{"_id":"66b16ba1cdee99bc890c8604","slug":"when-the-officer-of-sachhas-clashed-abvp-workers-came-in-protest-bareilly-news-c-4-lko1018-453955-2024-08-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: सछास का पदाधिकारी भिड़ा तो विरोध में आए एबीवीपी कार्यकर्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: सछास का पदाधिकारी भिड़ा तो विरोध में आए एबीवीपी कार्यकर्ता
Tue, 06 Aug 2024 05:47 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 06 Aug 2024 05:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। बरेली कॉलेज में सोमवार को हिंदी विभाग विभाग प्रभारी से समाजवादी छात्र सभा (सछास) के पदाधिकारियों की बहस हो गई। इस पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी सछास के विरोध और शिक्षक के समर्थन में आ गए। काफी देर तक हंगामा चलता रहा। पुलिस के पहुंचने पर सछास पदाधिकारी ने विभाग प्रभारी से माफी मांगी। तब मामला शांत हुआ।
हिंदी विभाग प्रभारी प्रो. परमजीत कौर के पास सछास के महानगर अध्यक्ष विक्रांत पाल एक शोध छात्र की पैरवी लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि शोध छात्र के दस्तावेजों में गड़बड़ी थी, जिस वजह से प्रभारी ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इस बीच विक्रांत और प्रो. परमजीत में बहस होने लगी। उन्होंने अपने भाई कॉमर्स विभाग प्रभारी डॉ. भूपेंद्र सिंह को बुला लिया। हंगामा होता देख अभाविप के पदाधिकारी भी पहुंच गए। सछास जिलाध्यक्ष अविनाश मिश्रा और एबीवीपी के विभाग सह संयोजक श्रेयांस वाजपेयी के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मुख्य नियंता प्रो. आलोक खरे ने दोनों को शांत कराया। सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण के पीछे विभाग की ही एक शिक्षक को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसके विरोध में पिछले दिनों विभाग प्रभारी प्राचार्य से मिली थीं।
संगठन के लिए अपशब्द कहने का आरोप
विभाग में हंगामे की शिकायत पर पुलिस भी पहुंच गई। वहां अविनाश मिश्रा ने प्रोफेसर से माफी मांगते हुए कहा कि वह उनकी गुरु समान है। उनका किसी ने अपमान नहीं किया। इस पर प्रो. परमजीत ने विक्रांत को माफ कर दिया। विक्रांत ने आरोप लगाया कि विभाग में आते ही डॉ. भूपेंद्र सिंह जो एबीवीपी में भी सक्रिय है, उन्होंने सछास के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया, जिसका विरोध किया।
विज्ञापन
शिक्षक संघ के नहीं पहुंचने पर जताई नाराजगी
मामले में प्रोफेसर का समर्थन करने के लिए डॉ. भूपेंद्र सिंह ने शिक्षक संघ के पदाधिकारियों को कॉल की। काफी देर हंगामा होने के बाद भी अन्य शिक्षकों के नहीं पहुंचने पर डॉ. भूपेंद्र ने पदाधिकारियों से नाराजगी जताई।
वर्जन
हिंदी विभाग प्रभारी से कुछ छात्रों की कहासुनी हो गई थी। बाद में बहस करने वाले छात्रों ने माफी मांग ली है, जिन्हें प्रभारी ने माफ भी कर दिया है। -प्रो. आलोक खरे, मुख्य नियंता, बरेली कॉलेज
विज्ञापन
हिंदी विभाग प्रभारी प्रो. परमजीत कौर के पास सछास के महानगर अध्यक्ष विक्रांत पाल एक शोध छात्र की पैरवी लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि शोध छात्र के दस्तावेजों में गड़बड़ी थी, जिस वजह से प्रभारी ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इस बीच विक्रांत और प्रो. परमजीत में बहस होने लगी। उन्होंने अपने भाई कॉमर्स विभाग प्रभारी डॉ. भूपेंद्र सिंह को बुला लिया। हंगामा होता देख अभाविप के पदाधिकारी भी पहुंच गए। सछास जिलाध्यक्ष अविनाश मिश्रा और एबीवीपी के विभाग सह संयोजक श्रेयांस वाजपेयी के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मुख्य नियंता प्रो. आलोक खरे ने दोनों को शांत कराया। सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण के पीछे विभाग की ही एक शिक्षक को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसके विरोध में पिछले दिनों विभाग प्रभारी प्राचार्य से मिली थीं।
विज्ञापन
संगठन के लिए अपशब्द कहने का आरोप
विभाग में हंगामे की शिकायत पर पुलिस भी पहुंच गई। वहां अविनाश मिश्रा ने प्रोफेसर से माफी मांगते हुए कहा कि वह उनकी गुरु समान है। उनका किसी ने अपमान नहीं किया। इस पर प्रो. परमजीत ने विक्रांत को माफ कर दिया। विक्रांत ने आरोप लगाया कि विभाग में आते ही डॉ. भूपेंद्र सिंह जो एबीवीपी में भी सक्रिय है, उन्होंने सछास के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया, जिसका विरोध किया।
विज्ञापन
शिक्षक संघ के नहीं पहुंचने पर जताई नाराजगी
मामले में प्रोफेसर का समर्थन करने के लिए डॉ. भूपेंद्र सिंह ने शिक्षक संघ के पदाधिकारियों को कॉल की। काफी देर हंगामा होने के बाद भी अन्य शिक्षकों के नहीं पहुंचने पर डॉ. भूपेंद्र ने पदाधिकारियों से नाराजगी जताई।
वर्जन
हिंदी विभाग प्रभारी से कुछ छात्रों की कहासुनी हो गई थी। बाद में बहस करने वाले छात्रों ने माफी मांग ली है, जिन्हें प्रभारी ने माफ भी कर दिया है। -प्रो. आलोक खरे, मुख्य नियंता, बरेली कॉलेज