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Bareilly News: ट्रेन में मिले परिचित तो क्रांतिकारियों ने स्थगित कर दी थी काकोरी ट्रेन लूट की योजना
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बरेली। नौ अगस्त 1925 को काकोरी स्टेशन से थोड़ा आगे बढ़ते ही हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचआरए) के 10 क्रांतिकारियों ने ट्रेन से 4,601 रुपये का सरकारी खजाना लूट लिया। इस घटना ने ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ों को हिला दिया था।
ट्रेन डकैती की घटना को अंजाम देने के लिए दल के कई सदस्य एक सप्ताह पूर्व शाहजहांपुर में एकत्र हो गए थे। पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आठ अगस्त को एचआरए के 10 सदस्य शाहजहांपुर से रवाना हुए, लेकिन ट्रेन में कुछ परिचितों के मिल जाने से खजाने की लूट की योजना को स्थगित करना पड़ा। इतिहासकार डॉ. अनिल कुमार मिश्रा के अनुसार अगले दिन नौ अगस्त को घटना को अंजाम दिया गया। काकोरी स्टेशन से कुछ दूर आगे बढ़ते ही सेकंड क्लास डिब्बे में बैठे अशफाक उल्ला खां, शचींद्रनाथ बख्शी व राजेंद्र लाहिड़ी ने ट्रेन की चेन खींच ली। सरकारी खजाने को लूट लिया।
घटना के बाद ट्रेन डकैती में लूटा गया पांच रुपये का नोट शाहजहांपुर के बाल राम, पांच रुपये का नोट तिलहर निवासी गया सिंह व 10 रुपये का नोट हल्द्वानी से मिला था। इन साक्ष्यों से पुलिस की तफ्तीश मजबूत हुई। 36 क्रांतिकारियों को पकड़ा गया। मजिस्ट्रेट एनुद्दीन ने 31 को सेशन के सुपुर्द किया। वहीं, तीन को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। अंत में 18 क्रांतिकारियों पर सेशन कोर्ट में मुकदमा चला और सजा सुनाई गई। 17 दिसंबर 1927 को राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को गोंडा जेल में फांसी दी गई। वहीं, 19 दिसंबर को रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में, अशफाक उल्ला खां को फैजाबाद जेल में व रोशन सिंह को नैनी जेल में फांसी दी गई। इससे पूरा देश आंदोलित हो गया था।
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घटना से जुड़े अहम तथ्य
-मिस्टर हार्टन (खुफिया अधिकारी) ने काकोरी केस के प्रमुख गवाह से पूछताछ 18 अक्तूबर 1925 को रात 11:15 बजे शाहजहांपुर जेल में की।
-हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की ओर से पीलीभीत के बमरौली में 25 दिसंबर 1924 को व विचपुरी में नौ मार्च 1925 को डकैती डाली गई।
-सेठ दामोदर स्वरूप को खराब स्वास्थ्य के चलते छोड़ दिया गया।
-काकोरी ट्रेन के मुख्य गार्ड जगन्नाथ प्रसाद शर्मा व ड्राइवर मिस्टर यंग।
संवाद
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ट्रेन डकैती की घटना को अंजाम देने के लिए दल के कई सदस्य एक सप्ताह पूर्व शाहजहांपुर में एकत्र हो गए थे। पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आठ अगस्त को एचआरए के 10 सदस्य शाहजहांपुर से रवाना हुए, लेकिन ट्रेन में कुछ परिचितों के मिल जाने से खजाने की लूट की योजना को स्थगित करना पड़ा। इतिहासकार डॉ. अनिल कुमार मिश्रा के अनुसार अगले दिन नौ अगस्त को घटना को अंजाम दिया गया। काकोरी स्टेशन से कुछ दूर आगे बढ़ते ही सेकंड क्लास डिब्बे में बैठे अशफाक उल्ला खां, शचींद्रनाथ बख्शी व राजेंद्र लाहिड़ी ने ट्रेन की चेन खींच ली। सरकारी खजाने को लूट लिया।
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घटना के बाद ट्रेन डकैती में लूटा गया पांच रुपये का नोट शाहजहांपुर के बाल राम, पांच रुपये का नोट तिलहर निवासी गया सिंह व 10 रुपये का नोट हल्द्वानी से मिला था। इन साक्ष्यों से पुलिस की तफ्तीश मजबूत हुई। 36 क्रांतिकारियों को पकड़ा गया। मजिस्ट्रेट एनुद्दीन ने 31 को सेशन के सुपुर्द किया। वहीं, तीन को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। अंत में 18 क्रांतिकारियों पर सेशन कोर्ट में मुकदमा चला और सजा सुनाई गई। 17 दिसंबर 1927 को राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को गोंडा जेल में फांसी दी गई। वहीं, 19 दिसंबर को रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में, अशफाक उल्ला खां को फैजाबाद जेल में व रोशन सिंह को नैनी जेल में फांसी दी गई। इससे पूरा देश आंदोलित हो गया था।
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घटना से जुड़े अहम तथ्य
-मिस्टर हार्टन (खुफिया अधिकारी) ने काकोरी केस के प्रमुख गवाह से पूछताछ 18 अक्तूबर 1925 को रात 11:15 बजे शाहजहांपुर जेल में की।
-हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की ओर से पीलीभीत के बमरौली में 25 दिसंबर 1924 को व विचपुरी में नौ मार्च 1925 को डकैती डाली गई।
-सेठ दामोदर स्वरूप को खराब स्वास्थ्य के चलते छोड़ दिया गया।
-काकोरी ट्रेन के मुख्य गार्ड जगन्नाथ प्रसाद शर्मा व ड्राइवर मिस्टर यंग।
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