जिलाध्यक्ष बनाया जाएगा या फिर विरोधी खेमे के किसी नेता को। सबकी नजरें इसी पर टिकी हैं।
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बरेली में हलचल के बावजूद भी हाईकमान ने वीरपाल प्रकरण को बहुत गंभीरता से नहीं लिया। सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि बरेली में वीरपाल सिंह यादव के इस्तीफा देने के बारे में उनको कोई जानकारी नहीं है। इधर वीरपाल सामान्य ढंग से अपना काम भी कर रहे हैं। इस्तीफा देने के अगले दिन उन्होंने मीरगंज पहुंचकर सपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में हिस्सा लिया। वहां से लौटने के बाद इस्तीफा देने के बारे में किसी से कोई बात नहीं की। उनके करीबी भी इस बारे में कुछ नहीं बोल रहे हैं।
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उधर, वीरपाल सिंह यादव के जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देते ही इस पद की दौड़ में शामिल सपा नेता लखनऊ के चक्कर लगाने लगे हैं। कुछ सपाई लखनऊ पहुंचकर हालात पता करने के बाद देर रात बरेली वापस आ गए तो एक नेता बदायूं सांसद से मिलकर खुद को जिलाध्यक्ष बनाने की पैरवी कराने में लगे हैं। पांच जिला उपाध्यक्षों में तीन की नजर भी इस पद पर लगी है। ये भविष्य के गर्भ में है कि हाईकमान जिलाध्यक्ष पद से वीरपाल का इस्तीफा स्वीकार करेगा या नहीं। इस्तीफा स्वीकृत होने की स्थिति में उनके किसी समर्थक को जिलाध्यक्ष बनाया जाएगा या फिर विरोधी खेमे के किसी नेता को। सबकी नजरें इसी पर टिकी हैं।
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